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हज में शैतान को कंकरी मारने की कहानी,इबादत, कुर्बानी और सब्र का सबक

Jaipur

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पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है हज, जो हर साल दुनिया भर के लाखों मुसलमानों को मक्का की पाक सरज़मीन पर जमा करता है। हज के दौरान एक ऐसा अमल किया जाता है जो शायद बाहरी तौर पर अजीब लगे शैतान को कंकरी मारना (रमी जमरात)। लेकिन इसके पीछे एक बेहद गहरी रूहानी हकीकत और तवारीखी वाक़िआ छुपा है। यह रिवायत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी से जुड़ी है। अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया कि वो अपने प्यारे बेटे हज़रत इस्माईल को उसकी राह में कुर्बान करें। ये हुक्म जितना बड़ा था, उतनी ही बड़ी थी इब्राहीम की आज़माइश। जब इब्राहीम अपने बेटे को लेकर मिना की जानिब रवाना हुए, शैतान ने तीन अलग-अलग जगहों पर उनके सामने आकर उन्हें अल्लाह के हुक्म से रोकने की कोशिश की। हर बार फ़रिश्ते जिबरील आए और कहा, “इसे कंकरी मारो!” — और इब्राहीम ने शैतान को सात-सात कंकरी मारकर दूर भगा दिया।

इस वाक़िए को मशहूर मुस्लिम तारीख़दान अल-अज़रक़ी ने कुछ यूं बयान किया:

“जब इब्राहीम मिना से अल-अक़बा की जानिब उतरे, तो शैतान उनके सामने आया। जिबरील ने कहा, ‘इस पर कंकरी मारो’, और इब्राहीम ने सात कंकर मारे। फिर मिडल जमरा पर आया, फिर छोटे जमरा पर – हर जगह शैतान को कंकरी मारकर दूर भगाया गया।” हज में शैतान को कंकरी मारना एक प्रतीकात्मक अमल है — यह शैतान को नहीं, ख़ुद के अंदर की बुराइयों और ख्वाहिशों को ठुकराने का ऐलान है।

इस अमल के ज़रिए मुसलमान जताते हैं कि: हम अल्लाह के हुक्म के आगे किसी भी चीज़ को तरजीह नहीं देंगे।

हम अपने अंदर के लालच, शक, घमंड और नाफरमानी को कंकरी मार रहे हैं। हम उस शैतानी आवाज़ को खामोश कर रहे हैं जो हमें नेकी से रोकती है। रसूलुल्लाह ﷺ की तालीम और अमल: हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि. फ़रमाते हैं कि: “रसूलुल्लाह ﷺ ने जमरात को कंकरी मारते वक़्त तलबिया (लब्बैक) पढ़ना बंद नहीं किया, और सात कंकरों से रमी की।”
(बुखारी: 1685, मुस्लिम: 1282)

एक और रिवायत में आता है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने बड़े जमरा को मक्का अपनी बाईं तरफ और मिना को दाईं तरफ रखकर सात कंकर मारे और फ़रमाया: “यही तरीका उस शख्स का था जिस पर सूरह अल-बक़रा नाज़िल हुई।”
(बुखारी: 1748)

आज जबकि दुनियावी लालच, सोशल मीडिया की ग़ीबतें, और दिल के अंदर छुपे हुए शक हमें नेकी से रोकते हैं — शैतान अब हमारे सामने जिस्मानी शक्ल में नहीं आता, बल्कि सोचों, ख्वाहिशों और गुनाहों के रूप में आता है। हज में शैतान को कंकरी मारना यह सिखाता है कि: हर मुसलमान को रोज़ अपने अंदर के शैतान से लड़ना है।

यह अमल अल्लाह की फरमांबर्दारी और तौहीद पर अडिग रहने की मिसाल है।

हर साल जब लाखों मुसलमान मिना में जमरात को कंकरी मारते हैं, तो वो दरअसल शैतान से बग़ावत और अल्लाह से वफ़ादारी का ऐलान कर रहे होते हैं। यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि रूह की ताज़गी और नफ़्स की सफाई का सफ़र है। हज के इस अमल के पीछे जो तालीम है — वो है सब्र, त्याग, और अल्लाह की राह में हर रोकावट को ठुकरा देना। यह अमल हमें याद दिलाता है कि हज़रत इब्राहीम की तरह हमें भी हर दिन अपने शैतान को कंकरी मारनी है — अपने दिल, ज़बान और अमल से।

मक्का में शैतान को मारे गए पत्थर कहाँ जाते हैं ?

जब तमाम हाजी अराफात और मुज्दालिफा में रुकने के बाद मिना (एक जगह का नाम है) जाते हैं और मिना में ही वो जगह है जहाँ शैतान को कंकरियां मारी जाती हैं। आपके दिमाग में सवाल आया हो होगा कि हर हाजी शैतान को सात कंकरियां मारता है तो इतनी सारी कंकरियां जाती कहाँ हैं और फिर मारने के लिए कंकरियां मिलती कहाँ से हैं, तो चलिए इसके बारे में हम जानते हैं कि इसका इन्तेजाम कैसे किया जाता है और उनको ठिकाने कैसे लगाया जाता है।  सब से पहले तो ये जान लीजिये कि जहाँ कंकरियां मारी जाती हैं वो जगह चार मन्जिल गहरी है यानि उसमें क़रीबन 15 मीटर गहराई है, जो हाजी पत्थर मारता है वो उसी जगह जाकर इकठ्ठा हो जाती हैं, सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) से बात करते हुए, केदाना कंपनी के एक कर्मचारी, ई. अहमद अल-सुबही ने खुलासा किया कि जमारत में कन्कारियों को संभालने का काम हाजियों के पत्थर मारने का काम ख़त्म होने के पहले दुसरे और तीसरे दिन शुरू होता है और उसको 4 चरण में पूरा किया जाता है

चरण 1: पत्थर एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं

चरण 2: फिर पत्थरों को एक बड़े आटोमेटिक टब में मुन्ताकिल किया जाता है

चरण 3: पत्थरों को छोटे-छोटे हिस्सों में इकट्ठा किया जाता है

चरण 4: और फिर इन पत्थरों को दुसरे हाजियों को फिर से इस्तेमाल करने के लिए recycle किया जाता है

अल-सुबही ने बताया कि हाजियों के फेंके गए कंकर जो नीचे की ओर गिरते हैं और तहखाने में जाकर जमा हो जाते हैं, फिर उन पत्थरों को इकट्ठा करने और उन पर पानी छिड़कने, कंकड़ से चिपकी धूल और गंदगी को हटाने का काम किया जाता है। आख़िर में, साफ किए गए कंकरों को वाहन में स्थानांतरित कर दिया जाता है और हज सीजन समाप्त होने के बाद दोबारा इस्तेमाल के लिए उसको स्टोर कर लिया जाता है।

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