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क्या राजस्थान में तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारेगी BJP? राज्यसभा में किसे मिलेगा मौका…दोनों पार्टियों में इन नामों की चल रही चर्चाएं

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Rajya Sabha Election Date : नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव-2026 की 24 खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान होने के साथ ही राजस्थान में सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। नामांकन का आज दूसरा दिन है, लेकिन अभी तक कांग्रेस और बीजेपी में से किसी ने भी अपने उम्मीदवार तय नहीं किए हैं। संख्या बल के लिहाज से बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। उम्मीदवारों के नाम के ऐलान में अभी दो से तीन दिन और लग सकते हैं। हालांकि, चर्चा इस बात की है कि बीजेपी तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारकर निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग के जरिए कांग्रेस का खेल बिगाड़ने और चुनाव को दिलचस्प बनाने की कोशिश कर सकती है। राजस्थान में जून महीने में ही राज्यसभा सांसद कांग्रेस के नीरज डांगी के साथ ही बीजेपी से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत का कार्यकाल खत्म हो रहा है। मौजूदा समय में भी तीन में से दो सीट बीजेपी और एक कांग्रेस के पास है।

कांग्रेस- बीजेपी का सियासी गणित समझें

बता दें कि राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों में BJP के पास 118 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 51 वोटों की जरूरत होती है। ऐसे में BJP को दो सीटें जीतने के लिए 102 वोट चाहिए, जो उसके पास मौजूद हैं। कांग्रेस के पास भी एक सीट के हिसाब से पर्याप्त वोट बैंक है। कांग्रेस के भी एक सीट पर आसानी से कब्जा जमाने की उम्मीद है।

जयपुर से लेकर दिल्ली तक दौड़

प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों की मानें तो टिकट के दावेदार जयपुर से लेकर दिल्ली तक हाईकमान के चक्कर काट रहे हैं। दोनों पार्टी के शीर्ष नेताओं की मुलाकात का दौर भी जारी है। अब देखना यह है कि आगे कौन राज्यसभा में अपनी सीट जमा पाता है।

क्या तीसरे सीट पर भी उम्मीदवार उतारेगी BJP?

भाजपा में शुरुआती तौर पर विचार इस बात को लेकर भी आया कि क्या पार्टी को तीसरा प्रत्याशी उतरना चाहिए या किसी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देना चाहिए? हालांकि, अब इस मुद्दे को खारिज कर दिया गया है। पार्टी में जिन नामों को लेकर चर्चा हुई, उनमें सामान्य और ओबीसी वर्ग पर ज्यादा फोकस दिख रहा है। बीजेपी में दावेदारों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के साथ ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा हैं। राठौड़ बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों में माने जाते हैं। बंगाल में भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी की जीत में भी उनकी अहम रही। हरियाणा में बीजेपी की जीत के बाद पूनिया का भी काफी बढ़ गया है। यह भी वजह है कि उन्हें सदन भेजने पर विचार किया जा रहा है। संभावना है कि उन्हें उच्च सदन में भेजा गया तो उन्हें मोदी सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है।

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अलका गुर्जर और विजय बैंसला के नाम पर भी मंथन

वहीं, बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर और पूर्व सांसद जसकौर मीणा की पुत्री अर्चना मीणा के नाम की भी चर्चाएं हैं। लंबे समय से बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही अलका गुर्जर दिल्ली चुनाव में खुद को साबित कर चुकी है। इससे पहले, दिल्ली की राज्यसभा सीट से भी उनकी दावेदारी सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार उन्हें मौका मिल सकता है। वहीं महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौर और ज्योति मिर्धा भी प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के परिवार के सदस्यों को लेकर भी मंथन चल रहा है। बेटी सुनीता बैंसला के साथ ही कयास विजय बैंसला को लेकर भी है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला के जरिए बीजेपी एक बड़े वोटबैंक को भी साध सकती है।

कांग्रेस से ये हैं संभावित दावेदार

वहीं कांग्रेस में सोशल इंजीनियरिंग की कवायद चल रही है। कांग्रेस की तरफ से सबसे ज्यादा चर्चा पवन खेड़ा के नाम की है। वहीं स्थानीय नेताओं में राष्ट्रीय सचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा इस दौड़ में सबसे मजबूत नाम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी का माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अगर सीपी जोशी के नाम पर दांव लगाती है तो वैचारिक तौर पर केंद्र में भी मजबूत मिलेगी, साथ ही पार्टी वागड़-मेवाड़ को भी साध सकती है। राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष रही रेहाना रियाज का नाम भी आया।

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