इंडिया गठबंधन के घटक दल एक दूसरे को निबटाने में पीछे नहीं
आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा में सत्ता से बाहर हो गई है। 27 वर्ष बाद भाजपा का संन्यास खत्म हो गया है। आम आदमी पार्टी का उदय दिल्ली के मुख्यमंत्री और संयोजक केजरीवाल के नेतृत्व में बाद तेजी से हुआ। अरविन्द केजरीवाल की देश में ईमानदार एवं जननेता की छवि बनने लगी थी। दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को तीन बार जिताया। अरविंद केजरीवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर आलोचक और विरोधी छवि के नेता बन गए। भाजपा और कांग्रेस विरोधी वोटर और विचारधारा के लोग आप संयोजक अरविंद केजरीवाल में देश की नेतृत्व करने की संभावना तलाश करने लगे। दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल दिल्ली वासियों के लिए कई जनकल्याण की योजनाएं एवं पॉलिसियां लेकर आए। फ्री बिजली, पानी, इलाज, राशन एवं महिलाओं को दिल्ली की सरकारी बसों में बिना किराया दिए यात्रा आदि मुख्य हैं। इन्हीं योजनाओं के बल पर अरविंद केजरीवाल दिल्ली के तीन बार मुख्यमंत्री बने। लेकिन नीतियों में नई शराब बिक्री पॉलिसी आम आदमी पार्टी को भारी पड़ गई। जिस तरह दिल्ली की नई शिक्षा नीति के कारण आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार विश्व में प्रसिद्धि पाई थी, उसके उलट नई शराब नीति ने आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दुनिया में बदनाम कर दिया। केंद्र सरकार के बाद भाजपा नेतृत्व और सरकारी एजेंसियों ने अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में लिप्त बताकर जेलों की सलाखों में भेज दिया। दिल्ली की सरकार भी पूर्व मुख्यमंत्री ने जेल में रहते चलाई, हालांकि अरविंद केजरीवाल पर शराब घोटाले में भ्रष्टाचार में आरोप साबित नहीं हो सके और कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। लेकिन इस बीच अरविंद केजरीवाल की पार्टी एवं दिल्ली की जनता पर कुछ पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एलजी ने आम आदमी पार्टी को आसानी से शासन नहीं करने दिया। भाजपा भी कांग्रेस पार्टी से ज्यादा आम आदमी पार्टी और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल को भाजपा के लिए भविष्य में ज्यादा खतरनाक मानने लगी। इसलिए भाजपा नेतृत्व और पार्टी के लिए अरविंद केजरीवाल की राजनीति को कमजोर करना जरूरी था, जो उसने कर दिया। दूसरा आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को इंडिया गठबंधन में शामिल होना सबसे नुकसानदायक साबित हुआ। आम आदमी पार्टी और केजरीवाल ने शुरुआत में भाजपा और कांग्रेस का समान रूप से विरोध किया, जिसका उसको फायदा भी मिला। भाजपा और कांग्रेस विरोधी विचारधारा के लोग आम आदमी पार्टी से तेजी से जुड़ने लगे और आम आदमी पार्टी का जनाधार पूरे देश में बनने लगा। गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 5 विधानसभा सीट जीत भी ली। दूसरी तरफ आम आदमी के बढ़ते राजनीतिक कदमों से कांग्रेस के अस्तित्व पर ही खतरा महसूस होने लगा। कांग्रेस के लिए आम आदमी पार्टी को नुकसान पहुंचाना प्राथमिकता बन गया। हालांकि दिखावाटी रूप से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के रूप में शामिल है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन नहीं किया। आम आदमी के नेताओं ने काफी कोशिश की कि हरियाणा विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ मिलाकर लड़ा जाए। लेकिन कांग्रेस ने आम आदमी के नेताओं की बिल्कुल नहीं सुनी। नतीजा दोनों ने विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा और भाजपा के सामने हार देखने को मिली। इसी तरह दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन नहीं किया और दिल्ली में भाजपा सरकार बन गई। कांग्रेस को दिल्ली में एक भी सीट नहीं मिली है और आम आदमी पार्टी को 22 सीटें मिली है। फिर भी कांग्रेस नेता और पार्टी यह सोचकर खुश हो रही है कि कम से कम अरविंद केजरीवाल सत्ता से दूर हो गए। इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के बीच भी ऐसी स्थिति है। कांग्रेस की यह सोच बनती जा रही है कि भाजपा को हराने से पहले छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों को समाप्त या कमजोर कर दिया जाए और भाजपा सोचती है कि विपक्षी एकता इसी तरह दिखावे की बनी रहे।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
