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भारतीय स्वतंत्रता के प्रसिद्ध सेनानी एडवोकेट आसफ अली

Jaipur

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आसफ अली एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे और पेशे से वकील भी, उनका जन्म 11 मई 1888 को भारत के बिजनौर उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट स्टीफन कॉलेज दिल्ली से की थी। वह भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले राजदूत बने। सन 1914 में भारतीय मुस्लिम समुदाय पर ब्रिटिश साम्राज्य का बड़ा प्रभाव पड़ा। उसी दौरान आसफ अली ने तुर्की खिलाफत पक्ष का समर्थन किया और पूर्वी काउंसलिंग से इस्तीफा दे दिया। 1914 में भारत लौट आए। फिर वह एक आंदोलनकारी के रूप में राष्ट्रवादी आंदोलन में शामिल हो गए। 1919 में उन्होंने आंदोलन में शामिल होकर ब्रिटिश सरकार का विरोध किया और 1920 से 1921 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय रहे। 8 अप्रैल 1928 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा दिल्ली केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तो उनके बचाव पक्ष के वकील और मुकदमे की पैरवी में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। 1928 के दौरान इन्होंने अरुणा गांगुली नामक हिंदू लड़की से शादी की। 1935 में मुस्लिम राष्ट्रवादी पार्टी के सदस्य के रूप में इन्हें केंद्रीय विधानसभा के लिए चुना गया। वह मुस्लिम लीग के उम्मीदवार के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए और फिर उन्हें उपाध्यक्ष के रूप में भी चुना गया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी इनकी अहम भूमिका थी उसी दौरान मुंबई में गोवालिया टैंक मैदान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ध्वज से उगहाने के लिए इनकी पत्नी को भी व्यापक रूप से याद किया जाता है। 2 सितंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत सरकार के रेलवे व परिवहन प्रभारी बने। फरवरी 1947 से फरवरी 1949 तक अमेरिका में भारत के पहले राजदूत के रूप में इन्होंने कार्य किया। 1 अप्रैल 1953 से 64 वर्ष की आयु में स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत के रूप में सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया। 1989 में भारतीय डाक विभाग ने उनके उत्कृष्ट कार्य एवं सम्मान के रूप में एक डाक टिकट जारी किया था। उसी दौरान उनकी पत्नी को भी भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से भी नवाजा गया था।

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