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अमेरिका ने 11वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए, सैन्य ठिकानों, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी को बनाया निशाना

अमेरिका ने 11वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए, सैन्य ठिकानों, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी को बनाया निशाना

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वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी ने लगातार 11वीं रात ईरान पर हमले किए। अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के 5 शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल हमले किए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका जल्द ही पिकैक्स माउंटेन के पास के इलाके को निशाना बनाएगा जो ईरान के मुख्य परमाणु संवर्धन संयंत्रों के पास एक भूमिगत किला है। इसके जवाब में ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका परमाणु या संवेदनशील ठिकानों पर हमला करता है तो इसे पूरे क्षेत्र में युद्ध का विस्तार माना जाएगा और अमेरिका व उसके सहयोगियों के सभी हितों को निशाना बनाया जाएगा। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया है कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है।

होर्मुज में जहाजों पर हमले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बातचीत और जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो चुकी है। अमेरिकी हमलों के बावजूद जलमार्ग पर ईरान का नियंत्रण कमजोर नहीं हुआ है, जहां से दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। मंगलवार को ईरान ने इस जलमार्ग में एक टैंकर पर हमला किया, जिससे उसके चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। इस कारण बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट के सायरन बजने लगे।

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 92 डॉलर के पार

इस भीषण संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि अमरीका में पेट्रोल 4 डॉलर प्रति गैलन हो गया है। आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ये युद्ध अमेरिकी जनता में अलोकप्रिय हो रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान युद्ध में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से ज्यादा हो गई है जो पेंटागन के आधिकारिक आंकड़े 482 से काफी ज्यादा है।

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ईरान जंग को अमेरिकियों का समर्थन नहीं

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ईरान के खिलाफ शुरू किया गया सैन्य अभियान अब अमेरिका के सबसे अलोकप्रिय युद्धों में गिना जाने लगा है। कई सर्वे बताते हैं कि इस युद्ध को लेकर लोगों का समर्थन इराक, अफगानिस्तान और वियतनाम युद्ध की तुलना में ज्यादा तेजी से घटा है। वॉशिंगटन पोस्ट-इप्सोस के सर्वे में 68 फीसदी अमेरिकियों ने कहा कि ईरान के खिलाफ यह युद्ध लड़ना जरूरी नहीं था। सिर्फ 28 फीसदी लोगों ने इसका समर्थन किया। वहीं, एक दूसरे सर्वे में 61 फीसदी लोगों ने इसे अमेरिका की गलती बताया। क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के सर्वे में 45 फीसदी मतदाताओं का कहना था कि इस युद्ध से अमेरिका पहले से कमजोर हुआ है। वहीं, 33 फीसदी लोगों का मानना है कि इससे देश मजबूत हुआ। हालांकि, सर्वे यह भी बताते हैं कि अमेरिकी लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब भी अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रम्प को सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि उससे बढ़ने वाला आर्थिक दबाव ज्यादा राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है।

पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मदद मांगी

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर (करीब 95 हजार करोड़ रुपए) की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी मांगी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को भेजे प्रस्ताव में पांच साल तक की इस वित्तीय सुविधा का अनुरोध किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का मानना है कि ईरान युद्ध को लेकर बातचीत कराने में उसकी भूमिका से अमेरिका के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं। इसी आधार पर इस्लामाबाद अब वॉशिंगटन से आर्थिक सहयोग बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, पाकिस्तानी रुपए पर दबाव कम होगा और IMF से मिलने वाली किस्तों पर उसकी निर्भरता घट सकती है।

कुवैत में बिजली बचाने की अपील

ईरान के हमलों में बिजली ढांचे को निशाना बनाए जाने के बाद कुवैत में बिजली संकट की आशंका बढ़ गई है। संभावित बिजली कटौती से बचने के लिए सरकार ने लोगों से बिजली की खपत सीमित रखने और जरूरत पड़ने पर ही बिजली इस्तेमाल करने की अपील की है। कुवैती अधिकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे में पावर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, आम लोगों द्वारा बिजली बचाने की अपील का पालन करने से फिलहाल ग्रिड पर दबाव कुछ हद तक कम हुआ है।

ईरान बोला- कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया

ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने पश्चिमी कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे कैंप दोहा पर ड्रोन हमला किया है। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, ईरानी सेना ने कहा कि हमले में सैन्य अड्डे के गोला-बारूद डिपो और ग्राउंड फोर्सेज कमांड के लॉजिस्टिक्स उपकरणों को निशाना बनाया गया। ईरानी सेना ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की बार-बार की आक्रामक कार्रवाई के जवाब में की गई है। बयान में यह भी कहा गया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं दुश्मन की किसी भी नई साजिश या सैन्य कार्रवाई का निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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