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विधि क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के लिये न्यायिक क्षेत्र, विधिक क्षेत्र, शिक्षण, वकालत के अलावा अन्तर्राष्ट्रीय निगमों, राष्ट्रीय निगमों, निजी क्षेत्र के व्यापारिक संस्थानों, विधिक सलाहकार, लेखन विभाग में भरपूर अवसर हैं। विधिक एवं न्यायिक समीक्षा, लॉ फर्मों में कार्य करने के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं प्रमुख जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री मोहम्मद हनीफ, आर.एच.जे.एस. (आर) के विचार हैं।

बिक्रमगंज

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एम खान

जयपुर,(रॉयल पत्रिका)। श्री मोहम्मद हनीफ का जन्म 8 जुलाई, 1945 को लक्ष्मणगढ़, जिला-सीकर के गांव-राजास के साधारण किसान परिवार में हुआ तथा उन्होंने 1959, 1961 में क्रमशः हाईस्कूल एवं इण्टरमीडियेट की परीक्षा, बोर्ड ऑफ सैकण्डरी एज्यूकेशन, अजमेर से उत्तीर्ण कर 1963 में एसएसजी पारीक महाविद्यालय, जयपुर से बी.ए. उत्तीर्ण की। बी.ए. में प्राप्त अंको के आधार पर योग्यता क्रम में आने पर राजस्थान विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र एवं लोक प्रशासन विभाग से शिक्षण प्राप्त कर अप्रेल, 1965 की परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित होने पर एम.ए. अर्थशास्त्र की डिग्री प्राप्त की।

इसके पश्चात् उनके द्वारा स्कूल ऑफ लॉ, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से अप्रेल 1967 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की तथा अप्रेल 1969 में एलएलएम की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिग्री प्राप्त की।

उन्हें ‘स्कूल ऑफ लॉ’ राजस्थान विश्वविद्यालय में विधि शिक्षण पर प्राप्त अंकों के आधार पर राष्ट्रीय योग्यता छात्रवृत्ति प्रदान की गई, जिससे विधि अध्ययन पूर्ण करने में आर्थिक सम्बल प्राप्त हुआ और एलएलएम प्रथम प्रयास तथा राजस्थान विश्वविद्यालय के योग्यता क्रम में द्वितीय स्थान प्राप्त किया और उन्हें राजस्थान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह जनवरी 1970 में महामहिम राज्यपाल महोदय, राजस्थान सरकार श्री जोगेन्द्र सिंह जी द्वारा पीएचडी, एमएस, एमडी डिग्रीधारियों के साथ एलएलएम की डिग्री प्रदत्त की गई। उन्होंने एलएलएम में लेजीगेशन इन्टरप्रटेशन में व्यापारिक कानून के कम्परेटिव लॉ, स्पेशल कॉन्ट्रेक्ट कंपनी लॉ एवं कंपनी लॉ बोर्ड निगोसिएबल इन्सट्रूमेंट्स एवं सेरिटाईम लॉ एवं इन्श्योरेन्स जैसे विधिक विषयों का गहन अध्ययन किया।

विश्वविद्यालय में अध्ययन के मध्य कडी मेहनत एवं लगन से अध्ययन के कारण आत्मविश्वास को बल मिला और निश्चित तौर पर तय कर लिया कि राजस्थान राज्य की तीन प्रमुख सेवाओं राजस्थान लेखा सेवा, प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा से नीचे की सेवा नहीं करनी है। राजस्थान राज्य प्रतियोगिता परीक्षा 1968 में विज्ञपित दो राज्य सेवा राज लेखा सेवा के 12 पद राज पुलिस सेवा के 19 पदो के लिये परीक्षा योग्यता क्रम में दोनों सेवाओं में तृतीय स्थान प्राप्त किया तथा प्रथम वरीयता के आधार पर राजस्थान लेखा सेवा में 1968 के बैच के टॉपर की हैसियत से 03 अप्रेल 1970 को एचसीएम (रीपा) में कार्यभार ग्रहण कर एक साल का आधारभूत व लेखा एवं वित्त सम्बन्धित विशेष प्रशिक्षण तथा राजस्थान राज्य के प्रमुख विभागों के लेखा एवं वित्त संबंधी कानून, नियम, उपनियम, परिपत्रों की अनुपालना का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया और प्रशिक्षण के उपरान्त विभागीय परीक्षा के योग्यता क्रम में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

प्रशिक्षण उपरान्त 13 अप्रेल 1971 को जिला कोषाधिकारी, श्रीगंगानगर का पदभार ग्रहण किया, उस दौरान पदेन जिला राज्य लॉटरी अधिकारी, वित्त विभाग राजस्थान सरकार द्वारा नामित किये जाने के आधार पर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में डायरेक्टर का कार्य का निष्पादन किया, इसके अलावा एलएलएम की डिग्री होने के आधार पर एस.डी. लॉ कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी की प्रार्थना पर जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, श्रीगंगानगर के माध्यम से स्वीकृति प्राप्त कर सांयकालीन कक्षाओं का विधि अध्यापन भी किया।

जिला कोषाधिकारी श्रीगंगानगर के पद पर 13.04.1971 से 25.06.1975 तक कार्य किया, इसी मध्य नवसृजित विभाग, भूमि एवं भवन कर में सहायक निदेशक के पद पर भी 25.06.1973 से 29.05.1975 तक कार्य किया।

राजस्थान न्यायिक सेवा

राजस्थान न्यायिक सेवा में वर्ष 1974 में योग्यता क्रम में चतुर्थ स्थान प्राप्त कर दिनांक 30.05.1975 को जिला एवं सेशन न्यायालय, जयपुर नगर में पदभार ग्रहण किया और इसके पश्चात् मुंसिफ एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट के पदों पर कार्य किया और दिनांक 21.09.1985 से सिविल न्यायाधीश एवं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर पदोन्नति हुई। दिनांक 13.08.1987 से पूर्णतय योग्यता के आधार पर सुपर टाईम स्केल स्वीकृत हुई और सिविल न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नागौर के पद पर आर्थिक अपराधों से संबंधित केन्द्रीय अधिनियमों के निस्तारण हेतू न्यायालय के पीठासीन अधिकारी एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संवर्ग में रेलवे कोर्ट में पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य किया। दिनांक 11.03.1991 में राजस्थान उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति उपरान्त विभिन्न पदों पर कार्य किया। जिला न्यायाधीश संवर्ग में पारिवारिक न्यायालय, अजमेर में पीठासीन अधिकारी, माननीय उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार वर्गीकरण, रिट्स एवं रजिस्ट्रार प्रशासन के पदों पर करीब 7 साल तक कार्य करने के उपरान्त प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चुरू के पद पर 18.08.2002 से 29.10.2003 तक कार्य किया।

राजस्थान उच्चत्तर न्यायिक सेवा की चयनित एवं सुपर टाईप स्केल स्वीकृत की गई।

रेलवे क्लेमस ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में चयन हुआ लेकिन निजी कारणों से पद पर कार्यग्रहण नहीं किया तथा उपभोक्ता मंच द्वितीय संख्या-2, जयपुर नगर के पद पर दिनांक 30.10.2003 को कार्यभार ग्रहण किया तथा दिनांक 31.07.2005 को राजस्थान उच्चत्तर न्यायिक सेवा से सेवानिवृत्त हुआ। पांच वर्ष के कार्यकाल के कारण दिनांक 29.10.2008 को पदभार छोड़ा। पांच वर्ष के कार्यकाल में करीब 7000 उपभोक्ता परिवादों का निस्तारण किया।

विभिन्न गतिविधियाँ

राजस्थान राज्य पिछडा वर्ग आयोग में वरिष्ठ सदस्य की नियुक्ति उपरांत तीन वर्षों तक कार्य किया। इसी दौरान कमिशन की अनुशंषा की रिपोर्ट के आधार राज्य सरकार ने 50 प्रतिशत से अधिक 1+4 बराबर 5 प्रतिशत आरक्षण विशेष पिछडा वर्ग गुर्जर, गाडिया लुहार, गडरिया, देवासी, रेबारी को आरक्षण दिया गया।

राज्य स्तरीय मानव अंग प्रत्यारोपण कमेटी में न्यायिक सदस्य के रूप में कार्य किया। पांच वर्ष तक मीडियेशन सेंटर माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में मीडियेटर के रूप में सेवायें दी तथा आरबीट्रेटर की हैसियत से भी कार्य का निष्पादन किया तथा 75 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत निजी कारणों से प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में भाषण देने, वैध तौर पर स्थापित समाज सुधार संस्थानों में जागरूकता के अलावा प्रेरक के विषय पर भाषण दिया गया।

 

पांच वर्ष की लेखा सेवा, 15 वर्ष न्यायिक सेवा, 15 वर्ष उच्चत्तर न्यायिक सेवा के दौरान राज्य स्तरीय, केन्द्रीय स्तरीय के प्रशिक्षण संस्थानों में नामित किये जाने पर कार्य किया।

 

राज्य स्तरीय : कोषालय प्रशासन में संबंधित एचसीएम रीपा, जयपुर द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में दिनांक 19.10.1972 से 29.10.1972 तक भाग लिया। एचसीएम रीपा द्वारा ही दिनांक 01.07.1973 से 28.07.1973 तक भूमि एवं भवन कर पाठ्यक्रम में भाग लिया।

 

अन्तर्राज्य स्तरीय : माननीय उच्च न्यायालय आंधप्रदेश द्वारा संचालित ज्यूडिशियल एकेडमी द्वारा आयोजित कोर्ट प्रशासन प्रोग्राम दिनांक 29.09.1996 से 04.10.1996 तक भाग लिया, जिसमें अमेरिका स्थित न्यायालय के अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों ने भी भाग लिया था।

 

केन्द्रीय स्तरीय : राष्ट्रीय अपराध एवं विधि विज्ञान संस्थान, भारत सरकार द्वारा आयोजित 48वां व 52वां अपराध न्याय पर आयोजित प्रोग्राम क्रमशः जिला न्यायाधीश, जिला मजिस्ट्रेट, जिला एसपी एवं निदेशक अभियोजन के लिये आयोजित प्रोग्राम दिनांक 28.02.1992 से 11.03.1992 तक एवं 10.01.1994 से 21.01.1994 में भाग लिया। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा दिनांक 15.03.2004 से 20.03.2004 तक “मैनेजमेंट डवलपरमेंट प्रोग्राम” उपभोक्ता मंच के अध्यक्षों एaवं सदस्यों द्वारा आयोजित प्रोग्राम में भाग लिया।

 

विधि एवं न्याय: विधि एवं न्याय के क्षेत्र में रूचि रखने वाले जवान पीढ़ी के लिये उनके ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर संदेश है कि निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति हेतू निष्ठा, लगन से सतत प्रयासरत रहने पर ऊपर वाले की कृपा से सफलता अवश्य मिलेगी, क्योंकि मेहनत के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

क्लेट के माध्यम से करीब 23  राष्ट्रीय स्तर के नेशनल लॉ यूनिविर्सिटीज में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिये मल्टीनेशनल कंपनी में नियोजन के स्वर्णिम अवसर हैं। इसके अलावा भी सीनियर अधिवक्ताओं, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय की लॉ फर्मस में पर्याप्त अवसर हैं। विधि एवं न्याय पर लेखन, निर्णयों की समीक्षा, लीगल ड्राफटिंग, इंटरनेशनल आरबीट्रेशन में भी अच्छे अवसर हैं, इसके अलावा न्यायिक सेवा, प्रेक्टिस एट बार नेशनलाईज्ड बैंक में सलाहकार या प्रतियोगिता के आधार पर लॉ मैनेजर भी बन सकते हैं। मास्टर्स डिग्री इन लॉ, पीएचडी उपरान्त विधि अध्यापन के अवसर, बौद्धिक सम्पदा, Intellectual Property, Artificial Intelligence, विधि का ज्ञान, न्यायिक निर्णयों की यू-ट्यूब पर समीक्षा से आय अर्जित करने के अच्छे अवसर हैं।

 

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