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नए शिक्षा मंत्री पर विपक्ष के आरोपों से गरमाई लोकसभा, कांग्रेस सांसद के सवालों पर सत्ता पक्ष ने किया जोरदार हंगामा

नए शिक्षा मंत्री पर विपक्ष के आरोपों से गरमाई लोकसभा, कांग्रेस सांसद के सवालों पर सत्ता पक्ष ने किया जोरदार हंगामा

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नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का आज सातवां दिन है। लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा हो रही है। विधेयक में 2024 में बने कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा इससे पेपर लीक रोकने में मदद मिलेगी।

लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन आज जिस संशोधन पर चर्चा कर रहा है, वह उसी कानून में बदलाव है जिसे वर्ष 2024 में पारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि कानून बनने के बाद भी अब तक पेपर लीक के किसी आरोपी को सजा नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से छात्रों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं, लेकिन पेपर लीक के आरोपियों की पहचान सामने नहीं लाई जा रही। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदलने चाहिए, क्योंकि केवल नई समितियां बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने राधाकृष्णन समिति का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया, जिनका शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।

प्रियंका बोलीं, पैलेट गन चलाने के लिए किसने आदेश दिया

प्रियंका गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई करने के मामले में जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले हम राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए थे। पुलिस लाठी चार्ज में घायल हुई छात्रा का हाल जानने। मैं सरकार से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी लड़कियों पर दमन करने की। क्या जरूरत थी उनपर पैलेट गन चलाने की। उनपर एक-47 चलाने की। क्या वे आतंकवादी थे? जवाब दीजिए। छात्र तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थें। उन्होंने आगे कहा कि सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है। अभी तक एक भी माफिया को सजा नहीं हुई। शिक्षातंत्र में आरएसएस प्रचारकों को भर लिया गया।

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प्रियंका ने पूछा सवाल, कहा-कौन जवाब देगा

प्रियंका ने कहा, ‘कांग्रेस बोल रही है, जवाब मांग रही है, जवाब दीजिए, कौन जवाब देगा। गृहमंत्री जवाब देंगे। किसने ऑर्डर दिया पैलेट गन चलाने के लिए। मैं पूछती हूं किसने ऑर्डर दिया। प्रधानमंत्री ने दिया, गृह मंत्री ने दिया, जवाब देंगे। पूरा देश पूछ रहा है। देश के माता-पिता पूछ रहे हैं। छात्र पूछ रहे हैं। और आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप इसका जवाब दें। क्यों डरते हैं आप इस देश के नौजवानों से। इस देश की बुलंद आवाज से और उस आवाज दको दबाने का हक आपको किसने दिया है।’

प्रियंका का प्रह्लाद जोशी पर कमेंट, लोकसभा में हंगामा

प्रियंका गांधी ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान का संसद में स्वागत किया गया। नए शिक्षा मंत्री को चुना गया। एक ऐसे व्यक्ति को ऐसे पद पर बैठाया जिसने गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की। इसके बाद सत्ता पक्ष ने हंगामा किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने रोकने की कोशिश की। प्रियंका के इस बयान पर भाजपा सांसद माफी की मांग करने लगे। इस पर प्रियंका ने कहा- प्रह्लाद जोशी ने बिलकिस बानो के बारे में जो कहा, उसके सबूत दे दूंगी। सत्ता पक्ष ने कहा कि प्रियंका आरोप लगाए जा रही हैं। रिजिजू ने कहा- प्रियंका ने शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की वह चरित्र हनन है। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें। वह सीनियर लीडर हैं उन्हें जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए।

अखिलेश बोले- जो चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे

इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार वचन नहीं जुमले देती है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों के प्रदर्शन के दौरान नारा लगा कि सरकार झुकती है, झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने कहा, युवाओं को झुकाना आता है। करोड़ों युवाओं की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। धर्मेंद्र प्रधान अब मंत्री नहीं है। जब वे सदन लौटे हैं तो उनका स्वागत हुआ। हमें स्वागत से समस्या नहीं है।

‘पहला आंदोलन, जिसमें मां-बाप ने बच्चों को भेजा’

अखिलेश यादव ने कहा- मजाक मजाक में बनी कॉकरोच जनता पार्टी, कितनी बड़ी पार्टी बन गई। मजाक में शुरू हुई पार्टी कितनी गंभीर हो गई। इससे सरकार लोकतांत्रिक हो गई। उन्होंने कहा, सरकार लोकतांत्रिक थी कि उन्हें धरने पर बैठने दिया। नहीं तो सालों साल तक किसान धरने पर बैठे रहे, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सरकार को लगा कि चुनाव आ गया तो उन्होंने तीन काले कानून वापस ले लिए। उन्होंने कहा, ‘पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो। अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं। जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे। भगवान के दरबार से दान गायब हो गया। उन्होंने कहा, लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। 20 परीक्षाएं लीक हो गईं। कोर्ट जाना पड़ा, इसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं।

‘जो चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे’

अखिलेश यादव ने कहा, ‘पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो। अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं। जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे। भगवान के दरबार से दान गायब हो गया। उन्होंने कहा, लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। 20 परीक्षाएं लीक हो गईं। कोर्ट जाना पड़ा, इसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं।

केंद्रीय मंत्री बोले- कानून को मजबूत करने की जरूरत

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा- हालिया घटनाक्रम को देखते हुए हमने फैसला लिया कि हमें 2024 के कानून को ही और मजबूत करने की जरूरत है। 1992, 2010 में परीक्षा सुधार के लिए सिफारिश की गई थी। कांग्रेस, यूपीए सरकार ने सिफारिश नहीं मानी। NTA का प्रस्ताव यूपीए राज्य में आया। यह विधेयक 2024 के पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। यह कानून भी हमारी सरकार लेकर आई थी और आजादी के बाद इस तरह का पहला कानून था। यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दोहराता है कि भारत के बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं।

कांग्रेस नेता बोले, 2024 में कानून लाने के बावजूद पेपर लीक हुए

इससे पहले कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा, ‘आज की तरफ तब भी सरकार ये बिल लेकर आई थी और कहा था कि ये एतिहासिक कदम है और अब पेपर लीक नहीं होगा। 2026 के नीट पेपर लीक में जो तहकीकात हुई। मैं उसकी स्थिति जानना चाहता हूं, ताकि पता चले कि सरकार दो साल पहले जो भ्रष्टाचार हुई उसको लेकर कितनी गंभीर है। 2024 के 45 आरोपियों में 44 को बेल मिल चुकी है। जिसको मास्टरमाइंड कहा गया, 11 महीने तक वह फरार था। 2025 में गिरफ्तार हुआ। फिर उस मामले में उसे बेल मिल गई। उन्होंने कहा- कानून उस समय भी विफल था। आज जिस मंशा से सरकार ये ला रही है, आज भी यह फेल होगा। 2024 में कानून लाने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक हुआ। अफसोस की बात है कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। तब उन्होंने कहा था- कहां हुआ पेपर लीक, नहीं हुआ पेपर ली। इस बार भी उनका यही रवैया था। 21 बच्चों ने आत्महत्या कर दी। कल इस्तीफे के बाद प्रधान जब संसद में आए तो आपने उनको ऐसे माला पहनाई जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़ कर आए हों।

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