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राजस्थान की आशा सहयोगिनियों का बड़ा ऐलान, सरकार को दी 15 दिन की चेतावनी

राजस्थान की आशा सहयोगिनियों का बड़ा ऐलान, सरकार को दी 15 दिन की चेतावनी

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Anganwadi Workers Protest In Jaipur : जयपुर I राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर सोमवार को प्रदेशभर की आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन किया। राज्य के करीब 41जिलों से हजारों की संख्या में जुटीं महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। आशा सहयोगिनियों का आरोप है कि पिछले 22 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी बनकर काम करने के बावजूद सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

ये हैं आशा सहयोगिनियों की 4 प्रमुख मांगें

1. ‘स्वैच्छिक’ शब्द को हटाकर संविदा कैडर में शामिल करना: कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके पदनाम के आगे ‘स्वैच्छिक’ शब्द लगा दिया गया है, जिसका बहाना बनाकर सरकार उन्हें न्यूनतम मजदूरी और सरकारी सुविधाओं से वंचित रखती है। इस शब्द को हटाकर उन्हें पूर्ण संविदा कैडर का दर्जा दिया जाए।

2. न्यूनतम मजदूरी और मानदेय में वृद्धि: वर्तमान में उन्हें मात्र रु. 4,959 प्रति माह मानदेय और नाममात्र का इंसेंटिव मिलता है। उनकी मांग है कि महंगाई के इस दौर में सम्मानजनक वेतन (करीब रु. 22,000) लागू किया जाए।

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3. पेंशन और रु. 5 लाख की एकमुश्त सेवानिवृत्ति राशि: वर्ष 2004 से लगातार सेवाएं दे रहीं कई बहनें अब सेवानिवृत्त (रिटायर) होने की कगार पर हैं। रिटायरमेंट के बाद खाली हाथ घर भेजने के बजाय उन्हें रु. 1 लाख से रु. 5 लाख तक की एकमुश्त राशि और पेंशन की सुविधा दी जाए।

4. एएनएम (ANM) भर्ती में कोटा व समायोजन: कई आशा सहयोगिनियां उच्च शिक्षित हैं और एएनएम की ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। उन्हें विभागीय भर्तियों में 10% से 20% तक का विशेष कोटा देकर नियमित समायोजित किया जाए।

‘9-9 महीने से मानदेय बकाया’

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने रोष जताते हुए कहा कि इस भीषण महंगाई में उन्हें मिलने वाला अल्प मानदेय भी पिछले 9 से 10 महीनों से अटका हुआ है। भरतपुर, डीग और गंगानगर से आईं कार्यकर्ताओं ने बताया कि शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से नियुक्त की गई आशाओं को सरकार ने ‘चलता-फिरता ई-मित्र’ बना दिया है। उनसे मोबाइल पर आयुष्मान कार्ड की केवाईसी (KYC) और ऑनलाइन एंट्री जैसे कई अतिरिक्त काम करवाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बदले एक रुपया भी भुगतान नहीं किया जा रहा। काम न करने पर नौकरी से हटाने और नोटिस देने की धमकियां दी जाती हैं।

उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री से गुहार

संगठन की पदाधिकारियों ने कहा, ‘प्रदेश की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी जी खुद एक महिला हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री भी हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सोचा, लेकिन चिकित्सा विभाग की अहम कड़ी होने के बावजूद हमारी सुध नहीं ली।’ प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री से खुद धरना स्थल पर आकर उनकी पीड़ा सुनने की मांग की है।

आर-पार की जंग: ‘मांगें नहीं मानी तो सत्ता गिरा देंगे’

भरतपुर और डीग से आईं महिला नेताओं ने सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि पूरे राजस्थान में 60,000 से अधिक आशा सहयोगिनियां कार्यरत हैं। अगर उनके परिवारों को मिला लिया जाए तो यह एक बड़ा वोट बैंक है, जो सरकार को सत्ता में ला भी सकता है और गिरा भी सकता है। पूर्व में अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ चुकीं कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार को 15 दिन का समय दिया जा रहा है। यदि इस अवधि में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे पूरे प्रदेश में कार्य का पूर्ण बहिष्कार करेंगी, चक्का जाम करेंगी और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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