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यूनानी चिकित्सा मे मिज़ाज़ और इसका महत्व

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। यूनानी चिकित्सा पद्धति (Unani Medicine ) : यूनानी चिकित्सा लगभग 2500 साल प्राचीन स्वास्थ्य विज्ञान है,जो स्वास्थ्य -Health, और मर्ज-Disease दोनों की स्थिति का गहन अध्ययन करती है यूनानी चिकित्सा ग्रीस चिकित्सा के जनक बुकरात -हिप्पोक्रेट्स 460-370 ईसा पूर्व और रोमन चिकित्सक जालीनूस -गैलन 129-216 ईस्वी की शिक्षाओं पर आधारित है।

यूनानी के सिद्धांत और अवधारणाएँ : Concepts & Fundamental Principle of Unani Medicine :

यूनानी चिकित्सा पद्धति का मूल सिद्धांत हिप्पोक्रेट्स के प्रसिद्ध चार द्रव्य सिद्धांत- The Four Humours Theory पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार कायनात की हर एक चीज, वायुमंडल, वनस्पति, इंसान, गिज़ा,अदविया वगैरा चार तरह के अरकान या तत्व -Elements से मिलकर बनी होती है, ये अरकान मिट्टी-Solid, पानी- Liquid, हवा-Gas और आग-Plasma होते है मिट्टी का मिज़ाज (सर्द और खुश्क ), पानी ( सर्द और तर ), हवा ( गर्म और तर ), आग ( गर्म और खुश्क) होता है बुकरात के अनुसार इंसानी ज़िस्म में चार तरह के अखलात या खिल्त -Body Fluids होते हैं ये अखलात, खिल्त ए दम- Blood, खिल्त ए बलगम – Mucus, खिल्त ए सफ़रा-Yellow Bile, खिल्त ए सौदा- Black Bile होते है खिल्त ए दम का मिज़ाज़ ( गर्म और तर ), बलगम ( सर्द और तर ), सफ़रा ( गर्म और ख़ुश्क ), सौदा ( सर्द और ख़ुश्क ) होता है।

मिज़ाज़ (Temperament ) :

दो या दो से ज्यादा अरकानों के आपस मे मिलने से जो के कैफ़ीयत पैदा होती है उसे मिजाज कहते हैं,इंसानी ज़िस्म मे तरल पदार्थों (अखलात) के विरोधी गुणों की क्रिया और प्रतिक्रिया के माध्यम से परस्पर क्रिया से पैदा होता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में चारों अरकान और अखलात के मिज़ाज़ के आधार पर इंसान, अदविया, गिज़ा और मर्ज को भी चार मिज़ाज़ में तकसीम किया गया है। गर्म और खुश्क, गर्म और तर, सर्द और तर, और सर्द और खुश्क।

यूनानी चिकित्सा और मिज़ाज़ : Unani Medicine & Temperament :

यूनानी चिकित्सा पद्धति में इंसान के मिज़ाज को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण कारक माना जाता है, यूनानी चिकित्सा मिज़ाज़ के संतुलन पर निर्भर है, अगर मिज़ाज़ में कोई बदलाव होता है या संतुलन किसी भी तरह से गड़बड़ा जाता है तों इंसानी ज़िस्म मे कोई मर्ज या जीवन को खतरा हो सकता है. मिज़ाज़ के असंतुलन को मिज़ाजे ग़ैर मुतादिल या सूए मिज़ाज (असमान या असंतुलित मिज़ाज़) कहते है।

यूनानी चिकित्सा के मुताबिक इंसान और मर्ज के चार तरह के मिज़ाज होते है।

दमवी -Sanguine : यह मिज़ाज़ Hot & Wet यानि गर्म और तर होता है इसका तालुक इंसानी ज़िस्म के खिल्त ए खून-Blood से, अरकान  – Air Element/ Gas से,बसंत के मौसम- Spring Season से और जिगर व दिल आज़ा- Organs से होता है,दमवी मिज़ाज़ का इंसान बहुत ज्यादा जोशीला,फुर्तीला, ऊर्जावान,आशावादी-Hopeful,मिलनसार-Sociable, बातूनी-Talker,मज़ाकी-Funny और आत्मविश्वासी -Self Confident वाला होता है,दमवी मिज़ाज़ मे मरीज का चेहरा व आँखों का रंग सुर्ख, मुँह का स्वाद मीठा,पूरे बदन में दर्द व जकड़न, सर दर्द व सर्दी के साथ बुखार, पेशाब गर्म और सुर्ख, नब्ज़ तेज व सख्त, खून की गर्मी की वजह से ज़िस्म मे फोड़ा- फुंसियां निकलती है,मरीज को गर्मी, भूख और प्यास ज्यादा लगती है, गर्म चीजे खाने से परेशानी होती है और ठंडी चीजों से आराम मिलता है, आंखों में नींद रहना लेकिन नींद न आने के अलामात नजर आते हैं, दमवी मिज़ाज के मर्ज मे हाइपरटेंशन (ज़िगतुद्दाम क़वी), नकसीर आना, क़ूबा, खुनी बवासीर, पित्ती उछलना ( शिरा), माइग्रेन, सोरायसिस, एक्जिमा,सुदाअ दमवी वगैरा शामिल है।

बलगमी- Phlegmatic :

यह मिज़ाज Cold & Wet  यानि सर्द और तर होता है इसका तालुक इंसानी ज़िस्म के खिल्त ए बलगम- Mucus से, अरकान- Water Element / Liquid से, सर्दी के मौसम- Winter Season से और दिमाग़ व फेफड़े आज़ा- Organs से होता है,बलगमी मिज़ाज़ का इंसान बहुत ज्यादा सुस्त,  शांत-Peacful, भावहीन-Emotionless, चुप-Quiet, शर्मिंला- Shy, आरामदायक-Lazy, आवेगहीन- Impassive, उदासिन व्यवहार – Opathetic Behavior और तनावमुक्त – Stress Free वाला होता है,बलगमी मिज़ाज के मरीज के चेहरे की रंगत सफेद माइल होती है, ज़िस्म मे ठंडक महसूस होती है,मुँह का स्वाद फीका, प्यास व भूख कम, नींद ज्यादा, पेशाब गाढ़ा व सफ़ेद, काम करने मे अरुचि, मुँह मे बार – बार पानी आना, अंगड़ाई और जम्हाई ( उबासी ) बहुत आना, ठंडी चीज खाने से परेशानी और गर्म चीज खाने से आराम मिलता है, नब्ज कमज़ोर व हल्की होने के  अलामात नज़र आते है बलगमी मिज़ाज के मर्ज मे दमा और नज़ला- ज़ुकाम, बलगमी खांसी, सर्दी-जुकाम, गले में खराश या टांसिल में सूजन, लक़वा, फालिज़, मोटापा, बर्स, कब्ज, गैस और भूख न लगना, सुदाअ बलगमी वगैरा शामिल हैं।

सफरावी- Choleric:

यह मिज़ाज Hot & Dry  यानि हार और खुश्क़ होता है इसका तालुक इंसानी ज़िस्म के खिल्त ए सफरा- Yellow Bile से, अरकान- Fire Element/ Plasma से, गर्मी के मौसम- Summer Season से और  तिल्ली, लिवर व पित्ताशय आज़ा- Organs से होता है, इस मिज़ाज़ का इंसान अधिक महत्वाकांशी, ऊर्जावान, नकारात्मक, चिड़चिड़ा- Irritable, क्रोधी-Anger,  तनाव-  Depression, डरपोक – फियर, पाखंडी- Doer और भावनात्मक- Emotional वाला होते है, सफरावी मिज़ाज के मरीज़ के चेहरे, आंखों की रंगत ज़र्द होती है, मुँह का स्वाद कड़वा, ज़ुबान खुश्क़, प्यास ज्यादा लगना, हल्की हल्की सर्दी के साथ बुखार का अहसान होना, उल्टियां की शिकायत रहती है नींद कम आती है डरावने सपने आते हैं, भूख प्यास ज्यादा लगती है ठंडी चीज पसंद होती है गर्म चीजों खाने से एसिडिटी बनती है ज़िस्म मे बेचैनी, गर्मी बहुत ज्यादा लगती है सर दर्द मरीज की नब्ज़ कमजोर और धीमी, पेशाब पीला, गर्म और गंधयुक्त आना, लिवर के बढ़ने के अलामात नज़र आते है  सफरावी मिज़ाज़ के मर्ज मे यरकान ( पीलिया), वरमे जिगर, जोफे जिगर,खून की कमी, सुदाअ सफ़रावी वगैरा शामिल है।

4 खिल्त ए सौदा-

Black Bile से, अरकान- Soil Element/ Solid से,पतझड़ के मौसम- Autumn Season से और  तिल्ली, अधिवृक्क ग्रंथियों का मज्जा- The medulla of the adrenal gland आज़ा- Organs से होता है इस मिज़ाज़ का इंसान उदासीन – Sad/ Moody, चिंताजनक- Serious, निराशावादी- Pessimist, तनाव- Depression  वाला होता है, सौदावी मिज़ाज के मरीज का चेहरा के रंग स्याह, जुबान मैली, तिल्ली का बढ़ना, हर वक्त बुखार,बे-ख़्वाबी रहना यानि नींद कम और डरावनी सपने आना, मरीज बहुत ज्यादा फिकमंद होता है और तनहा रहना पसंद करता है, शरीर में खुश्की की वजह से फोड़ा-फुंसी निकलने लगती हैं मरीज को ठंडी चीज पसंद होती है गर्म चीज खाने से एसिडिटी होने लगती है पेशाब हल्का स्याह रंग का, नब्ज़ सुस्त और सख्त होने के अलामात नजर आते है, सौदावी मिज़ाज़ के मर्ज में मालिखोलिया, जूनून, काबूस (नाइट मेयर), सुदाअ सौदावी वगैरा शामिल है।

डॉ. मोहम्मद रोशन

वरिष्ठ यूनानी चिकित्सा अधिकारी

राजस्थान सरकार ( यूनानी विभाग)

 

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