देश के मुसलमानों पर दोहरी जिम्मेदारी है !
- देश के मुसलमानों ने साबित कर दिया है कि उनसे बड़ा वफादार कोई दूसरा नहीं हो सकता है
एम.खान
जयपुर,(रॉयल पत्रिका)। वैसे तो जब भी भारत पर संकट आया है देश के मुसलमानों ने हमेशा साबित किया है कि उनके लिए देश पहले है और देश के लिए कुर्बान होना उनकी जिम्मेदारी बनती है। देश में ऐसा कोई फील्ड नहीं है जिसमें मुसलमानों का योगदान नहीं हो। इतिहास और वर्तमान की जानकारी ली जाए तो पता चलता है कि स्वतंत्रता संग्राम, देश के पुनर्निर्माण, देश के विकास एवं देश में तकनीकी विकास में मुसलमानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पाकिस्तान से वर्तमान झड़पों से लेकर 1971 के युद्ध और 1965 के युद्ध में मुस्लिम भारतीय सैनिकों की वीरता की कहानी सब जानते हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी तो मुस्लिम महिलाओं की ही नहीं बल्कि देश की सभी महिलाओं के लिए गौरव बन गई हैं। मुसलमानों को देश के भीतर कुछ लोग आतंकी, गद्दार, पाकिस्तान को चाहने वाले और भारत विरोधी कहते मिल जाते हैं। लेकिन भारत का मुसलमान हमेशा देश के लिए मरने-मिटने वाला है और रहेगा। देश की रक्षा करना देश के प्रत्येक मुसलमान का कर्त्तव्य है। यदि देश ही नहीं रहेगा तो देश के मुसलमान कैसे सुरक्षित रहेगा। जैसे-जैसे मुसलमानों में शिक्षा की बढ़ोतरी हो रही है, मुसलमान समझने लगे हैं कि वह यहीं पैदा हुए हैं और यही मरना है। देश के मुसलमान को दोहरी जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है एक तो देश की रक्षा के लिए और दूसरी देश के अंदर अपनी स्वयं की सुरक्षा के लिए। वैसे देश, विविध संस्कृति और धर्मों का देश है और देश के ज्यादातर लोग साथ मिलजुल कर रहना चाहते हैं और देश की तरक्की के लिए सोचते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कोई भी बहाना बनाकर मुसलमानों की मस्जिदों, दरगाहों, मदरसों और मकानों पर बुलडोजर चलवा रहें हैं और मॉबलिंचिंग कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर बहुसंख्यकों के सहयोग के कारण मुस्लिम देश में सुरक्षित है। सब कुछ होने के बाद, पहले और वर्तमान में मुसलमान ने साबित कर दिया है कि देश उनके लिए सर्वोपरि है।
देश में मुसलमानों का योगदान-
वैसे तो देश की रक्षा, विकास, राजनीति एवं तकनीकी विकास में मुसलमान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है जिनमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं-
रक्षा
कर्नल सोफिया कुरैशी- कर्नल सोफिया कुरैशी ने सेना में लैंगिक समानता और नेतृत्व के नए मानक स्थापित किए हैं। देश और भारतीय महिलाओं के लिए गौरव है।
परमवीर चक्र, हवलदार अब्दुल हमीद- परमवीर चक्र विजेता हवलदार अब्दुल हमीद ने 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान के करीब आधा दर्जन पैटन टैंकों को अकेले ही नष्ट करके दुश्मन देश के छक्के छुड़ा दिए थे। मरणोपरांत भारत सरकार ने उन्हे परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
महावीर चक्र ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान- ब्रिगेडियर उस्मान जिन्हें नौशेरा का शेर कहा जाता है। 1947-48 के भारत पाक-युद्ध में अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ भारतीय सेना का नेतृत्व किया। उनकी रणनीति और साहस ने नौशेरा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3 जुलाई 1948 में नौशेरा में शहीद होने से पहले उन्होंने दुश्मनों को पीछे धकेल दिया। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन –
लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रहे हैं। उन्होंने जम्मू- कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह अपनी रणनीतिक सोच और सामुदायिक जुड़ाव नीतियों के लिए जाने जाते हैं। जिससे कश्मीर में शांति स्थापना में मदद की। उन्होंने सेवा में विभिन्न रेजिमेंट में मुस्लिम सैनिकों की वीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सेवा में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।
मेजर अब्दुल रफी खान –
1971 के भारत-पाक युद्ध में मेजर अब्दुल रफी खान ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूर्वी -मोर्चे पर दुश्मनों के ठिकानों पर हमला करने में अपनी यूनिट का नेतृत्व किया। उनकी वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया ।
राजनीति और प्रशासन:
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002-2007) और प्रख्यात वैज्ञानिक, जिन्हें “मिसाइल मैन” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मौलाना अबुल कलाम आजाद: स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री, जिन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी:
डॉ. सलीम अली: विश्व प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी, जिन्हें “भारत का बर्डमैन” कहा जाता है। उनकी पुस्तक “The Book of Indian Birds” पक्षी विज्ञान में मील का पत्थर है।
प्रो. अहमद जकी: जैव रसायन और आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य किया।
कला और संस्कृति:
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान: शहनाई वादक, जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
मोहम्मद रफी: प्रसिद्ध पार्श्व गायक, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में हजारों गीत गाए और कई पुरस्कार जीते।
ए.आर. रहमान: ऑस्कर विजेता संगीतकार, जिन्होंने भारतीय और वैश्विक सिनेमा में अपनी छाप छोड़ी।
साहित्य:
सआदत हसन मंटो: उर्दू साहित्य के महान लेखक, जिनकी कहानियाँ सामाजिक यथार्थ को दर्शाती हैं।
इस्मत चुगताई: प्रगतिशील लेखिका, जिन्होंने महिलाओं के मुद्दों पर सशक्त लेखन किया।
खेल:
मोहम्मद अजहरुद्दीन: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान, जिन्होंने कई ऐतिहासिक जीत दिलाई।
सानिया मिर्जा: टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला, जिन्होंने कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीते।
शिक्षा और सामाजिक सुधार:
सैयद अहमद खान: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक, जिन्होंने मुस्लिम समुदाय में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया।
हामिद दलवई: सामाजिक सुधारक, जिन्होंने धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समानता के लिए काम किया।
उद्योग और व्यापार:
अज़ीम प्रेमजी: विप्रो के संस्थापक, जिन्होंने भारत को आईटी क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई। वे परोपकारी कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
सिनेमा और मनोरंजन:
शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान: बॉलीवुड के सुपरस्टार, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
जावेद अख्तर: प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक, जिन्हें पद्म भूषण और कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
ये केवल कुछ उदाहरण हैं। मुस्लिम समुदाय ने स्वतंत्र भारत में हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत से देश के विकास में योगदान दिया है। यदि आप किसी विशिष्ट क्षेत्र या व्यक्ति के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएँ।
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