Loading...

कोई ख़ुशी कामिल नहीं

Jaipur

default-image

Follow us

Share

लोग अक्सर यह समझते हैं कि माल-ओ-दौलत जमा कर लेने से कामिल, यानी मुकम्मल ख़ुशी और सुकून मिल जाएगा। लेकिन दुनिया की हक़ीक़त यह है कि यहाँ की कोई भी ख़ुशी अपने आप में पूरी नहीं होती। हर ख़ुशी के साथ किसी न किसी ग़म या तकलीफ़ का पहलू जुड़ा होता है।

इस दुनिया की ख़ुशी की मिसाल ऐसी है जैसे किसी को बहुत तेज़ भूख लगी हो और उसे लज़ीज़ खाना मिल जाए। खाने की लज़्ज़त और ख़ुशी इसलिए महसूस होती है क्योंकि उससे पहले भूख की बेचैनी और तकलीफ़ थी। गोया ख़ुशी, किसी पिछली कमी या तकलीफ़ का नतीजा होती है। इसीलिए दुनिया की कोई भी लज़्ज़त या ख़ुशी अपने आप में मुकम्मल और हमेशा रहने वाली नहीं है।

इसकी सबसे अच्छी मिसाल अमीर और ग़रीब की ज़िंदगी में मिलती है। एक तरफ़ बड़े-बड़े सरमायादार हैं, जिनके पास आलीशान बंगले, महंगी गाड़ियां, नरम बिस्तर और एयर कंडीशनर कमरे हैं, लेकिन रात को सुकून की नींद के लिए गोलियां खानी पड़ती हैं। दूसरी तरफ़ एक मज़दूर है जो दिन भर की मशक़्क़त के बाद ज़मीन पर ही सर के नीचे हाथ रखकर सोता है और आठ घंटे की भरपूर नींद लेता है। अब सोचने की बात यह है कि रात किसकी ज़्यादा सुकून से गुज़री?

अल्लाह ने दुनिया का निज़ाम ही ऐसा बनाया है कि यहाँ हर ख़ुशी के साथ ग़म और हर ग़म के साथ ख़ुशी जुड़ी है। इससे यह सबक़ मिलता है कि सच्ची और कामिल ख़ुशी का ताल्लुक़ दौलत और बाहरी चीज़ों से नहीं, बल्कि दिल के सुकून और इत्मीनान से है।

 

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।