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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : 8 आरोपियों ने मिलकर रची थी साजिश, थाने में उगले कई बड़े राज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला : 8 आरोपियों ने मिलकर रची थी साजिश, थाने में उगले कई बड़े राज

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Ram Temple Donation Theft: अयोध्या। उत्तरप्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर गुरुवार की रात बड़े खुलासे हुए। 19 दिन बाद और जांच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी और 14 दिनों की रिमांड मांगेगी।

दरअसल, गुरुवार शाम मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली FIR दर्ज की गई। FIR में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा के अलावा गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और कई अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई गई है। सभी पर साजिश के तहत धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है।

हालांकि, FIR में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं। चोरी का मामला पहली बार 6 जून को सामने आया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने खुद ही संदिग्धों को पकड़कर जांच शुरू की थी। उसके बाद 13 जून को एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने 23 जून को शासन को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें एफआईआर की सिफारिश की गई थी। गुरुवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर कोतवाली रामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज की गई। सूत्रों के मुताबिक करीब 60 लाख रुपए अब तक बरामद कर लिए गए हैं। टिन्नू और सुभाष ने इस चढ़ावा चोरी प्रक्रिया के बारे में कई महत्वपूर्ण राज पुलिस को बताएं हैं। इसमें से कई बैंक अफसरों के लिए नाम भी लिए गए हैं।

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मंत्री सुरेश खन्ना बोले- कोई दोषी नहीं बचेगा

यूपी सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी मामले में FIR दर्ज होने पर कहा- यह योगी जी की सरकार है और इस सरकार में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का नारा शुरू से दिया गया है। उसी के हिसाब से कार्रवाई भी रही है। कहीं भी कोई दोषी नहीं बचेगा। जिसने भी गड़बड़ की होगी, उसको जरूर सजा मिलेगी।

FIR में तय माना जा रहा था चंपत राय का नाम

इससे पहले सूत्रों से जानकारी सामने आई थी कि SIT ने जांच रिपोर्ट में चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों को आरोपी माना था। इनके खिलाफ FIR होना लगभग तय माना जा रहा था। SIT को जांच के दौरान दानपात्रों की चाबियां टिन्नू के पास मिलीं थी। SIT ने ऐसे करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों को चिह्नित किया था, जिनकी आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बदलाव आया।

भाजपा सांसद बोले- मंदिर को बदनाम करना चाहता है विपक्ष

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में कथित हेराफेरी मामले में FIR दर्ज होने पर कहा- विपक्ष के पास केवल आरोप लगाने का काम है। वे श्री राम जन्मभूमि मंदिर को बदनाम करना चाहते हैं। विपक्ष जो आरोप लगा रहा है, उससे पहले ही SIT का निर्माण हुआ है। FIR दर्ज की गई है। 8 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। जिसके खिलाफ सबूत मिलेंगे। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। सारे विपक्ष का एक ही काम है, राम मंदिर के निर्माण से लेकर आज तक उनके निशाने पर केवल श्री राम जन्मभूमि मंदिर और अनेक मंदिर रहे हैं। मैं समझता हूं कि इससे ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई हो नहीं सकती है।

सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी होंगे गिरफ्तार

चढ़ावा चोरी की FIR में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट यानी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा भी लगाई गई है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर ही कार्रवाई होती है। इससे साफ है कि आने वाले समय में चढ़ावे की रकम की गिनती और उसको स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में जमा कराने के दौरान लगे सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी गिरफ्तार हो सकते हैं।

सांसद संजय सिंह ने SIT को दिए सबूत

एसआईटी को आप सांसद संजय सिंह ने जमीन घोटाले से जुड़े सबूत दिए। संजय सिंह गुरुवार सुबह 11 बजे लखनऊ में SIT के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के ऑफिस पहुंचे। वे करीब 12 मिनट कमरे में रुके। संजय सिंह ने बाहर आकर कहा- राम मंदिर में जमीन घोटाले के 11 कागजात मैंने एसआईटी को सौंपे हैं। उन्होंने कहा- एक-एक कर सब सामने आ रहा है। पैसे की बरामदगी हो चुकी है, चढ़ावे में चोरी के तमाम साक्ष्य मिल चुके हैं। फिर भी अब तक कोई जेल क्यों नहीं गया? किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? कोई FIR अब तक क्यों दर्ज नहीं हुई? यह बेहद हैरान करने वाली बात है।” दरअसल, संजय सिंह ने दावा किया था कि उनके पास अयोध्या में जमीन घोटाले से जुड़े सबूत हैं। इसके बाद SIT के प्रमुख कुमार विश्वास पंत ने उन्हें सबूत के साथ बुलाया था। वहीं आप सांसद संजय सिंह ने वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि मैंने SIT को जमीन घोटाले से संबंधित दस्तावेज दिए। जिसमें चंपत राय, अनिल कुमार मिश्रा, भाजपा के पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और उसके भतीजे दीप नारायण का फंसना तय था। लेकिन सैकड़ों करोड़ के घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए ट्रस्ट ने कुछ कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का नाटक रचा है। आखिर प्रभु श्री राम जी के मंदिर में डकैती डालने वाले, चंदा चुराने वाले, चंपत राय और उनके साथी जेल कब जाएंगे?

नृपेंद्र मिश्र बन सकते हैं ट्रस्ट के CEO

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि रामजन्मभूमि परिसर में मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाने के कारण उनका मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में SIT ने किसी प्रशासकीय अधिकारी को सीईओ बनाने की संस्तुति की है। ऐसे में माना जा रहा कि केंद्र सरकार के स्तर से उन्हें सीईओ बनाया जा सकता है। नृपेंद्र मिश्र, गठन के समय से ही ट्रस्ट के सदस्य हैं। उनके निर्देशन में ही पूरा निर्माण हुआ है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सलाहकार और पीएमओ में प्रमुख सचिव भी रहे हैं।

कैसे खुली राम मंदिर चोरी की पोल

बताया जा रहा है कि सेवादारों को मंदिर में सालों से चल रहे गबन की जानकारी थी। इसमें बड़े लोगों के नाम होने के कारण वे कुछ बोल नहीं रहे थे। पिछले 2 सालों में टिन्नू का दबदबा बढ़ा तो मंदिर में काम करने वाले एक गुट को यह चुभने लगा। इस गुट ने प्लानिंग बनाकर उससे करीबी बढ़ाई। फिर सभी तथ्य पता कर इसकी जानकारी मीडिया तक पहुंचा दी।

जांच में ये हैं मुख्य आरोपी, जानें कौन क्या करता था?

1- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: ये चंपत राय का करीबी है। मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था। गणना प्रक्रिया की देखरेख भी करता था। गणना कक्ष की चाबी इसके पास रहती थी। ये घटना का अहम किरदार है।

2- लवकुश मिश्रा : ये अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। अनुकल्प का साला है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।

3- अनुकल्प मिश्रा : ये लवकुश मिश्रा का जीजा है। अनिल मिश्र का रिश्तेदार है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी। इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी।

4- मनीष यादव : ये टिन्नू यादव का भतीजा है। गणना प्रक्रिया में ये शामिल रहता था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी।

5 – अविनाश शुक्ला : ये भी ड्यूटी गणना में लगती थी। इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की चर्चा थी।

6- सुभाष श्रीवास्तव : ये गणना इंचार्ज था। गणना की पूरी प्रक्रिया इसकी निगरानी में होती थी।

7- करुणेश पांडेय : अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।

8- रमाशंकर मिश्र : अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे।

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