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करनाल में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा रद्द, टेंट ऑपरेटर आयोजकों के बीच पैसों को लेकर हुआ विवाद

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Karnal Shiv Mahapuran Katha controversy : करनाल। हरियाणा के करनाल के घरौंडा में होने जा रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा शुरू होने से पहले ही विवादों के भंवर में फंस गई। घरौंडा की नई अनाज मंडी में 17 मई से शुरू होने वाले इस भव्य आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में थीं। लेकिन 2 दिन पहले टेंट हाउस और आयोजकों के बीच पैसों को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मंडी में हंगामा हो गया। स्थिति यह है कि कथा शुरू होने से पहले रद्द हो गई। आयोजन समिति के अधिकतर सदस्य नदारद हैं। आयोजन कमेटी के सदस्य ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की पर्ची उनके कार्यालय से कटी है, उनके पैसे वापस होंगे। कथा के कैंसिल होने के पीछे कथित तौर पर एंट्री के लिए 5100 से ढाई लाख रुपए तक फीस लगाए जाने और आयोजन समिति में फुट पड़ना भी एक कारण बताया जा रहा है।

पंडित प्रदीप मिश्रा करने वाले थे शिव महापुराण कथा

17 से 23 मई तक घरौंडा की नई अनाज मंडी में पंडित प्रदीप मिश्रा शिव महापुराण कथा करने वाले थे। यह विशाल धार्मिक आयोजन दृष्टि फाउंडेशन से जुड़े दंडी स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज की अगुवाई में तथा स्वामी विवेकानंद चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित होना था। पिछले 21 दिनों से कथा स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं। विशाल पंडाल, मंच, लाइटिंग और श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका था, लेकिन अचानक पैसों का विवाद सामने आने के बाद पूरा आयोजन धराशायी हो गया।

टेंट ऑपरेटर ने लगाया आरोप

इस आयोजन को लेकर शुरू हुए विवाद के कारण कथा रद्द हो चुकी है। टेंट हाउस के ऑपरेटर राजन ने बताया कि इस आयोजन के लिए टेंट की कुल बुकिंग 1.21 करोड़ रुपए में हुई थी। उसे आयोजकों की तरफ से केवल 13 लाख रुपए एडवांस मिले हैं, जबकि वह अब तक करीब 70 लाख रुपए खर्च कर चुका है। उसने कहा कि कई बार भुगतान मांगने के बावजूद उसे टाल दिया गया। अब आयोजक गायब हो गए हैं और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा।

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मौके पर हंगामा, भीड़ जुटी

11 मई को जब राजन को भुगतान नहीं मिला तो उसने नई अनाज मंडी में हंगामा कर दिया। इसके बाद मौके पर काफी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। जब आयोजन समिति के सदस्यों से बात की गई तो वे जिम्मेदारी से बचते नजर आए। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि वे आयोजन समिति का हिस्सा ही नहीं हैं।

आयोजन समिति सदस्य ने पल्ला झाड़ा

आयोजन समिति के सदस्य सतीश कुमार मौके पर मौजूद रहे, लेकिन उन्होंने भी सीमित जिम्मेदारी की बात कही। सतीश कुमार ने कहा कि उनके पास केवल 3-4 लाख रुपए हैं, जो वे देने को तैयार हैं, लेकिन इससे ज्यादा पैसे उनके पास नहीं हैं। उन्होंने बताया कि समिति में करीब दस लोग और भी थे, लेकिन वे अब यहां से जा चुके हैं। सतीश कुमार का कहना है कि वे एक धार्मिक कार्यक्रम करवा रहे थे, लेकिन इसे होने नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने घर से भी लाखों रुपए खर्च किए हैं।

मकान मालिक ने भी लगाए आरोप

वहीं, जिस मकान में पूजा-पाठ चल रहा था, उसके मालिक ने भी आयोजकों पर किराया और बिजली बिल नहीं देने का आरोप लगाया है। मकान मालिक ने कहा कि धार्मिक आयोजन का हवाला देकर मकान लिया गया था, लेकिन दो महीने का करीब 80 हजार रुपये किराया और लगभग 13 हजार रुपये बिजली बिल अभी तक नहीं चुकाया गया। मकान मालिक ने कहा कि वह सतीश को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, लेकिन धार्मिक कार्य का हवाला देकर मकान लिया गया था।

क्या अब होगी कथा?

वहीं आयोजन समिति के सदस्य संजय गोयल ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब कथा नहीं होगी। जिन लोगों ने कथा के लिए दानराशि मेरे कार्यालय पर दी थी या फिर मेरे हाथ से जो पर्ची कटी हुई है उन सभी को पैसे वापस किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो फाउंडेशन और वेलफेयर एसोसिएशन है, उन्होंने मुझे गुमराह किया था। इसमें पास सिस्टम भी लागू किया जाना था। यह पास सिर्फ मेन शेड के लिए था, बाकी पूरी मंडी खाली थी, उसके लिए कोई पास नहीं था, वह फ्री था।

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