शहीद प्रोफेसर अब्दुल बारी जंगे आजादी के कद्दावर नेता व महान मजदूर नेता
प्रोफेसर अब्दुल बारी 1892 को बिहार के भोजपुर जिले के शाहाबाद गांव में पैदा हुए हैं। उनके वालिद का नाम मोहम्मद कुर्बान अली था। उन्होंने अपनी शिक्षा पटना यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। 1917 में महात्मा गांधी के संपर्क में आए तथा उनके विचारों से प्रभावित हुए। 1920-1922 में हुए खिलाफत और असहयोग आंदोलन के समय राजेंद्र प्रसाद, श्री कृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बिहार में इंकलाब ला दिया। 1921 में बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया जिसमें वह प्रोफेसर की हैसियत से शामिल हुए तथा अध्यापन करवाने लगे। 1930 में अब्दुल बारी ने भागलपुर में सत्याग्रह छेड़ा। 1942 में आजादी का आंदोलन बिहार उड़ीसा बंगाल के मजदूरों के आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाया नेताजी सुभाष चंद्र बोस जो उस वक्त जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन के अध्यक्ष थे के कहने पर जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन की कयादत की। इसके बाद बंगाल, उड़ीसा में मजदूर आंदोलन को एक बड़ी पहचान दी और पूरे इलाके में इंकलाब ला दिया। 28 मार्च 1947 को खुसरूपुर (फतुहा) के पास प्रोफेसर अब्दुल बारी को शहीद कर दिया गया। इनकी सामाजिक और सियासी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनकी नमाज़े जनाज़ा में महात्मा गांधी जैसे कद्दावर नेता शामिल हुए थे।
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