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करोड़ों की वक्फ जमीन पर ‘फर्जी खेल’ का साया, 211 करोड़ में सौदेबाजी के आरोपों से गरमाया जयपुर शहर

करोड़ों की वक्फ जमीन पर ‘फर्जी खेल’ का साया, 211 करोड़ में सौदेबाजी के आरोपों से गरमाया जयपुर शहर

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Jaipur Waqf Land Scam : जयपुर/रॉयल पत्रिकाI जयपुर के एमआई रोड स्थित ऐतिहासिक ‘बाग नवाब कल्लन आमना का बाड़ा’ वक्फ भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय दुकानदारों और जन प्रतिनिधियों का आरोप है कि भूमाफिया द्वारा वक्फ की बेशकीमती संपत्ति को हड़पने के इरादे से हाल ही में एक दुकान में तोड़फोड़ कर अनधिकृत गेट बनाने की साजिश रची गई। इस विवाद के सामने आने के बाद वक्फ बोर्ड के हस्तक्षेप से काम तो रुकवा दिया गया, लेकिन जयपुर शहर और क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।

33 बीघा जमीन और फर्जी रजिस्ट्री का खेल

घटनाक्रम के अनुसार, नवाब कल्लन बाग की कुल 33 बीघा जमीन में से 6 बीघा 85 बिस्वा हिस्से पर एक बड़ा मार्केट विकसित है। यहां दशकों से ऑटोमोबाइल एक्सेसरीज, कार रिपेयरिंग कारखाने और होटल संचालित हैं। आरोप है कि एक भूमाफिया ने साल 1992 में हादी बेगम के नाम से एक फर्जी रजिस्ट्री तैयार करवाई, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार बेगम का इंतकाल साल 1984 में ही हो चुका था। मृत महिला के नाम पर बनी इस कथित फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर साल 2023 में इस वक्फ संपत्ति को 211 करोड़ रुपये में राजेंद्र सिंह गांगल नामक व्यक्ति को बेचने का दावा किया जा रहा है।

थाने पहुंचे दुकानदार, पुलिस पर गंभीर आरोप

फर्जी दस्तावेजों और बुलडोजर चलाने की धमकियों से परेशान होकर मार्केट के सैकड़ों पीड़ित दुकानदार जालूपुरा थाने पहुंचे। दुकानदारों का पक्ष रख रहे रफीक़ खंडेलवी ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन भूमाफियाओं के दबाव में काम कर रहा है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया और कानूनी हक मांग रहे लोगों को ‘नेतागिरी’ न करने की नसीहत देते हुए हवालात में बंद करने की धमकी दी। हालांकि, भारी विरोध और एकजुटता के बाद पुलिस ने शिकायत को रजिस्टर्ड परिवाद में शामिल किया है।

वक्फ बोर्ड की चुप्पी पर उठे सवाल

इस पूरे विवाद में राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि पिछले 35 वर्षों से यह फर्जीवाड़ा चल रहा है और साल 2009 में वक्फ बोर्ड के ही एक कथित पत्र का हवाला देकर भूमाफिया जमीन पर मालिकाना हक जता रहे हैं। करोड़ों रुपये की वक्फ संपत्ति की खुलेआम खरीद-फरोख्त होने के बावजूद बोर्ड के चेयरमैन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और संबंधित अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

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दुकानें बंद कर आंदोलन की बड़ी चेतावनी

एमआई रोड के इस मार्केट से पिछले 50 से 70 सालों से कई पीढ़ियां अपनी रोजी-रोटी कमा रही हैं। अचानक आए इस संकट से सैकड़ों मजदूरों और व्यापारियों के सामने बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। दुकानदारों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो पूरा मार्केट अपनी दुकानें पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

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