एक डाकू का वाक़िया
अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में अपने बंदों से फरमाया है कि हमसे रोजी कमाना नहीं चाहते, रोजी तो हम तुमको देंगे I अल्लाह सिर्फ इंसानों की ही नहीं बल्कि तमाम जानदारों का रिज़क का ज़िम्मा अल्लाह का ही है, वह ऐसे तरीकों और जरिए से अपनी पैदा करदा मखलूक को रिज़क पहुंचाता है कि इंसान उसको देखकर हैरत में पड़ जाता है और अल्लाह तआला की अपनी मखलूक से जो मोहब्बत है उसका एतराफ (माने) किए बगैर नहीं रह सकता है I
“गुलिस्तान-ए-कनाअत” ऐसा ही एक डाकू का वाक़िया लिखा गया है कि कौम कुर्द का एक शख्स कहता है कि मैं पहले डाकू था I एक बार मैं अपने रूफ़का (साथियों) के साथ रास्ते पर बैठा था कि किसी काफिले को लूट लें I वहां पर खजूर के तीन पेड़ थे I एक पेड़ पर फल नहीं था I डाकू ने देखा कि जिस दरख्त पर फल था उससे एक चिड़िया खजूर एक-एक दाना लेकर उस दरख्त पर ले जाती है जिस पर फल न था, उस चिड़िया ने 10 मर्तबा (बार) ऐसा किया I
वह डाकू फल से खाली दरख्त पर चढ़ा तो देखा कि उस पर एक अंधा सांप है और यह चिड़िया उसके मुंह में खजूर के दाने रखती जा रही है और उसे खिलाती जा रही है I डाकू यह मंजर देखकर रोने लगा और कहने लगा “ए मेरे आका यह सांप है जिसके बारे में नबी स. अ. ने कत्ल का हुक्म दिया है I लेकिन जब आपने उसे अंधा किया है तो एक चिड़िया को आपने उसको रिज़क पहुंचाने के लिए मुकर्रर फरमा दिया I
मैं (डाकू) आपका बन्दा हूं I आपकी खुदाई का मोतारफ (इकरार करने वाला) हूं I मुझे आपने रास्तों पर बैठकर मुसाफिरों को लूटने और रास्तों पर मुसाफिरों को डराने धमकाने के लिए मुकर्रर कर दिया है I इसके बाद डाकू के दिल में इलक़ा (गैब से कोई बात दिल में आना) हुआ कि ए बंदे ! तौबा का दरवाजा खुला है I उस डाकू ने अपनी तलवार तोड़ दी और अपने सिर पर मिट्टी डाली और चीखने लगा और बोला “ए अल्लाह ! मुझे माफ फरमा दे I ए अल्लाह ! मुझे माफ फरमा दे” I बस अचानक एक फरिश्ते की गैब से आवाज आई (अल्लाह की तरफ से) कि हमने तुझे माफ कर दिया I
डाकू अपने रूफ़का (साथियों) के पास आया और उन्हें सारा किस्सा सुनाया और कहा “मैं पहले अल्लाह तआला से कटा हुआ और दूर था I लेकिन अब मैंने तौबा करके अल्लाह तआला से सुलह कर ली है” I तमाम रूफ़का (साथी) कहने लगे कि आपके साथ ही हम भी अपने रब से सुलह करते हैं और इस काम से तौबा करते हैं I फिर सब डाकुओं ने अपने ज़ाईद कपड़े फैंक दिये और हथियार भी छोड़ दिए और एहराम हज बांधकर मक्का मुनव्वरा के लिए रवाना हो गए I हम तीन दिन जंगल में सफर करते रहे I फिर एक बस्ती पहुंचे I बस्ती में एक नाबीना (अंधी) बूढी औरत के पास से उनका गुज़र हुआ I उसने हमसे पूछा कि तुम में फलां कुर्दी शख्स (डाकू) मौजूद है क्या ? हमने कहा- हां I उस बुढ़िया ने अपने सामान से कपड़े निकाले और कहा कि मेरा बेटा मर गया है और यह सब कपड़े उसके हैं I बुढ़िया कपड़े देते हुए बोली कि मैंने मुसलसल (लगातार) तीन रात नबी स. अ. की ख्वाब में जियारत की I नबी स. अ. ने बार-बार मुझे फ़रमाया कि यह कपड़े कबीला कुर्द के फलां आदमी (डाकू) को दे दो I हमने कपड़े लिए और मैंने और मेरे साथियों ने पहन लिए और हम मक्का मुनव्वरा की तरफ रवाना हो गए और ब आफियत मक्का मुनव्वरा पहुंचे I
इस वाकिये से हमको यह सबक मिलता है कि रिज़क का देने वाला सिर्फ अल्लाह है, उसके सिवा कोई दूसरी हस्ती नहीं जो अल्लाह अपने दुश्मनों यानि कुफ्फार को रिज़क देता है I वोह अपने दोस्तों यानि मोमिनों जो उस पर रखते हैं जैसाकि वोह अपने नामों व सिफ्तों के साथ और जिन्होंने उसके तमाम एहकाम कबूल किए हैं, उन्हें कैसे फरामोश (भूल) कर सकता है I अल्लाह हम सबको गैब से रिज़क अता फरमाए और ज्यादा से ज्यादा उसके एहकाम जो क़ुरआन और अहादीस के जरिए हम तक पहुंचे हैं, उन पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए I
आमीन !
हबीबुल्ला एडवोकेट,
जवाहर नगर जयपुर
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
