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सांसद बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात किए ‘बीमार’ पुलिसकर्मी, अमित शाह और CM से की शिकायत

सांसद बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात किए ‘बीमार’ पुलिसकर्मी, अमित शाह और CM से की शिकायत

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान में जन-प्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर से गर्मा गया है। नागौर लोकसभा सीट से अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर सांसद हनुमान बेनीवाल ने पुलिस प्रशासन पर उनकी सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। सांसद ने अपनी सुरक्षा में तैनात किए गए पुलिसकर्मियों को यह कहते हुए वापस पुलिस लाइन भेज दिया है कि वे सभी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। बेनीवाल का आरोप है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपनी हठधर्मिता और दुर्भावनापूर्ण कार्यशैली के चलते जानबूझकर बीमार जवानों को उनकी ड्यूटी पर लगा दिया। इस पूरे प्रकरण को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने इसे केवल अपनी सुरक्षा का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला बताया है।

सांसद ने खुद करवाया सुरक्षाकर्मी का इलाज

सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने पत्र में उन तीन पुलिसकर्मियों का विस्तार से जिक्र किया है जिन्हें उनकी सुरक्षा के लिए भेजा गया था, लेकिन वे खुद ही गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे थे I

कांस्टेबल सुनील विश्नोई: बेनीवाल के मुताबिक, सुनील पहले से ही न्यूरोलॉजी (तंत्रिका तंत्र) संबंधी एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। 11 जुलाई को जब वे जयपुर में थे, तब सुनील की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। सांसद खुद उन्हें देर रात जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल लेकर गए और वहां उनके समुचित उपचार की पूरी व्यवस्था करवाई।

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कांस्टेबल बलबीर गुर्जर: 15 जुलाई को जयपुर से वापस लौटते समय रास्ते में कांस्टेबल बलबीर की तबीयत अचानक गंभीर रूप से खराब हो गई। बेनीवाल ने बिना देरी किए उन्हें नागौर के अस्पताल में भर्ती करवाया और चिकित्सकों से इलाज सुनिश्चित करवाने के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए एम्स (AIIMS), जोधपुर रेफर करवाया। जांच में चिकित्सकों ने उनके पुरानी हृदय (दिल) संबंधी बीमारी से ग्रसित होने की आशंका जताई है।

कांस्टेबल सीताराम: बेनीवाल ने बताया कि आज उनकी सुरक्षा के लिए कांस्टेबल सीताराम को भेजा गया था, लेकिन वह भी स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी तरह अस्वस्थ थे। इसके चलते उन्हें भी तुरंत वापस पुलिस लाइन भेज दिया गया।

‘छवि धूमिल करने की रची जा रही है सुनियोजित साजिश’

सांसद ने नागौर जिले की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नागौर में लंबे समय से पुलिस अधीक्षक (एसपी) का पद खाली पड़ा है। बिना एसपी वाले इस जिले में जिम्मेदार कार्मिकों द्वारा जानबूझकर बीमार पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। बेनीवाल ने इसे एक गहरी साजिश बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भविष्य में किसी भी संभावित अप्रिय घटना या पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य संबंधी संकट की स्थिति में उन्हें (बेनीवाल को) अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को पूरी तरह धूमिल करने का एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।

इंटेलिजेंस के इनपुट और कमांडो सुरक्षा हटने का रहस्य

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में सीधा हस्तक्षेप मांगते हुए बेनीवाल ने अपनी पुरानी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पत्र में याद दिलाया कि कुछ समय पहले राजस्थान पुलिस की खुफिया इकाई (इंटेलिजेंस) को उनकी सुरक्षा को लेकर किसी बड़े खतरे का इनपुट मिला था। इस गंभीर खतरे को देखते हुए ही उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट के साथ हथियारबंद कमांडो की मजबूत सुरक्षा छतरी प्रदान की गई थी। लेकिन, कुछ समय बाद बिना कोई कारण बताए या पूर्व सूचना दिए ही वह कमांडो सुरक्षा अचानक हटा ली गई। बेनीवाल ने नाराजगी जताते हुए पूछा है कि प्रशासन को कम से कम उन्हें यह तो स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था कि उनकी सुरक्षा को लेकर पहले जो इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और खतरा टला है या नहीं? बेनीवाल के इस पत्र के बाद अब राजस्थान के पुलिस महकमे और सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

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