अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमला
भारत ने कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में एक हिंदू मंदिर में हुई बर्बरता की निंदा की हैँ। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस तरह के घृणित कार्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिगरी दोस्त माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दक्षिणपंथी पार्टियों का नेतृत्व करते हैं। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका में राष्ट्रवादी एवं ईसाइयों के हितों के लिए काम करने वाला व्यक्ति माना जाता है। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दक्षिणपंथी पार्टी भाजपा और हिंदुत्व के हितों के लिए काम करने वाला नेता माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति मोदी के दोस्त होते हुए भारत के साथ बिल्कुल नरमी नहीं बरत रहे हैं। कभी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं तो कभी विमान में भारतीय अप्रवासियों को जंजीरों में जगड़कर भेज रहे हैं। अमेरिका में मंदिर पर हमला भी ट्रंप शासन में हुआ है लेकिन मंदिर के हमलावरों पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। इसी तरह पिछलों दिनों बांग्लादेश में मंदिरों पर हमलों किए गए और बांग्लादेशी हिन्दूओ पर अत्याचार किया। भारत ने बांग्लादेश की काम चलाऊ सरकार से हिंदुओं पर अत्याचार रोकने के लिए कहा लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी हैं। दुनिया के अन्य देशों में भी हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े हैं। दूसरी तरफ भारत के विभिन्न प्रदेशों में अल्पसंख्यक वर्ग पर अत्याचारों में वृद्धि हुई है। लव जिहाद, मंदिर, मस्जिद अज़ान एवं चर्च को लेकर झगड़ा सामने आए हैं। राजस्थान के बांसवाड़ा में एक चर्च की दीवारों पर श्रीराम लिख दिया गया और अब उसमें मूर्ति रखने की तैयारी की जा रही है। देश के कई भागों में मस्जिदों और मजारों पर बुलडोजर चला दिए गए। ट्रेनों, बसों एवं थानों में अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर उत्पीड़न बढ़ गए हैं। मोदी राज में अब तो पुलिस अधिकारी भी अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को होली के समय में घरों में छुपकर रहने की हिदायत देने लगे हैं। विश्व में सभी धर्मों के लोग व्यापार, शिक्षा, मजदूरी एवं टयूरिस्ट के लिए आते जाते हैं। यदि सभी धर्मों के लोग एक दूसरे से नफरत करने लग जाए और एक दूसरे को मारने लग जाए तो क्या होगा। भारत के नेताओं एवं जिम्मेदारों को समझना चाहिए कि देश में रहने, खाने, पहनने एवं बोलने की स्वतंत्रता है। फिर भी लोगों से यह अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है। एक तरफ जब दुनिया की किसी देश में हिंदुओं पर अत्याचार होता है तो सरकार विरोध करती है, जब देश के अंदर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जाता है। तो देश की जिम्मेदार सरकार चुप्पी साध लेती है। ऐसी स्थिति में देश की साख विदेशो में खराब होती है। व्यापार एवं ट्यूरिज्म सेक्टर में कमजोरी आती है और देश में रोजगार के अवसर कम होते जाते हैं। इसलिए देश की सरकार को अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के बीच बढती नफरत को समाप्त करने के प्रयास करना चाहिए जिससे विश्व पटल पर भारत की छवि को सुधारा जा सके।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
