हर हैसियत मंद को जकात और फ़ितरा देना जरूरी
रमजान का पाक महीना चल रहा है इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और रोज़ा रखते हैं। रमजान में रोज़ा-नमाज और कुरान पढ़ने के साथ जकात और फितरा देने का भी बहुत बड़ा महत्व होता है। दरअसल, ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान को जकात और फितरा अदा करना होता है यह जकात और फितरा ऐसे लोगों पर फर्ज है जिनके पास 60000 रुपए कैश या 60000 का जेवर है उन लोगों पर जकात और फितरा फर्ज होता है।
- कुल राशि का 2.5 फीसदी हिस्सा होता है जकात
इस्लाम में यह भी कहा गया है कि अल्लाह ताला ने ईद का त्योहार गरीब और अमीर सभी के लिए बनाया है। गरीबी के वजह से लोगों की खुशी में कमी ना आए इसलिए जकात और फितरा देना जरूरी होता है ताकि ऐसे जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर भी मुस्कान आ सके और वह भी खुशी-खुशी ईद का पर्व अपने परिवार के साथ मना सके। इस्लाम में रमजान के पाक महीने में हर हैसियत मंद मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है, उसका 2।5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है। - 1000 में 25 रुपए होता है फितरा
सहरसा की हटिया गाछी स्थित मस्जिद के इमाम नुरुल्लाह रहमानी ने बताया कि ऐसे लोग जिनके पास 60000 रकम है ऐसे व्यक्ति को फितरा निकलना उन पर फर्ज है। फितरे की रकम गरीब तबके के लोगों को दी जाती है यह भी कहा गया है कि जो लोग रमजान में रोज़ा रखते हैं और रोज़ा में जो खराबी आई जिन्होंने झूठ बोल दिया या कोई गुनाह कर दिया जो रमजान के महीने में ये सब नहीं करना चाहिए था अगर रोज़ा में यह सब काम कर दिया तो इन तमाम गंदगियों से पाक साफ होने के लिए भी फितरा और जकात अदा किया जाता है वहीं 1000 में 25 रुपए फितरा के तौर पर निकाले जाते हैं।
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