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RBI Repo Rate Unchanged Aug 2026 : RBI का रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला, जानिए आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

RBI Repo Rate Unchanged Aug 2026 : RBI का रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला, जानिए आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

RBI Repo Rate Unchanged Aug 2026 : नई दिल्ली। अगर आप घर खरीदने, गाड़ी लेने या किसी अन्य जरूरत के लिए सस्ते लोन का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल राहत मिलने वाली नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) 5.25% पर ही बरकरार रखी है। इसका मतलब है कि बैंकों के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में अभी कोई बड़ी कमी आने की संभावना नहीं है। इसके साथ ही जिन लोगों का पहले से लोन चल रहा है, उनकी EMI भी फिलहाल कम नहीं होगी। RBI ने यह फैसला महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए लिया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा करते हुए लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। विशेषज्ञों और बाजार की उम्मीद भी यही थी कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। आरबीआई का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करना उचित नहीं है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ (Neutral) रखा है।

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश में घरेलू मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को अच्छा समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में आर्थिक प्रदर्शन रिजर्व बैंक के अनुमान से भी बेहतर रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

क्या होता है रेपो रेट

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के बैंकों को अल्पकाल के लिए पैसा उधार देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है, जिससे होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। वहीं रेपो रेट घटने पर कर्ज सस्ता होने की संभावना रहती है। इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से फिलहाल होम लोन, वाहन ऋण और अन्य बैंक लोन की ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

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किन चुनौतियों का सामना कर रही है अर्थव्यवस्था?

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि देश का सेवा क्षेत्र लगातार मजबूत बना हुआ है, जिससे शहरी क्षेत्रों में उपभोग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने कई वैश्विक जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अल-नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियां भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया का संघर्ष महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को प्रभावित कर रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ रहा है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने माना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि केंद्रीय बैंक का मानना है कि महंगाई तीसरी तिमाही में उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगेगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिलहाल महंगाई मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों की वजह से बढ़ रही है। इसका असर अभी व्यापक स्तर पर नहीं देखा जा रहा है।

जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाया

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा है। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण रहने की उम्मीद है।

बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी

आरबीआई गवर्नर के अनुसार जून महीने से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता (Liquidity) एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। इसका मतलब है कि बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और वे जरूरत के अनुसार लोगों तथा उद्योगों को ऋण देने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि देश में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है और इसका लाभ उद्योगों, कारोबार तथा उपभोक्ताओं को मिलेगा।

रुपए पर क्यों बढ़ रहा दबाव?

हाल के महीनों में भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। आरबीआई के अनुसार इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की महंगी कीमतें, विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी की निकासी, बढ़ता व्यापार घाटा और अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो इसका असर भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।

इस साल कितना कमजोर हुआ रुपया ?

साल 2026 में अब तक भारतीय रुपया लगभग 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। वहीं फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े तनाव बढ़ने के बाद से रुपया करीब 6 प्रतिशत और गिरा है। हालांकि आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा बाजार पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी कर सकता है ताकि रुपए में अत्यधिक उतार-चढ़ाव न हो।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

रेपो रेट स्थिर रहने से फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि यदि कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं तो महंगाई का असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, मजबूत आर्थिक वृद्धि, पर्याप्त बैंकिंग तरलता और बेहतर जीडीपी अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और महंगाई की स्थिति के आधार पर आरबीआई अपनी अगली मौद्रिक नीति में नए फैसले ले सकता है।

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