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समंदर की तलहटी में मिला सोने का विशाल भंडार, वैज्ञानिक भी रह गए हैरान; मालामाल होगा ये देश

समंदर की तलहटी में मिला सोने का विशाल भंडार, वैज्ञानिक भी रह गए हैरान; मालामाल होगा ये देश

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Japan Hidden Gold Discovery : टोक्यो। सोना हमेशा से दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में गिना जाता है। भारत में इन दिनों सोने की कीमत 1 लाख 40 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुकी है। ऐसे में अगर किसी देश को सोने का बड़ा भंडार मिल जाए तो यह उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खबर बन जाती है। जापान के वैज्ञानिकों ने समुद्र की गहराई में सोने का ऐसा भंडार खोजा है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रशांत महासागर में जापान के दक्षिण में स्थित एक ज्वालामुखीय क्षेत्र में वैज्ञानिकों को बड़ी मात्रा में ‘अदृश्य सोना’ (Invisible Gold) मिला है। यह सोना सामान्य खदानों की तरह चमकते हुए टुकड़ों में नहीं, बल्कि पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर छिपा हुआ है। यह खोज जापान की राजधानी टोक्यो से करीब 360 किलोमीटर दूर समुद्र के भीतर हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सोना समुद्र की सतह से लगभग 700 मीटर नीचे मौजूद है। खास बात यह है कि यह सोना सामान्य खदानों की तरह बड़े-बड़े टुकड़ों या दानों के रूप में नहीं मिला, बल्कि पत्थरों के अंदर बेहद सूक्ष्म स्तर पर छिपा हुआ है।

पानी में मिला असली सोने का खजाना

यह खोज जापान के हिगाशी-आओगाशिमा (Higashi-Aogashima) हाइड्रोथर्मल फील्ड में हुई है, जो टोक्यो से करीब 350 किलोमीटर दक्षिण में जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर स्थित है। यह क्षेत्र वर्ष 2015 में पहली बार वैज्ञानिकों की नजर में आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इलाका समुद्र के नीचे सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र है। यहां हाइड्रोथर्मल वेंट्स या ‘ब्लैक स्मोकर्स’ मौजूद हैं, जहां पृथ्वी के भीतर से अत्यधिक गर्म और खनिजों से भरपूर पानी बाहर निकलता है। जब यह गर्म पानी ठंडे समुद्री पानी के संपर्क में आता है, तो उसमें मौजूद खनिज जमने लगते हैं और समय के साथ चिमनी जैसी संरचनाएं तथा सल्फाइड से भरपूर चट्टानें बन जाती हैं। ऐसे क्षेत्रों में पहले भी तांबा, जस्ता, चांदी और सोना मिलने की जानकारी थी, लेकिन इस बार मिले सोने की मात्रा ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।

पत्थरों के अंदर छिपा है ‘अदृश्य सोना’

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने समुद्र तल से चट्टानों के नमूने एकत्र किए और अत्याधुनिक तकनीकों से उनकी जांच की। यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ (Scientific Reports) जर्नल में प्रकाशित हुआ है। जांच में पता चला कि अधिकांश सोना पाइराइट (Pyrite) नामक खनिज के भीतर छिपा हुआ है। पाइराइट को उसकी चमक के कारण अक्सर फूल्स गोल्ड’ (Fool’s Gold) कहा जाता है, क्योंकि यह देखने में सोने जैसा लगता है लेकिन वास्तव में सोना नहीं होता। वैज्ञानिकों ने पाया कि सोना दो रूपों में मौजूद है। कुछ सोना बेहद छोटे नैनो कणों के रूप में पाइराइट के भीतर फंसा हुआ है, जबकि कुछ सोना उसके क्रिस्टल स्ट्रक्चर में परमाणु स्तर पर शामिल है। यही कारण है कि यह सामान्य माइक्रोस्कोप से भी दिखाई नहीं देता।

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आधुनिक तकनीक से हुआ बड़ा खुलासा

इस अदृश्य सोने का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री (SIMS) तकनीक का उपयोग किया। यह अत्यंत संवेदनशील तकनीक पदार्थों के अंदर मौजूद सूक्ष्म तत्वों की पहचान करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हिगाशी-आओगाशिमा क्षेत्र के पाइराइट में अब तक समुद्र तल पर मिले किसी भी हाइड्रोथर्मल भंडार की तुलना में सबसे अधिक सोने की मात्रा दर्ज की गई है।

क्या निकाला जा सकेगा यह सोना?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षेत्र भविष्य में समुद्री खनन के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यहां की गहराई अन्य कई समुद्री खनिज क्षेत्रों की तुलना में कम है और सल्फाइड चट्टानों में खनिजों की मात्रा भी काफी अधिक है। हालांकि फिलहाल इस सोने का व्यावसायिक खनन आसान नहीं है। क्योंकि सोना पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर मौजूद है, इसलिए इसे निकालने के लिए नई और अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होगी। अभी तक दुनिया में कहीं भी सक्रिय हाइड्रोथर्मल वेंट से इस तरह के अदृश्य सोने का आर्थिक रूप से सफल खनन नहीं हो पाया है।

पर्यावरण को लेकर भी बढ़ी चिंता

इस खोज के साथ समुद्री खनन को लेकर बहस भी तेज हो गई है। हाइड्रोथर्मल वेंट्स के आसपास कई दुर्लभ समुद्री जीव रहते हैं, जिनमें विशेष प्रकार के कीड़े, झींगे, मूंगे, स्पंज, मछलियां और ऑक्टोपस शामिल हैं। ये जीव समुद्र के नीचे मौजूद अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने के लिए विकसित हुए हैं। समुद्री वैज्ञानिकों का कहना है कि इन पारिस्थितिक तंत्रों के बारे में अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यदि बिना पर्याप्त अध्ययन के यहां खनन शुरू किया गया, तो इन अनोखे समुद्री जीवों और उनके आवास को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

वैज्ञानिकों के लिए बड़ी उपलब्धि

शोधकर्ताओं का कहना है कि नई तकनीकों की मदद से पहले की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में सोने का पता लगाया गया है। इससे यह साफ हो गया है कि हिगाशी-आओगाशिमा हाइड्रोथर्मल क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध समुद्री सोना भंडारों में शामिल हो सकता है। हालांकि इसका व्यावसायिक उपयोग भविष्य की तकनीक और पर्यावरणीय मंजूरी पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य में समुद्र के नीचे खनिजों की खोज और खनन के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है। हालांकि समुद्र के भीतर खनन करना आसान नहीं है। इसकी लागत बहुत अधिक होती है और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए फिलहाल इस खोज को वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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