Loading...

बारिश में क्यों बढ़ जाता है हेपेटाइटिस-ए का खतरा? जानिए इसके लक्षण और बचाव के आसान तरीके

Jaipur

Follow us

Share

बरसात का मौसम राहत और ठंडक तो लाता है, लेकिन साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इस मौसम में दूषित पानी और भोजन के सेवन से पेट संबंधी रोग, वायरल संक्रमण और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां आम हो जाती हैं। इन्हीं में से एक बीमारी है हेपेटाइटिस-ए, जो बारिश में तेजी से फैलने लगती है। यह बीमारी लीवर को प्रभावित करती है और समय पर ध्यान न देने पर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इस लेख में जानेंगे कि बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस-ए क्यों बढ़ता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

हेपेटाइटिस-ए क्या है?
हेपेटाइटिस-ए, लीवर में सूजन पैदा करने वाला एक वायरल संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस-ए वायरस (HAV) से होता है। यह आमतौर पर दूषित पानी और भोजन के माध्यम से शरीर में पहुंचता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन के संपर्क में आने से फैलती है।

बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस-ए क्यों बढ़ता है?

पानी का जमाव और प्रदूषण:
बारिश के कारण जगह-जगह पानी भर जाता है और जलजमाव से पानी दूषित हो जाता है। सीवर का पानी भी पीने के पानी में मिल सकता है, जिससे HAV वायरस पानी में पहुंच जाता है।

दूषित भोजन का सेवन:
बारिश में खुले में बिकने वाला खाना और सड़क किनारे के पानी पूरी, चाट आदि में गंदा पानी और संक्रमित हाथों के कारण वायरस फैल सकता है।

स्वच्छता की कमी:
बारिश में नालियों का ओवरफ्लो, साफ-सफाई में लापरवाही और गंदगी के संपर्क में आने से भी वायरस फैलने की संभावना बढ़ जाती है।

फलों और सब्जियों की सफाई न होना:
गंदे पानी से धोई गई सब्जियों और फलों में भी वायरस हो सकता है, और इन्हें बिना सही तरह से धोए या पकाए खाने पर संक्रमण हो सकता है।

हेपेटाइटिस-ए के लक्षण (इन संकेतों से करें पहचान)
हेपेटाइटिस-ए के लक्षण संक्रमण के 14-28 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

भूख में कमी और मितली: खाने में मन न लगना और मतली आना।

कमजोरी और थकावट: बिना काम किए थकान महसूस होना।

बुखार और हल्का दर्द: हल्का बुखार और पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द।

पेट में दर्द और सूजन: खासकर ऊपरी हिस्से में दर्द और असहजता।

पेशाब का रंग गहरा होना: गहरे पीले रंग का पेशाब आना।

त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया): यह हेपेटाइटिस का प्रमुख लक्षण है।

मल का रंग हल्का होना: मल का रंग सफेद या हल्का हो जाना।

यदि इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके।

हेपेटाइटिस-ए से बचाव कैसे करें?

साफ पानी का सेवन करें:
हमेशा उबाल कर या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। बरसात में नलों का पानी दूषित हो सकता है, इसलिए उसमें सावधानी रखें।

स्वच्छ भोजन का सेवन:
खाने को ढककर रखें और बाहर के खुले भोजन से बचें। सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें।

हाथ धोने की आदत:
खाने से पहले, शौचालय जाने के बाद और बाहर से आने के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।

टीकाकरण:
हेपेटाइटिस-ए के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। डॉक्टर की सलाह लेकर इसका टीका लगवाया जा सकता है, जिससे इस बीमारी से बचाव संभव है।

शौचालय की स्वच्छता बनाए रखें:
घर में स्वच्छता पर ध्यान दें और गंदगी को तुरंत साफ करें। बच्चों को भी स्वच्छता की आदत सिखाएं।

बाहर के पानी से परहेज:
बरसात के मौसम में बाहर बिकने वाले नींबू पानी, गन्ने के रस और अन्य पेय पदार्थों के सेवन से बचें, क्योंकि इनमें दूषित पानी का प्रयोग हो सकता है।

इलाज कैसे होता है?
हेपेटाइटिस-ए का कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन शरीर को आराम, पौष्टिक आहार और साफ पानी देने से मरीज धीरे-धीरे ठीक हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं ली जाती हैं, जो लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। कुछ हफ्तों में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। मरीज को आराम करना, पानी की कमी न होने देना और हल्का, सुपाच्य भोजन करना चाहिए।

 

 

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।