क्या हैं केन्द्रीय सरकार के दावे भारत का नाश या विकास?
आज बात करते हैं उन चेहरों की जिन्होंने बड़ी बड़ी डिग्रियाँ हासिल करने के लिए जी जान लगाया। जब वक़्त आया कुछ कर दिखाने का तो केन्द्रीय सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया। ज़मानत होती है मगर कोई दूसरा केस ज़बरदस्ती बनाकर जेल में डाल दिया जाता है।एक क़ाबिल इन्सान जो चार साल से संविधान के दायरे में आन्दोलन किया वो जेल में है बिना अपराधिक रिकॉर्ड के। अगर बाहर होता तो अपनी क़ाबलियत से भारत को ही फ़ायदा पंहुचा रहा होता। एक क्रान्तिकारी भारतीय बिना जुर्म नफरत की भेंट चढ़ गया है। और जो देश में बलात्कारी हैं रिश्वतख़ोर हैं, क़ातिल हैं और चोर हैं वो मज़े से ऐश करते हुए बाहर घूम रहे हैं एक और गुनाह करने के लिए। लेकिन जो सही मायने में देश के हीरो हैं, जिन्होंने देश का नाम रौशन किया एक आन्दोलन का इतिहास रचकर, जिन्होंने देश में फिर से गांधीजी के आन्दोलन को दोहरा कर ज़िन्दा किया वो चार साल से जेल में मुजरिम बनकर सज़ा काट रहे हैं। कौन है उनके भविष्य को बरबाद करने वाले? लोग सोच रहे हैं कि सिर्फ एक समुदाय का नुकसान है , नहीं ये नुकसान मुसलमान का ही नहीं पूरे राष्ट्र का है। देश की तरक़्क़ी का है, भारत के विकास का है।क्योंकि भारत का विकास मुमकिन है शिक्षा और शिक्षित नौजवानों से नाकि बलात्कारियों भ्रष्टाचारियों, क़ातिलों और रिश्वतखोरों से। जो काम अंग्रेज़ी हुकूमत ने किया सभी क्रान्तिकारियों को जेल में डालकर वही आज केन्द्रीय सरकार कर रही है। याद रखें आज फिर से देश को चन्द्र शेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, बाबा भीमराव आंबेडकर साहब, महात्मा गॉंधी, जौहर अली, बी अम्मा, बेगम हज़रत महल, अशफ़ाक़, मौलाना अबुल कलाम, जैसे क्रान्तिकारियों की बहुत ज़रूरत आन पड़ी है। देश को चमचागिरी करने वाली नस्लों की ज़रूरत नहीं है बल्कि भारत को महान भारत बनाने के लिए शरजील इमाम, उमर ख़ालिद और ख़ालिद सैफ़ी जैसे आन्दोलनकारियों की ज़रूरत है। इनके अलावा 1153 आन्दोलनकारी पकड़े गए थे। 2020 से अब तक चार साल का बरबाद भविष्य का ज़िम्मेदार कौन है इन जवानों का। इन तरक़्क़ी करने वाले छात्रों को कब रिहाई मिलेगी? है जवाब केन्द्रीय सरकार के पास? आज मेरा सवाल उन मुस्लिम नेताओं मन्त्रियों से भी है जो संसद में बड़ी बड़ी बातें करते हैं मगर चार से इनकी रिहाई के लिए संसद में बोलने के बजाय कुछ ख़ास कोशिश नहीं करते नज़र आये। अगर ख़ास मुस्लिम मन्त्री दल चाहते तो सड़कों पर पूरी क़ौम निकालकर ला सकते थे, इनकी रिहाई के लिए आन्दोलन करने के लिए। मुसलमान भी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं जाने किस मसीहाई की उम्मीद है अब तो लोगों को ज़यादा याद भी नहीं होगा, जब सोशल मीडिया पर ख़बर आती है तब याद आता है कि ये लोग जेल में हैं। मगर सोचिए इनके घर वालो का सब्र। कबूतर की तरह आंख बन्द करने से शिकारी से नहीं बच सकते बल्कि उड़ान ऊंची भरनी ही पड़ेगी और बचाव के रास्ते ख़ुद बनाने होंगे।
मैंमूना नरगिस, जयपुर
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
