दौलत खुदा से गाफ़िल कर देती है
रसूले मकबूल सलअम ने फरमाया कि दौलत खुदा से गाफ़िल कर देती है I आपने हमेशा सरमायादारी और दौलतमंदी को ना पसंद फरमाया है I चुनांचि आपकी खुद हालत यह थी कि जो रकम वसूल होती थी उसको गरीबों और हकदारों में तक़सीम फरमा देते थे और उसी रोज़ रात को हुज़ूरे अकरम के घर में फ़ाक़ा होता था I हुज़ूरे अकरम दौलतमंदी को किस तरह मुसलमानों के लिए लानत समझते थे इसका अंदाजा बुखारी शरीफ को हस्बे ज़ेल हदीस से हो सकता है I इब्ने उमर बिन ओफ रजि. अ. का बयान है कि रसूल सलअम ने अबू उबैदा बिन ज़र्राह रजि. अ. को बहरीन की तरफ जज़िया (टैक्स) लाने के लिए भेजा I जब वह जज़िया लेकर आए और अंसार से सुना तो सब के सब सुबह की नमाज़ में रसूल अल्लाह सलअम के साथ शरीफ हुए, जब आप नमाज़ से फ़ारिग हुए तो ये सब सामने आ गए I आप मुस्कुराए और फरमाया कि मैं गुमान करता हूं कि तुम अबु उबैदा की खबर सुनकर कि वह कुछ लाए हैं आए हो I सबने कहा कि बेशक या रसूल अल्लाह आपने फ़रमाया बशारत हो तुम्हें और उम्मीद रखो उस चीज़ की जो तुम्हें खुश करेगी और कसम है अल्लाह की मुझे तुम्हारी बाबत फख्र से कुछ अंदेशा नहीं है I बल्कि अंदेशा तो यह है कि कहीं तुम पहले लोगों कि तरह मालदार न हो जाओ और दुनिया से मोहब्बत करने लगो और यह दुनिया उनकी तरह तुम्हें भी याद-ए-इलाही से ना भुला दे I इसलिए दौलतमंदी दुनिया का बहुत बड़ा फितना है I दौलत मंदी इंसान को खुद ही से गाफिल नहीं कर देता बल्कि इंसानी अखलाक को भी पस्त (गिराना) करती चली जाती है I इसीलिए इस्लाम ने 1400 साल पहले सरमायादारी के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी I आज के ज़माने का सोशलिज्म इस्लाम इसी तालीम की नकल है I दुआ है कि अल्लाह तआला हर दौलतमंद शख्स को दुनिया मोहब्बत से और दौलत के फ़ितने से महफूज़ रखे I आमीन
-हबीबुल्लाह एडवोकेट
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