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  ख़ान बहादुर मेज़र जनरल फ़तेह नसीब ख़ान मेवाती (1888-1933)

Jaipur

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‘मेवाती शासन परम्परा के संस्थापक और महान वीर योद्धा नाहर ख़ान मेवाती (1372-1402) की ख़ानज़ादा वंश परंपरा में 1888 ईस्वी के दौर में तिजारा क़स्बे में वालिद हसन ख़ाँ और वालिदा उम्दाह के घर जन्मे फतेह नसीब ख़ाँ मेवाती 1904 ईस्वी में अलवर रियासत की सेना में भर्ती हुए थे, लेकिन अपनी वंश परंपरा की शान,सैन्य क़ाबलियत और वफ़ादारी के दम पर 1930 तक आते आते न केवल अलवर स्टेट फ़ोर्स के ‘कमाण्डर इन चीफ’ बने बल्कि अलवर स्टेट कौंसिल के सदस्य सहित,सैन्य मंत्रालय और सरिस्का हण्टिंग रिज़र्व के मुखिया पद पर भी नियुक्त हुए ।त्रिपोलिया गेट(अलवर)के पास उनकी सरकारी हवेली थी। इसी क्रम में रियासत की ओर से प्रथम विश्व युद्(1914-1918) सहित 1919 के तृतीय ऐंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध में ब्रिटिश सेना का प्रतिनिधित्व कर अपनी क़ाबिलियत का परचम लहराया। लगातार सैन्य व प्रशासनिक सफलता, वफ़ादारी और हेरतअंगेज़ संकटमोचक की भूमिका से प्रभावित हो अलवर रियासत के नरुका राजपूतवंशी शासक महाराजा जयसिंह(1892-1937) द्वारा ‘ताज़िमी सरदार’ ,’मुमताज़-ए-ख़ास अलवर’ की सम्मानजनक उपाधियों के साथ 500 एकड़ स्थायी भूमि और 25 गाँव जागीर में दिये।साथ ही जनवरी,1929 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भी ख़ान’बहादुर की उपाधि के साथ ब्रिटिश सरकार का सर्वोच्च अवॉर्ड ‘मोस्ट एक्सीलेंट ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर ‘ तथा ‘नाईट ग्रांड कमाण्डर ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ इंडिया अवॉर्ड’ भी प्रदान किया …ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के भविष्य और संवैधानिक सुधारों पर भारतीय प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने हेतु 1930-से 1932 के मध्य लंदन में होने वाले गोलमेज़ सम्मेलनों में से प्रथम 2 में स्वयं अलवर महाराजा जयसिंह ने भाग लिया था, लेकिन दिसम्बर,1932 के अंतिम तीसरे सम्मेलन में भारत की ओर से शामिल होने वाले कुल 46 प्रतिनिधियों में फतेह नसीब खां मेवाती का भी शामिल होना गौरव की बात थी।

1924-25 के नीमूचाणा(बानसूर)किसान आंदोलन

1930-32 के अलवर मेव किसान आंदोलन के जटिल दौर में जनरल फतेह नसीब ख़ान ने सकारात्मक रियासती पक्ष और नीतियों से किसानो और उनके नैतृत्व को जोड़ने का अथक प्रयत्न किया था,लेकिन आज़ादी के आंदोलन,जनचेतना के तेजी से उभरने और अकाल की नाज़ुक परिस्थितियों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी। संकट की इन्हीं परिस्थितियों में 1933 ईस्वी में ख़ान बहादुर जनरल फतेह नसीब ख़ान मेवाती का दिल का दौरा पड़ने से इन्तक़ाल हो गया । देश की आज़ादी के साथ ही धर्म की बुनियाद पर हुए देश विभाजन की पीड़ादायक और मार्मिक  परिस्थितियों में वतन परस्ती की ठोस भट्टी में तपे मेज़र जनरल फ़तेह नसीब ख़ान मेवाती की विधवा मुबारक़ बैगम भी अपनी अनगिनत अमर यादों और छह बेटों के साथ – सुबेदार मेजर (रिटायर्ड) अब्दुल मजीद खान (IST), एसपी (रिटायर्ड) अब्दुल वहीद खान, मेजर (रिटायर्ड) मुहम्मद इक़बाल खान, डॉ. मुहम्मद अल्लाहदाद खान, लेफ्टिनेंट कर्नल मलिक नियाज़ अहमद खान, और प्रोफेसर डॉ. खुर्शीद आलम खान के साथ,अन्य बहुत सारे लोगों की भाँति नये बनें मुल्क़ पाकिस्तान हैदराबाद (सिन्ध) हिज़रत कर गये थे।

देश की आज़ादी से पहले मेवात इलाक़े की महत्वपूर्ण राजशाही अलवर रियासत में फतेह नसीब ख़ान मेवाती का एक सामान्य सैनिक से सर्वोच्च सैन्य व प्रशासनिक पदों तक पहुंचकर देश- विदेश तक अपनी क़ाबिलियत और क्षमताओं का परचम लहराना हम सबके लिये प्रेरक और महान साझी विरासत का प्रतीक है ।।।’

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