देश की जनता से सच क्यों छिपाया जा रहा है?
भारत पाकिस्तान में चार दिन की युद्ध झड़पें हुई और भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हालत पतली करके छोड् दी। हालांकि युद्ध में नुकसान दोनों तरफ का हुआ है। लेकिन फिर भी देश का बच्चा-बच्चा सेना के शौर्य, साहस एवं बहादुरी की अच्छी तरह समझता है। लेकिन यह भी सही है कि देश की जनता उस चार दिनी युद्ध में हुए घटनाक्रम के बारे में जानना चाहती है। भारत के सीडीएस अनिल चौहान ने एक पत्रकार के जबाब में कहा कि सवाल यह महत्वपूर्ण नही है कि भारत के 6 फाइटर नष्ट हुए ! बल्कि उसके बाद भारतीय सेना ने सटीक निशाने लगाए और दुश्मन देश को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। विपक्षी नेता और मीडिया के कुछ लोग आरोप लगा रहें है कि भारत के 6 फाइटर विमान जिनमें 4 राकेल विमान थे। युद्ध में दुश्मन की सीमा में मार गिराये गए। जबकि देश के प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने एक बार भी लड़ाकू विमानों के नष्ट होने की बातें स्वीकार नहीं की है। अब जब सीडीएस की स्वारोक्ति के बाद देश में विपक्षी पार्टी के नेताओं, पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाएंगे कि सच को क्यों छिपाया जा रहा है। साथ में यह भी आरोप लगना तय है कि राफेल खरीद में घोटाला हुआ था। राफेल फाईटर विमानों का सौदा मोदी के कार्यकाल मैं सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जाता है। एक छोटे से युद्ध में चार राफेल गिर जाना या गिराये जाना मामूली घटना नहीं है। पूर्ण युद्ध की स्थिति राफेल फाइटर पर कैसे भरोसा किया जा सकता है। राफेल फाइटर की घटना एक मात्र घटना नहीं है, जिसको सरकार जनता से छिपा रही है। सरकार ने 2011 में हुई जनगणना में जातियों और समुदाओं की प्रतिशत और उसकी संख्या को भी छिपा लिया। जिसकों आज तक देश की जनता नहीं जान पाई है। इसके अलावा भाजपा सरकार देश के इतिहास को बदलकर इतिहास की सच्चाईयों को छिपाना चाहती है कि जिन लोगों ने कभी एक भी युद्ध नही जीता उनको महापुरूष और बहादुर बताया जा रहा है। ऐसे झूठ और तथ्यों तोडमरोड़कर पढ़ाया जाएगा, उनको पढ़ने वाले युवा बहादुर साहसी और कुशल व्यक्ति के कैसे धनी बन सकेंगे? झूठ और गलत तथ्य पढ़ाकर युवा पीढ़ी को भ्रमित क्यों किया जा रहा है? जबकि सभी जानते है कि सच्चाई पर चलकर, सच्चा इतिहास पढ़कर आगे बढ़ा जा सकता हैं और भविष्य का मजबूत समाज एवं देश बनाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान में ऐसा लगने लगा है कि देश की जनता से बहुत कुछ छिपाया जा रहा है। देश को मजबूत बनाने वाली प्रजातांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सरकार से सवाल जबाव करने वाले पत्रकारो, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आरटीआई एक्टिविस्टों को जेलों में डाला जा रहा है। जातियों और समुदायों के बीच नफरत के बीज बोए जा रहे है। देश को गृह युद्ध की स्थिति में पहुंचाने की कोशिश की जा रही। ऐसी स्थिति में किसी भी दुश्मन देश से युद्ध कैसे जीता जा सकता है। देश की लीडरशिप अमेरिका के इशारे पर चलती दिख रही है। इसलिए समय रहते देश को बचाने, मजबूत करने के लिए देश के अन्दर नफ़रत की राजनीति को कम करना होगा और जातियों, समाजों एवं धर्मों के लोगो के बीच आपसी मुहब्बत बढ़ानी होगी। जब ही देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
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