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15 साल का इंतजार खत्म; अब बदलेगी राजस्थान की तस्वीर, देश की पहली BS-VI मेगा रिफाइनरी का होगा उद्घाटन

15 साल का इंतजार खत्म; अब बदलेगी राजस्थान की तस्वीर, देश की पहली BS-VI मेगा रिफाइनरी का होगा उद्घाटन

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India’s First BS-VI Mega Refinery In Pachpadra : बालोतरा। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में बनी देश की पहली BS-VI मानक वाली हाईटेक रिफाइनरी अब पूरी तरह तैयार है। करीब 15 साल के लंबे इंतजार के बाद यह महत्वाकांक्षी परियोजना देश को समर्पित होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को एचपीपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का उद्घाटन करेंगे। इस रिफाइनरी के शुरू होने के साथ ही न केवल बाड़मेर और बालोतरा, बल्कि पूरे राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। बालोतरा के पचपदरा में बनी इस रिफाइनरी की वजह से पूरे राजस्थान की तस्वीर बदल जाएगी। 9 मिलियन टन सालाना क्षमता वाली यह रिफाइनरी अरब देशों और राजस्थान से प्राप्त कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। यहां पेट्रोल, डीजल, एविएशन फ्यूल, पॉलीप्रोपाइलीन और ब्यूटाडाइन सहित कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

दो बार टला उद्घाटन

बता दें कि बालोतरा में बनी इस रिफाइनरी की पहले भी दो बार उद्घाटन की तारीख की घोषणा भी हुई। 21 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले 20 अप्रैल को सीडीयू-वीडीयू यूनिट में लीकेज होने से आग लग गई। इससे पीएम मोदी का उद्घाटन दौरा स्थगित हो गया था।

लीलाना से पचपदरा पहुंची रिफाइनरी

शुरुआत में रिफाइनरी बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) के बायतु के लीलाना गांव में लगनी तय थी। जैसे ही घोषणा हुई, राजनीतिक रसूख वाले लोगों और भूमाफिया ने वहां हजारों बीघा जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। जब सरकार जमीन कब्जा लेने करने पहुंची, तो किसानों ने हाथ खींच लिए। कुछ लोगों ने 1 बीघा जमीन के बदले 1 करोड़ रुपए की मांग रख दी। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने पचपदरा का रुख किया, जहां सरकारी जमीन उपलब्ध थी। रिफाइनरी शिफ्ट होते ही लीलाना में करोड़ों के ख्वाब देख रहे भूमाफिया और नेता अर्श से फर्श पर आ गए।

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रिफाइनरी शिफ्ट होने पर राजनीति में आया था भूचाल

बाड़मेर के राजनीतिक मामलों के जानकार शिव प्रकाश सोनी बताते हैं- रिफाइनरी शिफ्ट होने पर राजनीति में भूचाल आ गया था। बायतु के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी (स्वर्गीय) ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अशोक गहलोत काकाणी में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स लगाकर अपने गृह जिले जोधपुर को फायदा देना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था- जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा। उस समय राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी इस्तीफा तक दे दिया था।

देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी

यह रिफाइनरी HPCL (74%) और राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है। 15 साल के लंबे इंतजार और 42,229 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत (शुरुआती लागत से तुलना) के बाद अब यह रेगिस्तान की तस्वीर बदलने को तैयार है। पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 है। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, निम्न गुणवत्ता (लो क्वालिटी) वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण देते हुए इस रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। इसका दिमाग यानी कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का सहारा लिया गया है। इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के तकनीशिय ने पचपदरा की तपती धूप में पसीना बहाया है।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

रिफाइनरी की सबसे बड़ी विशेषता इसका 20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला एकीकृत पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जो इसे देश की सबसे आधुनिक रिफाइनिंग परियोजनाओं में शामिल करता है। साथ ही इसमें ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक अपनाई गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

पेट्रोकेमिकल हब के रूप में उभरेगा राजस्थान

करीब 79,459 करोड़ रुपए लागत वाली यह परियोजना एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम HRRL द्वारा विकसित की गई है। राज्य सरकार ने अपनी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए हाल ही में रीको (RIICO) के माध्यम से 750 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश भी किया है। रिफाइनरी के शुरू होने के साथ ही राजस्थान देश के प्रमुख पेट्रोकेमिकल हब के रूप में उभरेगा और भारत की ईंधन निर्यात क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी।

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