मस्जिद में जाने के आदाब
मस्जिद में हाज़िरी के आदाब नमाज़ की तैयारी का अहम हिस्सा हैं। इन पर अमल करना दिखाता है कि इंसान के दिल में नमाज़ की कितनी इज़्ज़त और अहमियत है। ये आदाब इंसान को अल्लाह तआला के सामने खड़े होने के लिए रूहानी तौर पर भी तैयार करते हैं।
- बातचीत का तरीका:
मस्जिद में बैठकर गपशप करना मुनासिब नहीं है। वहाँ या तो नमाज़ पढ़ी जाए या अल्लाह का ज़िक्र किया जाए या फिर दीनी बातें की जाएं – और वो भी इस तरह से कि नमाज़ पढ़ने वालों को परेशानी न हो। - मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ:
मस्जिद में दाख़िल होते वक़्त ये दुआ पढ़नी चाहिए:
“बिस्मिल्लाहिस्सलातो वस्सलामो अला रसूलिल्लाहि, अल्लाहुम्मग़्फ़िर ली ज़ुनूबी वफ्तह ली अबवाबा रह्मतिका।” - मस्जिद में दाख़िल होते ही दो रकात नफ़्ल नमाज़ पढ़ें:
अगर मुमकिन हो तो मस्जिद में दाख़िल होते ही दो रकात नफ़्ल नमाज़ पढ़ें। ये एक तरह से अल्लाह का शुक्र अदा करना है कि उसने आपको नेक अमल (नमाज़) के लिए मस्जिद पहुँचाया। इसके बदले अल्लाह तआला से सवाब (इनाम) मिलेगा। - नमाज़ी के आगे से न गुज़रें:
अगर कोई शख्स नमाज़ पढ़ रहा हो तो उसके आगे से न गुज़रें, हाँ अगर सज्दे की जगह से थोड़ा फासले पर हो तो गुज़र सकते हैं। - ऊँची आवाज़ या गलत हरकतें न करें:
मस्जिद में ऊँची आवाज़ में बात करना या कोई ग़लत हरकत करना निहायत नापसंदीदा है। ये नमाज़ पढ़ने वालों को परेशान करता है। - साफ़-सफ़ाई का ख़याल रखें:
मस्जिद को हमेशा साफ़ रखना चाहिए। अगर मुमकिन हो तो अच्छी ख़ुशबू भी लगाई जाए ताकि माहौल दिलकश बने। कोई गंदगी मस्जिद में न छोड़ी जाए, उसे जल्द से जल्द साफ़ किया जाए। - बदबूदार चीज़ें खाकर मस्जिद न जाएं:
ऐसी चीज़ें (जैसे लहसुन, प्याज़) खाकर मस्जिद न जाएं जिनसे मुँह से बदबू आए, क्योंकि इससे दूसरों को तकलीफ़ होती है। - मस्जिद में थूकना मना है:
मस्जिद के अंदर या उसकी सीढ़ियों पर थूकना बिल्कुल मना है। - तिजारत की बातें न करें:
मस्जिद में ख़रीद-फ़रोख़्त (ख़रीदारी या बेचने) से जुड़ी बातें नहीं करनी चाहिए। तिजारत के विषय मस्जिद में नहीं उठाए जाने चाहिए। - खोई हुई चीज़ का ऐलान:
अगर कोई चीज़ मस्जिद के अंदर ही खो गई हो तो उसका ऐलान मस्जिद में किया जा सकता है। लेकिन अगर वो चीज़ बाहर खोई हो तो मस्जिद में ऐलान करना मुनासिब नहीं। - पीछे से आने वालों का अदब:
जो लोग देर से आते हैं उन्हें आगे जाने के लिए दूसरों के सिरों पर से कूदकर या धक्का देकर आगे नहीं जाना चाहिए। - छोटे बच्चों को संभालकर लाएं:
छोटे बच्चों को, जो मस्जिद में शोर मचा सकते हैं या पेशाब कर सकते हैं, उन्हें मस्जिद लाने से परहेज़ करना चाहिए। - जुमा के ख़ुत्बे का अदब:
जब इमाम जुमा का ख़ुत्बा दे रहा हो तो पूरी तरह खामोश रहना चाहिए। किसी से बात नहीं करनी चाहिए। अगर किसी को चुप कराना भी हो तो मुँह से कुछ कहे बग़ैर सिर्फ इशारे से बताना चाहिए। - मस्जिद से निकलते वक़्त की दुआ:
मस्जिद से बाहर निकलते हुए ये दुआ पढ़नी चाहिए:
“अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका मिन फ़ज़्लिका वा रह्मतिका।”
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