इंसानी ज़िन्दगी में पानी की एहमियत
पानी ज़मीन पर बसने वाली हर ज़िन्दा मख़लूक़ के लिए सबसे अहम तत्वों में से एक है। इस्लाम ने पानी के सही इस्तेमाल की जितनी तालीम दी है, वो इसी से शुरू होती है कि इंसान को ये एहसास दिलाया जाए कि ये नेमत कितनी बड़ी है। अल्लाह तआला ने तमाम ज़िन्दा चीज़ों को पानी से पैदा किया, और उसी की ताक़त से हमें पीने लायक पानी मयस्सर होता है। फिर इस्लामी शरीअत ने कुरआन और सुन्नत से उसूल निकालकर पानी की मुख़्तलिफ़ क़िस्मों और हालतों के हिसाब से हुक्म तय किए — कहाँ पानी पाक है, कहाँ नापाक, किस तरह उसका इस्ते’माल जायज़ है और कहाँ उसे ज़ाया करना या गंदा करना हराम है। अकसर ऐसा होता है कि इंसान जिस नेमत में डूबा होता है, उसी को भूल जाता है। पानी भी एक ऐसी ही नेमत है, जब तक ये आम है, हम इसकी क़द्र नहीं करते। लेकिन जब कहीं सूखा पड़ता है, तो इसी पानी की एहमियत याद आती है। और जब बाढ़ आती है, तो हमें इसकी तबाही का अंदाज़ा होता है। कुरआन में अल्लाह तआला इंसान को याद दिलाता है कि “अगर तुम्हारा पानी ज़मीन के नीचे चला जाए, तो उसे फिर कौन लाएगा?” {कहो: बताओ अगर तुम्हारा पानी ज़मीन में समा जाए तो फिर कौन है जो तुम्हें साफ़ बहता हुआ पानी ला देगा?} (क़ुरआन 67:30)
जब हम पानी के बारे में ग़ौर करते हैं तो हमें अल्लाह की कुदरत का अंदाज़ा होता है, ये ऐसा साफ़ और बे-रंग, बे-ज़ायका, बे-बू माया (लिक्विड) है, जिसके बग़ैर ज़िन्दगी मुमकिन नहीं। इंसान की रूह भी इससे तस्कीन पाती है, चाहे दुनिया के कितने ही रंग-बिरंगे, स्वादिष्ट मशरूबात क्यूँ न हों। प्यास बुझाने के लिए सबसे पहले पानी ही चाहिए। इंसान शुरू से इसका इस्तेमाल करता आया है, फिर भी आज तक साइंस नई-नई बातें पानी के बारे में जान रही है। पानी का बाक़ायदा एक इल्म है हाइड्रॉलोजी जो सिर्फ़ पानी को समझने के लिए है।
कुरआन क्या कहता है पानी के बारे में?
कुरआन में पानी की अहमियत का बार-बार ज़िक्र आता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: {… और अल्लाह ने हर ज़िन्दा चीज़ को पानी से पैदा किया} (क़ुरआन 21:30), {अल्लाह ने हर ज़िन्दा मख़लूक़ को पानी से पैदा किया} (क़ुरआन 24:45)
कुछ मुफस्सिरीन (कुरआन के व्याख्याकार) कहते हैं कि “हर ज़िन्दा चीज़” में जानवर भी शामिल हैं और पेड़-पौधे भी, क्योंकि उनकी नशो-नुमा (विकास) भी पानी से ही होती है। साइंस भी यही बताती है कि हर सेल (कोशिका) में पानी सबसे ज़्यादा होता है, और यही उसकी बुनियादी तामीर का हिस्सा है। इंसानी जिस्म में भी क़रीब 65% हिस्सा पानी से बना होता है। {और वही (अल्लाह) है जो आसमान से बारिश बरसाता है और हम उससे तमाम चीज़ों को उगाते हैं… अंगूर, ज़ैतून, अनार वग़ैरह} (क़ुरआन 6:99)
पानी से ना सिर्फ़ इंसानों की ज़िन्दगी चलती है, बल्कि तमाम ज़मीन की हरियाली, जानवरों की ग़िज़ा, और फल-सब्ज़ियों की पैदावार भी होती है। कुरआन कई आयतों में पानी से उगने वाले मुख़्तलिफ़ फलों और फ़सलों का ज़िक्र करता है। इससे ये बात और वाज़ेह होती है कि पानी हर किस्म की ज़िन्दगी के लिए लाज़मी है।
पानी की पवित्रता भी एक नेमत है
अल्लाह तआला ने हमें सिर्फ़ पीने के लिए नहीं, बल्कि ग़ुस्ल, वुज़ू और नजासत (गंदगी) को साफ़ करने के लिए भी पानी अता किया। कुरआन कहता है: {और हमने आसमान से पाक पानी उतारा} (क़ुरआन 25:48)
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ भी अपनी दुआओं में पानी का ज़िक्र इस तरह करते थे: “ऐ अल्लाह, मेरे गुनाहों को पानी, बर्फ़ और ओले से धो दे।” (हदीस: मुस्लिम)
हदीसों में बताया गया है कि मरने के बाद जनाज़े की दुआ में भी यही अल्फ़ाज़ इस्तेमाल होते हैं — “ग़ुस्ल दे उसे पानी, बर्फ़ और ओले से…” क्योंकि ये सब अल्लाह की पाक चीज़ें हैं जो इंसान को पाक करती हैं। इस्लाम कहता है कि पानी, घास और लकड़ी ये तीन चीज़ें तमाम मुसलमानों की साझी मिल्कियत हैं। कोई शख्स किसी कुएँ या नहर के पानी को अपनी मिल्कियत बनाकर दूसरों को रोके, तो ये नाजायज़ है जब तक वो ख़ास तौर पर किसी की ज़मीन या प्राइवेट जगह न हो। हदीस में सख़्त अल्फ़ाज़ में उन लोगों की मज़म्मत की गई है जो रास्ते में पानी रखते हुए भी मुसाफ़िर को नहीं देते। इस्लामी तालीमात में पानी को बहुत बड़ी नेमत माना गया है। ये सिर्फ़ एक क़ुदरती ज़रूरत नहीं, बल्कि एक अमानत है जिसे सँभालना, ज़ाया होने से बचाना और दूसरों के साथ बाँटना, सबका फ़र्ज़ है। इस्लाम हमें न सिर्फ़ इसका शुकर अदा करना सिखाता है, बल्कि इसके इस्तेमाल के अदब भी बताता है।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
