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शब ए क़द्र क्या चीज है? जो अल्लाह के करीब ले जाती है

Jaipur

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जयपुर शहर के तैराक व समाज सेवक अब्दुल माजिद शेख ने बताया कि यह रात सबसे मुबारक रातों में गिनी जाती है, जो एक साल में एक बार रमज़ान के महीने में आखरी अशरे की पांच रातों में से एक रात होती है। जो 21, 23, 25, 27 एवं 29 इन पांच रातों में जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं। इस रात को शब ए क़द्र की रात इसलिए कहते हैं की क़द्र की मअनी महत्वपूर्ण के हैं क्योंकी यह रात बड़ी ऊँची मरतबे वाली है या इन वजह से शब ए क़द्र कहतें हैं कि बंदे के गुनाहों के सबब उसकी कोई क़द्र व कीमत नहीं थी। इस मुकद्दस रात में वह तौबा और कुरआन करीम की तिलावत व इबादत के जरिये वह मरतबे वाला बन जाता है।  क्योंकि इस मुबारक रात में तमाम इन्सानों की साल भर की किस्मत, हिसाब-किताब से निकाल कर के फरिश्तों के हवाले किया जाता है। क्यूंकी इस रात में फरिश्तों के कसरत से उतरने से पूरी रूह ए जमीन का हर हिस्सा तंग हो जाता है। इसलिए इस रात को शब ए क़द्र की रात कहते हैं, जो कि यह रात बहुत बड़ी खैर व बरकत वाली रात है। इस रात की अलग-अलग खूबियां बयान की गई है, कहीं पर मुबारक रात कहीं बरकत वाली रात से याद किया गया है। इस रात में हर मामले का हक ओ ईमाना फैसला किया जाता है। तो कहीं पर तिरासी बरस की इबादत से बेहतर बताई गई, तो कहीं पर फरिश्तों के आमद की रात बताई गई है, तो कहीं बख्शीश की रात बताई गई है। अल्लाह तआला ने इस रात की बढ़ाई और खुसूसियत कुरआन में इस प्रकार बयान की है “कसम है इस कुरआन ए करीम की, बेशक मैंने इसको बड़ी खैर व बरकत वाली रात में उतारा है। इस रात में हर चीज का फैसला मेरे हुक्म से किया जाता है। यकीनन में पैगम्बरों को भेजता हूँ, अपनी रहमत के तौर पर।” दूसरी जगह अल्लाह तआला ने फरमाया “बेशक मैने कुरआने करीम को क़द्र की रात में उतारा है ऐ पैगम्बर आपको क्या मालूम की शब ए  क़द्र क्या चीज है।” शब ए क़द्र की रात हजार महिनों से बेहतर है, इस रात में फरिश्तें जिबराईल अपने मालिक के हुक्म से हर काम के लिए उत्तरते हैं। यह रात तुलु ए फजर यानि सुबह सवेरे तक सरासर सलामती की है। हजरत आईशा रजि. फरमाती हैं कि की जब रमजानुल मुबारक के आखरी दस दिन यानि आखरी अशरा आता है तो मोहम्मद साहब (स. अ.) पूरी रात जागते और अपने अहल व अयाल को बेदार रखते यानि तिलावत व इबादत जिक्र व दुआ में मशगूल हो जाते। शेख ने कहा हम सबको चाहिए कि इस रात की क़द्र करें और रात को जागकर अल्लाह की इबादत करें। यह रात जिसको नसीब हो जाती है अल्लाह उसके अगले पिछले सभी गुनाह माफ कर देता है।

अब्दुल माजिद शेख

(तैराक व् समाज सेवक ), जयपुर

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