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वक़्फ़ संशोधित बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम के चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी के बाद आप विधायक अमानतुल्लाह खान वक़्फ़ संशोधित बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि देशभर में दर्जनों मुस्लिम धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएं वक़्फ़ संशोधित बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती हैं। केंद्र की एनडीए सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड मैनेजमेंट में सुधार करने एवं मुसलमानो के विकास के लिए संसद में वक़्फ़ संशोधित बिल पास करवाया है। विपक्षी दलों के ज्यादातर सांसदों और मुस्लिम संगठनों ने वक़्फ़ संशोधित बिल का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। मुस्लिम संगठन सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस बिल का विरोध कर रहे हैं। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि मोदी सरकार की ओर से लाया गया यह बिल वक़्फ़ बोर्ड को बर्बाद करने के लिए लाया गया है। नए वक़्फ़ संशोधित बिल में वक़्फ़ कमेटियों और वक़्फ़ बोर्ड मैनेजमेंट में गैर मुस्लिम को सदस्य बनाना संवैधानिक नहीं है, क्योंकि वक़्फ़ बोर्ड एक मुस्लिम धार्मिक संस्था है और यहां गैर मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए। जिस प्रकार राम मंदिर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम या गैर हिंदू सदस्य नहीं हो सकता है। दूसरा वक़्फ़ जमीनें वक़्फ़ की है या नहीं? इसका निर्णय अब कलेक्टर भी कर सकता है। मोदी सरकार मुसलमानो से संबंधित अब तक तीन विधेयक संसद में पारित कर चुकी है। जिनमें मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक का विधेयक दूसरा सीएए एवं एनआरसी का विधेयक और तीसरा वक़्फ़ अमेंडमेंट विधेयक। ऐसा लगने लगा है कि मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद मुसलमानो को कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण मानने लगी है, इसलिए मुस्लिम समाज के सुधार की मोदी सरकार को बहुत चिंता है। लेकिन मोदी सरकार जिस समुदाय के ऊपर राजनीति कर रही है और सत्ता में भी हिंदू समुदाय के समर्थन से ही आती है,  उसके लिए कोई विशेष कानून नहीं बनाए हैं। हिंदुओं में जातिवाद, दहेज प्रथा, असमान आरक्षण, आर्थिक असमानता एवं विभिन्न सामाजिक कुरीतियां पर कोई कानून नहीं बनाया है। ऐसा लगने लगा है कि जैसे कांग्रेस ने 60 वर्षों तक अल्पसंख्यकों का शोषण किया और सत्ता के मजे लिए। इस तरह भाजपा हिंदुओं का तुष्टिकरण कर रही है और सत्ता के मजे ले रही है। देश की ज्यादातर पार्टिया सांप्रदायिकता की राजनीति कर रही हैं। सरकार देश के समान और सबके विकास की बात से पीछे हट रही है, जबकि देश में भ्रष्टाचार, युवाओं में बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, किसानों, मजदूरों एवं महिलाओं की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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