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NEET पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा कदम, 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट सौंपी

NEET पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा कदम, 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट सौंपी

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Neet UG 2026 Paper Leak CBI Chargesheet : नई दिल्ली। नीट पेपर लीक (NEET UG 2026 Paper Leak Case) मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ अदालत में विस्तृत आरोप पत्र दाखिल किया है। इस चार्जशीट में करीब 20 हजार पन्नों के दस्तावेज शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित गड़बड़ी के इस मामले ने लंबे समय तक चर्चा बटोरी थी। सीबीआई ने यह चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि चार्जशीट के साथ जुड़े कई एनेक्सचर दस्तावेजों को स्कैन करने का काम जारी है। कोर्ट ने चार्जशीट को रिकॉर्ड में लेते हुए बाकी दस्तावेज जमा करने के लिए CBI को समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को होगी, जिसमें जांच की आगे की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।

13 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप

CBI ने जिन 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है, उन पर कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूतों को नष्ट करने और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत भी कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, चार्जशीट में नाम शामिल सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

20 हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल

राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दाखिल चार्जशीट करीब 20 हजार पृष्ठों की है। अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए नोट किया कि इसमें दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और जब्त वस्तुओं की विस्तृत सूची शामिल की गई है। कोर्ट ने CBI से पूछा कि जिन बयानों और दस्तावेजों का चार्जशीट में उल्लेख किया गया है, वे कहां हैं? इस पर CBI ने बताया कि लगभग 20 हजार पन्नों के एनेक्सचर दस्तावेजों को स्कैन किया जा रहा है और उन्हें जल्द दाखिल किया जाएगा।

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360 गवाह और 422 दस्तावेज बने जांच का आधार

सीबीआई ने अपनी जांच में 360 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। आरोप पत्र में 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों (Material Objects) को शामिल किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेख विशेषज्ञों की राय और शैक्षणिक विशेषज्ञों के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से लीक किए गए थे और आरोपियों की इसमें भूमिका रही।

देशभर में 92 जगहों पर छापेमारी

उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत मिलने के बाद CBI ने 12 मई 2026 को FIR दर्ज की थी। इसके तुरंत बाद 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष टीमें गठित की गईं, जिनमें 8 साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे। जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में कुल 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इन छापों में डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई। इसके बाद फोरेंसिक इमेजिंग और डिजिटल विश्लेषण के जरिए पूरे नेटवर्क की जांच की गई।

NTA से जुड़े तीन विशेषज्ञ भी जांच के दायरे में

CBI के अनुसार, इस मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के विशेषज्ञ शामिल बताए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर कुछ बिचौलियों ने लीक हुए प्रश्नपत्र को आगे पहुंचाने का काम किया। इसके अलावा कुछ कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दौरान सामने आई है।

आर्थिक लेनदेन की भी जांच

CBI ने पेपर लीक मामले में पैसों के लेनदेन की जांच भी की है। एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को फ्रीज किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक लेनदेन की जांच से यह पता लगाने में मदद मिली कि पेपर लीक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसे इसका फायदा मिला।

डिजिटल सबूतों से खंगाला गया पूरा नेटवर्क

CBI ने इस मामले में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डिजिटल सबूतों की जांच की है। मोबाइल डेटा, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर कथित नेटवर्क की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक करने वालों से लेकर इसका लाभ लेने वाले लोगों तक पूरी कड़ी की जांच की जा रही है।

3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वीके पाठक और अर्जुन आनंद को लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। CBI का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे और साक्ष्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी का दावा है कि उसने प्रश्नपत्र लीक करने वालों से लेकर उसका लाभ उठाने वाले नेटवर्क तक की पूरी श्रृंखला की पहचान कर ली है।

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