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‘खीरे की खेती’ पर सब्सिडी लेकर घिरे केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, खुद के मंत्रालय से उठाया फायदा, विपक्ष बोला-मोदी सरकार में लूट मची है

‘खीरे की खेती’ पर सब्सिडी लेकर घिरे केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, खुद के मंत्रालय से उठाया फायदा, विपक्ष बोला-मोदी सरकार में लूट मची है

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Bhagirath Chaudhary Subsidy Rs 99 Lakh : अजमेर। राजस्थान के अजमेर से भाजपा सांसद और मोदी सरकार में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी इन दिनों चर्चाओं में हैं। उन पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट योजना के तहत करीब 99 लाख रुपए की सब्सिडी लेने के आरोप लगे हैं। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री ने सफाई दी है। मंत्री ने दावा किया है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है। इस दौरान उन्होंने मीडिया के कई सवालों के जवाब भी दिए। जानिए केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने क्या कहा।

सवाल- आपके नाम पर NHB की योजना के तहत लगभग 99.60 लाख की सब्सिडी स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है। क्या यह सही है?

जवाब : जी, मुझे योजना के तहत सब्सिडी मिली है। इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। मैंने अपने प्रोजेक्ट पर सार्वजनिक रूप से बोर्ड लगाया हुआ है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि यह परियोजना NHB की सहायता से संचालित है।

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सवाल- इस सब्सिडी के संबंध में उठ रहे सवालों पर आपका क्या कहना है?

जवाब : अगर मेरे मन में कुछ गलत होता तो मैं इसे सार्वजनिक नहीं करता। सब कुछ नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है।

सवाल- आपने इस परियोजना के लिए आवेदन कब किया था?

जवाब : मैंने इस परियोजना के लिए वर्ष 2018 में आवेदन किया था। यह कोई हालिया आवेदन नहीं है, बल्कि कई वर्षों से चल रही प्रक्रिया का परिणाम है।

सवाल- क्या इस परियोजना में आपका स्वयं का निवेश भी है?

जवाब : बिल्कुल। मैं स्वयं किसान हूं और इस परियोजना के लिए मैंने बैंक से ऋण भी लिया है। यह केवल सब्सिडी आधारित परियोजना नहीं है, इसमें मेरा अपना निवेश भी शामिल है।

सवाल- क्या इस परियोजना की स्वीकृति सामान्य प्रक्रिया के तहत हुई?

जवाब : हां, परियोजना की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार पूरी की गई है। मुझे किसी विशेष छूट या विशेष सुविधा का लाभ नहीं मिला।

सवाल- हितों के टकराव को लेकर उठ रहे सवालों पर आपका क्या जवाब है?

जवाब : मेरे खिलाफ लगाए जा रहे कई दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। योजना की प्रक्रिया नियमों के अनुसार होती है और व्यक्तिगत स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया।

सवाल- क्या आप इस परियोजना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने को तैयार हैं?

जवाब : जहां तक सरकारी नियम अनुमति देते हैं, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। मेरे प्रोजेक्ट पर लगी सूचना भी इसी पारदर्शिता का प्रमाण है।

सवाल- आम किसानों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब : सरकार की योजनाएं सभी पात्र किसानों के लिए हैं। जो भी किसान पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं, वे आवेदन करें और आधुनिक बागवानी अपनाकर इन योजनाओं का लाभ उठाएं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह विवाद तब खड़ा हुआ जब इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जून को पहले पेज पर एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, ‘राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।’ बोर्ड पर लाभार्थी का नाम ‘भागीरथ चौधरी’ और 50% सब्सिडी की रकम ‘99,60,000 रुपए’ लिखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना “हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास” के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री के खुद के मंत्रालय की स्कीम में सब्सिडी लेने पर राजस्थान में सियासी विवाद हो गया है। इन आरोपों के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला। मामले को लेकर राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा, ‘जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवा ले, तो इसे आप क्या कहेंगे?’ ‘एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, और दूसरी तरफ बीजेपी के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है।’

डोटासरा बोले- मोदी सरकार में लूट मची है

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक्स पर लिखा- मोदी सरकार में लूट मची है। मंदिरों में चंदे की लूट, जमीने कौड़ियों में लेने की लूट, किसानों की सरकारी सब्सिडी हथियाने की लूट, क्या लूट मची है। किसान दर-दर भटक रहे हैं। मोदी के मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से 1 करोड़ की सब्सिडी हासिल कर रहे हैं।

पायलट बोले- मंत्री बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं और सब्सिडी ले रहे

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने एक्स पर लिखा- जब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री स्वयं NHB बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं तो क्या यह मामला हितों के टकराव से जुड़ा हुआ नहीं है? इसी प्रकार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिजनों पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद से जुड़े बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला भी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

नेता प्रतिपक्ष बोले- मंत्री अब जो दिखेगा, वो जमकर खाएंगे

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने X पर लिखा- पहले भाजपा नेताओं की प्रभु श्रीराम के मंदिर में चंदा चोरी, फिर महाकाल की नगरी में मुख्यमंत्री का “शातिर लैंड स्कैम” और अब केंद्रीय कृषि मंत्री भगीरथ चौधरी का खीरा सब्सिडी में महा घोटाला। ये घटनाएं बताती हैं कि भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि सत्ता की संरक्षित व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। एक तरफ देश का गरीब, किसान और आम आदमी अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक जाता है। वहीं, दूसरी ओर सत्ता से जुड़े लोगों की भ्रष्टाचार की फाइलें बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ती हैं।

पवन खेड़ा बोले, जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो फसल बचेगी कैसे

वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट साझा करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने लिखा-जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो फसल बचेगी कैसे?’ पवन खेड़ा ने लिखा-यह चिंताजनक है, क्योंकि गरीबों से उम्मीद की जाती है कि वे 5 किलो मुफ्त राशन और अपने बच्चों के लिए मिलने वाले मामूली मिड डे मील के लिए आभारी रहें, मानो ये सरकार की मेहरबानियां हों, न कि नागरिकों के अधिकार। वहीं, मंत्री और उनके करीबी लोग सरकारी खजाने को अपनी पहुंच में समझते हैं। वे सब्सिडी हासिल करते हैं, सरकारी लाभ उठाते हैं और सार्वजनिक धन को मानो अपने बाप की जागीर की तरह इस्तेमाल करते हैं।’

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