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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अचानक बदल गए ट्रम्प के तेवर, पूरी दुनिया की नजरें टिक गईं

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अचानक बदल गए ट्रम्प के तेवर, पूरी दुनिया की नजरें टिक गईं

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तेहरान। पश्चिम एशिया में पिछले दो हफ्तों से लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अचानक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर सबसे बड़े हमले को फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हवाई हमले नहीं करने का निर्देश दिया। इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प लगातार 13 दिनों तक हर दिन सैन्य हमलों की मंजूरी दे रहे थे।

ट्रम्प ने कैबिनेट मीटिंग में बड़े हमले रोकने का आदेश दिया

द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक के बाद ट्रम्प ने सेना को नए बड़े हमले रोकने का आदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर अभियान और बढ़ाया गया तो मिडिल-ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य एयर डिफेंस हथियारों का भंडार गंभीर रूप से कम हो सकता है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े अभियान से मिडिल-ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका था। एक्सियोस के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले रोकने का फैसला अस्थायी है या लंबे समय तक लागू रहेगा। हालांकि, जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार रहेगी।

अमेरिका ने कल पहली बार रात में नहीं किए हमले

पिछले दो हफ्तों से जारी सैन्य तनाव के बीच शनिवार को पहली बार रात में कोई बमबारी नहीं हुई। इससे पहले लगातार 13 रातों तक अमेरिकी हवाई हमले हुए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया था। हालांकि, पेंटागन ने संभावित स्थिति को देखते हुए हाल के दिनों में मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैन्य बल और हथियार भेजे हैं। सैन्य योजनाकार ऊर्जा सुविधाओं, परिवहन लाइनों और ईरान की पिकएक्स माउंटेन स्थित परमाणु सुविधा पर हमले के विकल्प भी तैयार कर रहे थे।

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कुवैत का ईरान पर अमेरिकी हमले में शामिल होने से इनकार

वहीं कुवैत ने ईरान पर अमेरिकी हमलों में शामिल होने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कुवैत सरकार ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री सीमा का इस्तेमाल हमले के लिए होने दिया। यह सफाई वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन ने भी ईरान के अंदर लड़ाकू विमान भेजे थे। अमेरिका में कुवैत की राजदूत शेखा अल-जैन अल-सबा ने रिपोर्ट को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कुवैत ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बना।

ईरान के सरकारी टीवी पर सेंसरशिप का आरोप

ईरान सरकार ने सरकारी टीवी IRIB पर राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के भाषण का अहम हिस्सा सेंसर करने का आरोप लगाया है। गवर्नमेंट इन्फॉर्मेशन काउंसिल ने कहा कि राष्ट्रपति के उस बयान को प्रसारित नहीं किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुप्रीम लीडर के निर्देश पर अमेरिका के साथ बातचीत शुरू की गई थी। सरकार ने इसे सेंसरशिप बताते हुए कहा कि हाल के दिनों में सरकारी टीवी सरकार के शीर्ष नेताओं के बयानों के साथ भी ऐसा कर रहा है। वहीं, IRIB ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य देश के शीर्ष नेतृत्व के बीच किसी तरह के मतभेद का गलत संदेश जाने से रोकना है।

यूक्रेन पर भड़का ईरान, राजनयिक को किया तलब

ईरान ने कैस्पियन सागर में अपने व्यापारिक जहाज पर कथित हमले के विरोध में यूक्रेन के राजनयिक को तलब किया है। ईरान का आरोप है कि हमले में एक नाविक की मौत हुई और एक अन्य घायल हुआ। विदेश मंत्रालय ने इसे आक्रामक कार्रवाई बताते हुए कहा कि देश अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करेगा। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में ऐसे जहाजों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल ईरान से जुड़े सैन्य सामान की ढुलाई के लिए हो रहा था। हालांकि, उन्होंने ईरानी व्यापारिक जहाज पर हमले की सीधे पुष्टि नहीं की।

ईरान बोला- अमेरिका को भड़का रहा इजराइल

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजराइल पर अमेरिका को भड़काने का आरोप लगाया है। IRGC के प्रवक्ता ने कहा कि इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति को झूठी जानकारी देकर ईरान के खिलाफ माहौल बना रहा है, ताकि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी मौजूदगी बनाए रखे और इजराइल अपने रणनीतिक उद्देश्यों को अमेरिकी क्षमताओं के जरिए पूरा कर सके। IRGC ने इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने दोबारा युद्ध शुरू किया तो ईरान इसके जवाब में बड़ी तबाही लाएगा।

बड़े हमले की तैयारी में था इजरायल

रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के सुरक्षा तंत्र को उम्मीद थी कि शुक्रवार को अमेरिका ईरान पर एक और बड़ा हमला करेगा। इसी आशंका के चलते इजरायली सेना और सुरक्षा कैबिनेट हाई अलर्ट पर थे। बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि ट्रंप ने नए हमलों की मंजूरी नहीं दी।

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