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भरत तिवारी एनकाउंटर : आठ दिन बाद परिजनों ने मिले SP, 28 किमी की दूरी तय करने में लग गया 8 दिन का वक्त, सम्राट चौधरी ने दी प्रतक्रिया

भरत तिवारी एनकाउंटर : आठ दिन बाद परिजनों ने मिले SP, 28 किमी की दूरी तय करने में लग गया 8 दिन का वक्त, सम्राट चौधरी ने दी प्रतक्रिया

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Bharat Tiwari Encouter Case : आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Case Bihar Encouter) ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। सत्ता और संगठन के अंतर्विरोधों को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया। सरकार बैकफुट पर है। पुलिसवालों पर हत्या की FIR और न्यायिक जांच का आदेश दे दिया गया है। इस घटना के 8 दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रतिक्रिया दी है। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि समस्या यदि सामने आती है तो सरकार तुरंत चिंतित होकर आगे बढ़ेगी। सरकार ने सबसे ऊपर के आयोग का गठन किया है। जो गलत होगा उस पर कार्रवाई होगी।

इधर, भरत तिवारी मुठभेड़ की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। गुरुवार सुबह रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा अपनी टीम के साथ भरत तिवारी के गांव बिलौटी पहुंचे। उनके साथ शाहबाद रेंज के DIG सत्य प्रकाश, भोजपुर के DM तनय सुल्तानिया, भोजपुर के SP राज समेत अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद हैं। रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा ने भरत तिवारी के माता-पिता और भाई से भी मुलाकात की है। साथ ही वारदात से जुड़े जगहों का निरीक्षण किया।

भरत तिवारी की मां बोली, हत्यारों को फांसी होनी चाहिए

विनोद कुमार सिन्हा से मुलाकात के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बताया, उन्होंने मुझसे कहा कि आप लिखकर दीजिए क्या चाहती हैं। मैंने जज साहब से कहा कि मेरे बेटे को को जिस-जिस ने मारा है, उसे फांसी होनी चाहिए। जिस SDM का मेरे बेटे की हत्या में हाथ था वो भी उनके साथ आया था। मैंने उनके सामने कहा कि इसे फांसी दो। प्रशासन गुंडा है, गुंडे का एक ही इलाज है फांसी। मुझे कोर्ट पर विश्वास है। CBI जांच होनी चाहिए।

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एनकाउंटर के 8 दिन बाद परिवार से मिले भोजपुर एसपी

बता दें कि 17 जून को भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ था। भरत तिवारी के एनकाउंटर के 8वें दिन जिले के एसपी राज उनके परिजनों से मिले। भरत तिवारी के घर से एसपी दफ्तर की दूरी 28 किलोमीटर है। एसपी को 28 किलोमीटर की दूरी तय करने में 8 दिन का वक्त लग गया। बुधवार को रात के अंधेर में जिले के कप्तान दलबल के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। करीब एक घंटे तक परिजन से मिले। इस दौरान एसपी ने स्पष्ट कहा कि वह बोलने नहीं, बल्कि परिवार की पीड़ा और पक्ष सुनने आए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मुलाकात के दौरान भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बेटे की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।

एनकाउंटर के विरोध में हुई महापंचायत

बुधवार को भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में बिलौटी गांव में महापंचायत हुई। महापंचायत में शामिल लोगों का कहना था कि भरत तिवारी की जो मांग थी, उसे पूरा किया जाए, नहीं तो श्राद्धकर्म के बाद वे विधानसभा का घेराव करेंगे। भरत तिवारी के एनकाउंटर के सवाल पर सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि जो भी पुलिसकर्मी दोषी हैं, उनपर कार्रवाई होनी चाहिए। NDA सरकार में उनके परिवार को न्याय जरूर मिलेगा।

पूर्व डीजीपी बोले, निहत्थे व्यक्ति पर गोलियां चलाना पुलिस पर दाग

इससे पहले पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय एनकाउंटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी। शनिवार (20 जून) को वे अपने सोशल मीडिया से लाइव आए और बड़ा बयान दिया। इस पूरी घटना पर पुलिस और सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पूर्व डीजीपी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी भी तरह से असली पुलिस मुठभेड़ का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने भरत भूषण की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि वह कोई चोर, डाकू, लुटेरा, आतंकवादी या नक्सलवादी नहीं था, बल्कि एक बीएससी पास युवक था जो जवईनिया गांव के विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के लिए सोशल मीडिया पर लगातार आवाज उठा रहा था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री बोले, यह सुनियोजित हत्या

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे (ashwini kumar choubey) ने इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या करार दिया। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिसिया अत्याचार को बढ़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी की हत्या की गई है और वह गरीबों की आवाज उठाने वाला एक सामाजिक कार्यकर्ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरा में एक सामाजिक कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया है और इस मामले में दोषी किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

‘कोई अपराधी नहीं था भरत तिवारी’

अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं था। उसे टारगेट कर मारा गया है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा। वह हमेशा गरीब, शोषित और वंचित वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता था और उनकी लड़ाई लड़ता था। चौबे ने कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्होंने इस घटना के बारे में सुना और देखा है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर को लेकर विवाद क्या है?

17 जून 2026 को भोजपुर पुलिस और STF ने भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर किया। पटना चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में इलाज के दौरान भरत की मौत हो गई। आरोप है कि मुठभेड़ के दौरान पूरे घटनाक्रम में भरत भूषण तिवारी की ओर से अपने हाथ में लिए पिस्टल से 10 से 12 राउंड फायरिंग की गई। एनकाउंटर के वक्त एसटीएफ और जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा लीड कर रहे थे। उनके साथ शाहपुर थाना के एसएचओ राजेश मालाकार, एक दारोगा, एक ASI, चार सिपाही समेत वीडियो में दिख रहे हैं। हालांकि, बाद में इन सभी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

निलंबित थानाधिकारी ने एनकाउंटर पर दलील दी

इस घटना को लेकर निलंबित थाना अध्यक्ष राजेश मालाकार ने मीडिया के सामने एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनहीन बयान दिया। उन्होंने मृतक भरत तिवारी की मौत को उसकी किस्मत से जोड़ते हुए कहा कि उसके भाग्य में मरना ही लिखा था। निलंबित थाना अध्यक्ष राजेश मालाकार ने अपने और पुलिस टीम के बचाव में आत्मरक्षा की दलील दी। उनका कहना है कि पुलिस टीम भरत तिवारी को पकड़ने गई थी, लेकिन उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस जवानों पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी। थानाध्यक्ष के मुताबिक, पुलिस कर्मियों ने अपनी जान बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाईं, जिसके चलते भरत तिवारी की मौके पर ही मौत हो गई।

जानिए- भरत तिवारी के एनकाउंटर की कहानी

भरत भूषण तिवारी की ओर से बुधवार सुबह फेसबुक लाइव वीडियो में दिख रहा है कि वो सुनसान इलाके में खड़ा है। उसके सामने पुलिस और एसटीएफ की टीम खड़ी है। भरत के दोनों ओर बुलेट प्रूफ जैकेट पहने भोजपुर पुलिस के जवान हथियार लेकर खड़े हैं। खुद भरत इस बात का जिक्र करता है। वो खुद को निर्दोष बताते हुए कहता है कि मैं कोई मुजरिम नहीं हूं, इसके बावजूद एसटीएफ के साथ भोजपुर पुलिस टीम मुझे पकड़ने आई है। वीडियो के आखिर में भरत भूषण पुलिस की ओर हथियार फेंकता है और खुद को सरेंडर कर फेसबुक लाइव बंद कर देता है। पुलिस का दावा है कि इसके बाद उसने दोबारा पिस्टल उठाकर फायरिंग की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में उसके पैरों में गोली मारी गई।

भरत भूषण के एनकाउंटर को लेकर उठे ये सवाल

सरेंडर के बाद गोली मारने का आरोप: घटना का जो कथित वीडियो सामने आया है, वो पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह खारिज करता हुआ दिख रहा है।

पिस्टल फेंकने का साक्ष्य: वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि भरत तिवारी ने गोली चलने से पहले अपनी पिस्टल नीचे फेंक दी थी।

निहत्थे पर फायरिंग: पिस्टल फेंककर पूरी तरह सरेंडर करने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हुई।

वीडियो फुटेज के बाद पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

इस मामले में सामने आया वीडियो फुटेज अब पुलिस के लिए गले की हड्डी बन गया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत तिवारी ने अपनी पिस्टल फेंक दी थी, जिसके बाद उसे गोली मारी गई। पैर में गोली लगने की बात और फिर थानाध्यक्ष के इस ‘किस्मत वाले’ बयान ने मामले को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। मानवाधिकारों के उल्लंघन और फर्जी एनकाउंटर की आशंकाओं के बीच अब इस पूरे घटनाक्रम की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

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