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विश्व में ज्यादातर लोग हिटलर बनना चाहते है!

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आज विश्व में हर जगह अशांति दिखाई दे रही हैं। देशों में आपस में, धर्मो के बीच, जातियों के बीच और परिवारों के बीच युद्ध चल रहे हैं। ताकतवर देश, धर्म, जाति और परिवार का सदस्य कमजोर को दबाकर रखना चाहता है। यदि कमजोर प्रतिरोध करता है तो उस पर युद्ध थोप दिया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, राष्ट्रीय स्तर पर, राज्य स्तर पर, सामाजिक स्तर पर और परिवारिक स्तर पर। नियम कानून कायदे एवं परम्पराओं का निर्वहन करना कमजोर की जिम्मेदारी हो गई है। समाज की सबसे छोटी यूनिट परिवार में भी कई सदस्य हिटलर बनना चाहते हैं। वर्तमान में हिटलर के मायने है मनमानी करने वाला, दुसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के अधिकारों का दमन करने वाला और उसको दबाकर जीने पर मजबूर करने वाला है। यही ज्यादातर व्यक्ति कर रहे है। परिवारों में हिटलरों की कमी नही है जो अपनों के ही अधिकारों का दमन कर रहें हैं और यहां तक कि अपने खास सगे संबधियों की प्रोपटी पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह समाजों में एक जाति के लोग कमजोर जाति के लोगों पर गैरकानूनी तरीके से अत्याचार कर रहे है और उनका बेहरहमी से दमन करने पर उतारू हैं। धर्म अब नाम मात्र की नैतिकता, सदाचार बचा हैं। धर्म की आड़ में सबसे ज्यादा अधार्मिक कृत्य किए जा रहें हैं। निर्दोष लोगों की मॉबलिचिंग, बलात्कार एवं हिंसा को धर्म के आधार पर न्याया संगत करार दिया जा रहा है। देशों के अन्दर सत्ताधारी राजनीतिक पार्टियां,जनता, विपक्षी नेताओं और प्रजातांत्रिक संस्थाओ पर दड़ात्मक कृत्य करके अपने आपको हमेशा सत्ता में बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जो देश विश्व में लोकतंत्र के नाम से पहचाने जाते हैं उनमें सत्ताधारी दल के लीडर हिटलर बनने की कोशिश कर रहे हैं। लोकतंत्र और जनता के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश चल रही है। जनता को मात्र निर्देश मानने वाली भीड़ मे बदलने की कोशिश की जा रही है। यदि कोई जनता के बीच संविधान एवं कानून की आवाज उठाता है। तो उसको झूठे मुकदमे और आरोपों में फंसा कर बर्बाद कर दिया जाता है। यही सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है। अमेरिका करीब 100 वर्ष से विश्व पर अघोषित राज्य कर रहा हैं। अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देने वाले देश समय-समय पर बर्बाद कर दिए गए। जनसंख्या की दृष्टि से विश्व के सबसे बड़े देश भारत के प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वर्ष कई बार बेइज्जत किया है। लेकिन अमेरिका की आर्थिक सैन्य ताकत के सामने भारत बेबस दिखाई देता है। अमेरिका को चुनौती देने वाले रूस को युद्ध में ऐसे फसाया है जो युद्ध से बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले पा रहा है। उससे पहले इराक, लीबिया, सीरिया, मिस्र, अफगानिस्तान को पहले ही बर्बाद कर दिया गया है। अब ईरान ने हिम्मत दिखाने की कोशिश की तो अमेरिका के प्रोक्सी इजराइल और अमेरिका ने मिलकर आक्रमण कर दिया। ईरान अब आपने अस्तित्व कि लड़ाई लड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थाएं जैसा सयुक्तराष्ट्र संघ, सुरक्षा परिषद, स्वास्थ्य संस्थाएं, वित्तीय संस्थाएं सब अमेरिका के इशारे एवं उसके हितों के लिए काम करती हैं। यही कारण है कोई भी देश अमेरिका के विरोध की हिम्मत नहीं करता है। कुछ देश रूस, चीन, उत्तरी कोरिया एवं ईरान अमेरिका के विरोध में खड़े होकर चुनौंती दे रहे हैं। इन देशों के शासक भी अपने देश की जनता, प्रजातांत्रिक संस्थाओं एवं मानवाधिकारों को उलंघन करके दमन कर रहे है। फिर भी प्रकृति का नियम है, युद्ध होना बदलाव की निशानी है। इसलिए बुराई के बाद भलाई की संभावना बनती है। विश्व में हिटलर बनने की होड़ मची हुई है। बड़े-बड़े युद्धों से ही बुरे लोगों का अंत हुआ है और अच्छे और इंसाफ़ पसंद लोगों का उदय हुआ है ।

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