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जयपुर सहित देश में 12 राज्यों में एसडीपीआई के कार्यालयों में ईडी की सर्च कार्यवाही  

Jaipur

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  • एसडीपीआई के पदाधिकारीयों से की पूछताछ
  • एसडीपीआई कार्यालय पर कार्यवाही का स्थानीय लोगों ने किया विरोध

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। ईडी ने गुरुवार को एसडीपीआई के आदर्श नगर स्थित प्रदेश कार्यालय पर सर्च कार्यवाही की। जैसे ईडी के अधिकारी एसडीपीआई कार्यालय पहुंचे तो वहां स्थानीय लोगों ने ईडी की कार्यवाही की सूचना तेजी से फैल गई। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में एसडीपीआई कार्यालय पहुंच गए और ईडी की कार्यवाही का विरोध किया। एसडीपीआई कार्यकर्ताओ और स्थानीय लोगों ने ईडी की कार्यवाही को पक्षपात पूर्ण एवं गैर कानूनी बताया और अल्पसंख्यकों की आवाज दबाने का आरोप लगाकर विरोध शुरू कर दिया। विरोध बढ़ता देख ईडी अधिकारियों ने पुलिस प्रशासन को सूचित किया। सूचना पर आसपास के थानों की पुलिस घटना स्थल पर पहुंची और स्थानीय लोगों को समझाकर शांत किया। ईडी के अधिकारियों ने कार्यालय में एसडीपीआई के प्रदेशाध्यक्ष अशफाक अहमद एवं उपाध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन से पूछताछ की और कार्यालय में कागजों की जांच की। कुछ कागज ईडी अपने साथ ले गई गई। जानकारी मिली है की ईडी ने देशभर के 12 राज्यों में एसडीपीआई के कार्योंलयों पर सर्च कार्यवाही की है। कुछ दिन पहले ईडी ने एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम के फ़ैजी को गिरफ्तार किया था। एम के फैज़ी एसडीपीआई के 2018 से राष्ट्रीय अध्यक्ष है।

ईडी की यह कार्यवाही पहली बार नहीं है-

ईडी एवं अन्य केंद्रीय एजेंसियां एसडीपीआई और एसडीपीआई के पैतृक संगठन पॉपुलर फ्रंट के कार्योंलयों पर पहले भी कार्यवाही कर चुकी है। यह कार्यवाही भाजपा के सत्ता में आने के बाद और तेज हो गई। पॉपुलर फ्रन्ट और एसडीपीआई के नेताओं को विभिन्न आरोपों में जेल भेजा जा चुका है। लेकिन अदालत से आज तक उन पर कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका है। कुछ कोर्ट के आदेश के बाद जेलों से बाहर आ गए। मुस्लिम समाज में यह धारणा अब घर करने लगी है कि पूछताछ और सर्च के नाम पर केंद्रीय एवं राज्य की एजेंसियां कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। जब तक न्यायालय से निर्णय आएगा या न्याय मिलेगा गिरफ्तार लोगों की जिंदगीया बर्बाद हो चुकी होती है। इसी तरह एसडीपीआई और पॉपुलर फंट का मुस्लिम समाज में कोई भी गैर कानूनी काम समाज की नजर में नहीं आया है। यह संगठन मुसलमानों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं राजनीतिक जागरूकता पर ध्यान देते हैं। राजस्थान एसडीपीआई के नेताओं को सभी जानते हैं कि वे भले लोग हैं लेकिन समाज एवं दबे कुचले लोगों की आवाज निडरता से उठाते हैं। फिर भी उनको परेशान किया जा रहा है, जो सही नहीं कहा जा सकता है।

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