जयपुर में मुफ़्त इंग्लिश सिखा रहे ‘अनीस सर’
- अब तक 3500 से ज़्यादा स्टूडेंट्स को सिखा चुके अंग्रेज़ी, नई पीढ़ी को बना रहे आत्मनिर्भर
जयपुर, (रॉयल पत्रिका) । जयपुर की तंग गलियों में स्थित एक पुरानी हवेली के कमरे से शुरू हुई एक सोच ने आज हज़ारों युवाओं के जीवन की दिशा बदल दी है। हम बात कर रहे हैं 41 वर्षीय मुहम्मद अनीस खान की, जिन्हें छात्र प्यार से “अनीस सर” कहकर बुलाते हैं। अंग्रेज़ी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट अनीस सर ने 2019 में जयपुर में मुफ्त स्पोकन इंग्लिश क्लासेस की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य था, आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के युवाओं को भाषा और पर्सनालिटी डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना। “लर्न इंग्लिश” नामक एक पुस्तक भी उनके द्वारा लिखी गई थी, जिसे 2019 में प्रकाशित किया गया था।
कमज़ोर इंग्लिश नहीं बनेगी रुकावट 
अनीस सर बताते हैं, “मैंने देखा कि कई पढ़े-लिखे युवा सिर्फ इसलिए अच्छी नौकरी नहीं पा पाते क्योंकि उनकी अंग्रेज़ी कमज़ोर होती है।” इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह पहल शुरू की। उनका कहना है कि इंग्लिश कोचिंग क्लास चलाना इतना खर्चीला नहीं होता, और एक शिक्षक 50 तक विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है। इसलिए इसे मुफ्त चलाना संभव है, बस लगन और नियत होनी चाहिए। फिलहाल जयपुर में उनके दो सेंटर हैं: पहला सेंटर एम.डी. रोड स्थित नाना जी की हवेली में और दूसरा जालूपुरा के मुकुंदगढ़ हाउस में। ये कोर्स मुस्लिम मुसाफिर खाना कमेटी और मंसूरी पंचायत समिति के सहयोग से चलाया जाता है। नाना जी की हवेली सेंटर पर दो टाइम क्लास होती है: सुबह 9 से 10 और शाम को 4 से 5 बजे तक। दोनों सेंटर मिलाकर फिलहाल करीब 150 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों केंद्रों में मिलाकर करीब 150 छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। नानाजी की हवेली वाले सेंटर से अब तक लगभग 2600 छात्र निकल चुके हैं, जबकि जालूपुरा सेंटर से करीब 1200 छात्र। 2019 से अब तक दोनों सेंटरों से कुल मि
लाकर करीब 3,700 स्टूडेंट्स इंग्लिश सीख चुके हैं। इनमें से कई स्टूडेंट्स मल्टीनेशनल कंपनियों, मेडिकल फील्ड और सरकारी सेवाओं में अपनी जगह बना चुके हैं।अनीस सर का मानना है कि आज के दौर में इंग्लिश सीखना बेहद ज़रूरी हो गया है। हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में 40 प्रतिशत शब्द अंग्रेज़ी के हो गए हैं। मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में बने रहने के लिए अंग्रेज़ी आनी ही चाहिए। इस कोचिंग सेंटर की सबसे खास बात यह है कि यहां दीनी माहौल को भी अहमियत दी जाती है। “हम कोशिश करते हैं कि बच्चे दीन और दुनिया दोनों में बैलेंस बनाकर चलें।” जिन्हें अनीस सर की क्लास से लाभ हुआ, वे अब विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। जयपुर के ही छात्र मोहम्मद आजम कहते हैं, “मैं आज लैब टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहा हूँ। इसकी शुरुआत अनीस सर की क्लास से ही हुई।” वहीं मोहम्मद उमर बताते हैं कि उन्हें राजस्थान पुलिस में चयन होने का आत्मविश्वास वहीं से आया। फरहा नाज़ का कहना है कि जयपुर राजघराने के द पैलेस स्कूल में पढ़ाने का सपना, अनीस सर की क्लास से साकार हुआ।
17 सालों का अनुभव, एक जुनून
अनीस सर अब जयपुर के अन्य इलाकों जैसे शास्त्री नगर और करबला क्षेत्रों में भी नए सेंटर खोलने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा वह आरएएस, आईएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग शुरू करने की भी योजना में हैं। सेंटर में हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे मौके पर शानदार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें बच्चों को नगद इनाम और मोमेंटो भी दिए जाते हैं। हाल ही में रमज़ान से जुड़ी एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी, जिसे फर्स्ट इंडिया न्यूज़ ने लाइव दिखाया था। अनीस सर बताते हैं कि उनकी यात्रा 2006 में शुरू हुई थी जब उन्होंने खुद इंग्लिश सीखना शुरू किया। अब वे “एलीट इंस्टीट्यूट”, गणगौरी बाजार में भी पढ़ा रहे हैं। इस पहल का एकमात्र उद्देश्य समाज को सशक्त बनाना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
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