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युवराज सिंह के साथ खेला क्रिकेट, फिर बना सीरियल अपराधी; मुठभेड़ में खत्म हुई सत्तू की कहानी

युवराज सिंह के साथ खेला क्रिकेट, फिर बना सीरियल अपराधी; मुठभेड़ में खत्म हुई सत्तू की कहानी

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Satpal Sattu Killed Police Encounter : मुजफ्फरनगर। उत्तप्रदेश की मुजफ्फरनगर पुलिस ने 25 हजार के इनामी बदमाश सतपाल उर्फ सत्तू को दो गोलियां मारकर ढेर कर दिया। वह हत्या, लूट, दुष्कर्म जैसे कई मामलों में वांछित था और पुलिस कस्टडी से फरार चल रहा था। मेरठ और आसपास के जिलों में भी वह सक्रिय था। सत्तू के मारे जाने के बाद उसके अपराधी बनने की कहानी भी खूब चर्चा में है। पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ इनामी बदमाश सतपाल उर्फ सत्तू कभी क्रिकेट के मैदान का उभरता सितारा माना जाता था। जिस खिलाड़ी ने अपने करियर की शुरुआत खेल के मैदान से की थी, वही अब दो राज्यों की पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड अपराधी बन गया था। उसकी कहानी खेल, महत्वाकांक्षा, गलत फैसलों और अपराध की दुनिया में उतरने की एक ऐसी दास्तान है जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया है।

कभी क्रिकेट का उभरता सितारा था सत्तू

लोग कह रहे है कि सतपाल सिंह उर्फ सत्तू क्रिकेट जगत का उभरता हुआ तेज गेंदबाज था। साल 1996 में उसने तेज इंडिया के आलराउंडर युवराज सिंह के साथ दो रणजी मैच भी खेला था। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने उसे कुछ समय के लिए कोचिंग भी दी, लेकिन किस्मत और गलत फैसलों ने उसे ऐसी राह पर धकेल दिया, जहां से वापसी संभव नहीं रही। क्रिकेट की सफेद जर्सी पहनने वाला यह खिलाड़ी धीरे-धीरे अपराध की काली दुनिया का बड़ा नाम बन गया।

सतपाल उर्फ सत्तू ने वर्ष 1996 में पंजाब की ओर से मोहाली और जालंधर में रणजी मुकाबले खेले थे। वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के साथ मैदान साझा कर चुका था। इतना ही नहीं, युवराज सिंह के पिता और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह भी कुछ समय तक उसके कोच रहे। उस दौर में सत्तू को पंजाब क्रिकेट का एक प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज माना जाता था और उसका सपना इंग्लैंड जाकर क्रिकेट में बड़ा करियर बनाने का था।

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कैसे हुई अपराध की दुनिया में एंट्री

बताया जाता है कि सतपाल क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहता था। दो रणजी मैच खेलने के बाद वह इंग्लैंड जाना चाहता था। इसके लिए उसे दो लाख रुपए की जरूरत थी, लेकिन पैसों का इंतजाम नहीं हो पाया। इसी बीच उसका एक विवाद हुआ और उसने हमला कर दिया। इसके बाद सेलेक्टर्स ने उसे ड्राप कर दिया। जिस पर सत्तू भड़का गया और चयनकर्ताओं पर भी हमला कर दिया। यहीं से उसका क्रिकेट करियर पटरी से उतर गया और जिंदगी ने खतरनाक मोड़ ले लिया। हालांकि, वह नगर निगम में पार्षद भी रहा, लेकिन एक बार अपराध में उतरा तो उस दलदल में फंसता ही चला गया।

क्रिकेट से दूर होने के बाद वह अपराधियों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे वारदातों में शामिल होने लगा। कभी नगर निगम का पार्षद रहा सत्तू समय के साथ संगठित अपराध की दुनिया में गहराई तक उतर गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके संबंध कुख्यात छोटा राजन गैंग से भी रहे। पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।

2010 में ट्रक भी लूटा

सत्तू पर हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों के करीब 30 मुकदमे दर्ज थे। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-31 थाने का हिस्ट्रीशीटर भी था। मुजफ्फरनगर के एक व्यापारी की हत्या के मामले में वह करीब 11 साल तक जेल में बंद रहा। वर्ष 2010 में मेरठ में धागे से भरे ट्रक की लूट की घटना में भी उसका नाम सामने आया था।

फिर बना सीरियल रेपिस्ट

हाल के वर्षों में वह किशोरियों को निशाना बना रहा था। वह सीरियल रेपिस्ट बन गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि सतपाल उर्फ सत्तू ने अब तक 6 किशोरियों का अपहरण कर उनके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया था। इस कारण वह पुलिस एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका था।

पत्नी और उसके प्रेमी का वीडियो देखा

उसकी आपराधिक कहानी में एक और अध्याय तब जुड़ा जब मार्च 2024 में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपनी पत्नी और उसके कथित प्रेमी का वीडियो देख लिया। इसके बाद उसने शराब पार्टी के बहाने प्रेमी को बुलाया और उसकी हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। फरवरी 2026 में लुधियाना में पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद वह लगातार फरारी काट रहा था। आखिरकार मुजफ्फरनगर की सिविल लाइन थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने मुठभेड़ में उसका अंत कर दिया।

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