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सिक्किम में पहाड़ बना काल! सुरंग में फंसे मजदूर, लैंडस्लाइड के बाद 10 की मौत, 17 अब भी फंसे

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सिक्किम में पहाड़ बना काल! सुरंग में फंसे मजदूर, लैंडस्लाइड के बाद 10 की मौत, 17 अब भी फंसे

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Sikkim Tunnel Collapse : गंगटोक। सिक्किम में सोमवार को एक निर्माणाधीन सुरंग पर लैंडस्लाइड होने से उसका मुख्य द्वार बंद हो गया, जिससे अंदर मौजूद 27 मजदूर फंस गए। इनमें से 10 की मौत हो गई। बाकी 17 मजदूर अब भी फंसे हैं। नामची जिले के मामरिंग स्थित समरदुंग (झोलुंगे) में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना में सुरंग का निर्माणाधीन कार्य चल रहा था। जिला प्रशासन के अनुसार, इस हादसे में अब तक 10 मजदूरों के मौत की पुष्टि हो चुकी है। जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि फंसे हुए मजदूरों की संख्या 27 से कम या ज्यादा भी हो सकती है। वहीं सुरंग में मीथेन गैस लीक होने की आशंका है। कई बचावकर्मियों को अंदर जाने के दौरान चक्कर आए। कुछ बेहोश भी हो गए, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित हुआ।

हादसे को लेकर पीएम मोदी ने सीएम तमांग से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को लेकर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर बचाव अभियान की जानकारी ली। पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के आश्वासन से राज्य प्रशासन को राहत और हौसला मिला है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव अभियान पूरी तेजी से चलाया जा रहा है।

सीएम तमांग खुद कर रहे मॉनिटरिंग

सीएम प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि वह स्वयं बचाव अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को राहत कार्य तेज करने, प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करने और बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने बचाव कार्य में लगे जवानों और अधिकारियों की बहादुरी, समर्पण और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं पर ध्यान न दें तथा प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करें। राज्य सरकार ने कहा है कि बचाव अभियान को सुरक्षित और तेजी से पूरा करने के साथ-साथ हादसे से प्रभावित परिवारों को हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बंगाल से स्पेशल रेस्क्यू टीम लाई गई

जिला अधिकारी तमलिंग ने बताया कि दोपहर करीब 3:40 बजे प्रशासन को हादसे की खबर मिली। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सुरंग में पटेल इंजीनियरिंग के 21 और एनएचपीसी के 6 समेत कुल 27 मजदूर फंसे होने की आशंका है। पश्चिम बंगाल से भी गैस-रोधी उपकरणों के साथ एक स्पेशल रेस्क्यू टीम लाई गई है। एंबुलेंस को तैयार रखा गया है। बचाव दल गैस मास्क पहनकर मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। यह टनल तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए पटेल इंजीनियरिंग कंपनी बना रही थी।

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लैंडस्लाइड के सटीक कारण का नहीं चल सका पता

अधिकारियों के अनुसार, गैस का स्तर इतना अधिक है कि बचावकर्मी अभी तक उस स्थान तक नहीं पहुंच पाए हैं जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। कई बचावकर्मियों को अंदर संपर्क स्थापित करने से पहले ही वापस लौटना पड़ा। प्रशासन अभी तक लैंडस्लाइड के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाया है। फंसे लोगों की संख्या को लेकर भी अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। नामची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने कहा कि जब तक एनडीआरएफ टीम फंसे हुए लोगों के सटीक स्थान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक अंदर की स्थिति की पुष्टि नहीं की जा सकती। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग के भीतर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

गैस निकालने के दौरा हुआ धमाका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के प्रवेश द्वार से करीब 1.5 किलोमीटर भीतर मीथेन गैस जमा हो गई थी। गैस निकालने की कोशिश के दौरान विस्फोट जैसी स्थिति बनने के बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन हुआ, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। कुछ मजदूर समय रहते बाहर निकल आए, जबकि कई अंदर फंस गए। राहत एवं बचाव अभियान गैस रिसाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की टीमें मौके पर तैनात है।

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