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ग़ज़ल

Jaipur

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मोहब्बत की यादों में खोया  करो ना

मेरे  पास आकर  जी  रोया  करो ना

ये  कांटे  हैं  इनको   बोया   करो  ना

चुभन  दे  जो यादें  संजोया  करो ना

मेरा  घर  जला  कर  हंसता है पागल

खबरदार   बेपरवाह  सोया   करो  ना

दिलों  के   हालात   यकसां  हैं   फिर

जफ़ाओं  के  कांटे  चुभोया   करो ना

शुरु  है  अभी आगे होता है क्या क्या

हंसों  मुस्कुराओ  यूं   खोया  करो  ना

अभी जी लिया फिर जिया जाएगा ना

बिछड़ने  की  ये  बातें  किया  करो ना

लुटा  कर  सभी  कुछ  आएं  हैं   देखो

लुट  जाने  का  डर  दिखाया करो ना

तख़लीक़:- फ़ज़लुर्रहमान

सहायक सचिव ( सेवानिवृत्त )

मोबाईल नं 9728668877

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