मुस्लिम समुदाय में महंगी शादियां शिक्षा में गिरावट का मुख्य कारण
हैसियत से ज्यादा दहेज का चलन लोगों को कर्जदार बना रहा है
जबकि इस्लाम के अनुसार निकाह/शादी में दहेज लेन देन का कोई प्रावधान नहीं है।
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। मुस्लिम समुदाय में शिक्षा का स्तर काफी नीचे है। उच्च स्तर की शिक्षा तो मुस्लिम समुदाय में नहीं के बराबर है। मुस्लिम समुदाय को गैर जरूरी परंपराओं या कुरीतियों ने एक तरीके से जकड़ सा लिया है। ज्यादातर अल्लाह के बताऐ रास्ते को छोड़कर दिखावे की जिंदगी में यकीन रख रहे हैं। अमीर लोग, नेता के अलावा गरीब एवं भिखारी लोग भी शादियों में दहेज लेने देने की बात करते हैं। शादियों में हैसियत से ज्यादा दहेज का लेन-देन ज्यादातर गरीब एवं माध्यम वर्ग के परिवारों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ रहा है उन्हें कर्जदार बना रहा है। अमीर मुस्लिम परिवारों पर तो दहेज प्रथा का कोई ज्यादा असर नहीं पड़ता है, क्योंकि उनकी आमदनी काफी ज्यादा होती है। लेकिन इन अमीर लोगों की देखा देखी गरीब और मध्यम वर्ग के लोग दिखावें के लिए शादियों में हैसियत से ज्यादा खर्च करते हैं, बड़े-बड़े मैरिज गार्डन, हजारों लोगों की दावत/खाना एवं दहेज में महंगी गाड़ियां एवं दूसरी वस्तुएं देते हैं। राजस्थान के एक क्षेत्र में तो मुस्लिम परिवार अपनी खेती की जमीन बेच कर 15-20 लाख की गाड़ी अपनी लड़की के दहेज में देते हैं। यही कारण है कि मुस्लिम समुदाय के ज्यादातर लोग कर्ज लेकर महंगी शादी कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय में समाज सुधारकों की कमी है। मस्जिदों के इमाम, मौलवी ऐसे मामलो में हस्तक्षेप ज्यादा करते नहीं हैं। समुदाय के राजनीतिज्ञ, विधायक आदि स्वयं दिखावे की जिंदगी जी रहे हैं। उनको मुस्लिम आवाम सिर्फ चुनाव के समय याद आता है।
महंगे दहेज का चलन, शिक्षा में रुकावट
शादियों में महंगे दहेज के चलन के चलते बड़ी संख्या में लोग कर्जदार हो रहे हैं। कर्ज चुकाने के कारण परिवारों को अपने दूसरे छोटे बच्चों को पढ़ाने में दिक्कते आ रही है। कर्ज के कारण मुस्लिम परिवार बच्चों को पढाने की जगह मजदूरी करके कमाने की ओर धकेल रहे हैं। परिवार के पास दहेज के लिए कर्ज की ब्याज चुकाने के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा बचता ही नहीं है। मुस्लिम समुदाय का बच्चा-बच्चा जानता है की शादी में दहेज का लेना देना गुनाह है फिर भी यह सब हो रहा है। क्योंकि आसान और शरीयत से निकाह करने की जगह झूठी एवं दिखावे की इज्जत का चलन चल रहा है। यही कारण है कि मुस्लिम परिवारों की आर्थिक स्थिति दिनों दिन बिगड़ रही है और कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण समाज में शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ पा रहा है। मुस्लिम समाज के लोगों को अल्लाह के डर से ज्यादा समाज के लोगों का डर दिखाई दे रहा है। इसलिए एक गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर लड़की वाले का परिवार करता हुआ आसानी से मिल जाता है कि यदि हमने दहेज नहीं दिया तो समाज के लोग क्या कहेंगे। कई बार समाज में झूठी इज्जत के चलते लड़की के मां-बाप लड़के के परिवार को भी दहेज लेने पर विवश कर देते हैं और कई गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी नहीं हो पाती है।
समाज में हुए कुछ आसान निकाहों से सबक सीख सकता है मुस्लिम समुदाय –
पिछले दिनों जयपुर में बड़े कारोबारी छूट्टन कुरैशी की बेटी और जमीयतुल कुरैश राजस्थान के अध्यक्ष नईमुद्दीन कुरैशी के बेटे का निकाह हुआ। दोनों परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद खजूर और शरबत पर निकाह हुआ। शादी में कोई दहेज, मैरिज गार्डन एवं खाने की व्यवस्था नहीं की गई। निकाह शरियत के अनुसार मस्जिद में संपन्न करवाया गया। इसके चार दिन बाद जयपुर में ही सबक लेते हुए एक कुरेशी परिवार में भी बिना दहेज के आसान निकाह किया गया। इसी तरह बारां में स्टेट हज कमेटी के पूर्व सदस्य एवं भाजपा नेता के बेटे मोहम्मद इलफाम मोनू का निकाह मस्जिद के इमाम मोहम्मद असलम के बेटी जिया के साथ शरियत के साथ किया गया। निकाह मस्जिद में किया गया। शादी में कोई दहेज, खाने और दिखावा नहीं किया गया।
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