फासलों के बाद भी हम में ये क़ुरबत है
फासलों के बाद भी हम में ये क़ुरबत , है तो है
लोग कहते हैं मोहब्बत को बगावत, है तो है
तूने दुनिया के लिए मखसूस कर दी कायनात
ए खुदा फिर भी यह दुनिया को शिकायत, है तो है
रुख हवा का और है दुनिया की है अपनी रविश
आम करना बस मोहब्बत अपनी फितरत ,है तो है
सुन अमीरे वक्त तुझसे मांगना कुछ भी नहीं ,
मेरी खुद्दारी अगर मेरी हिमाकत, है तो है
यूं तवज्जो फिर मुझे हासिल हुई दिलदार की
बाद मुद्दत फिर उसे मेरी ज़रूरत ,है तो है
सच कहूंगी बारहा चाहे रूठे दुनिया भी
आप की खातिर मेरी हरकत हिमाकत, है तो
हां मोहब्बत में अदावत मुस्तकिल होती नहीं
अपने दुश्मन से ही शाइस्ता मोहब्बत ,है तो है
डॉ. शाइस्ता मेहजबीन
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