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क्या आजम खान भाजपा में जाएंगे

Jaipur

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उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के बड़े नेता आज़म खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है। आजम खान 10 बार विधायक दो बार सांसद और उत्तर प्रदेश सरकार में दर्जनों विभागों के मंत्री रह चुके हैं। एक समय था जब आजम खान उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के दाएं हाथ माने जाते थे। आजम खान ही है जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को समाजवादी पार्टी एवं मुलायम सिंह के साथ जोड़ने में बड़ा योगदान रहा है। आजम खान उत्तर प्रदेश के ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने मुसलमानों की शिक्षा रोजगार एवं सामाजिक विकास पर ध्यान दिया साथ में हिंदू मुस्लिम भाईचारा बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है। उत्तर प्रदेश में आजम खान के कद का दूसरा मुस्लिम नेता समाजवादी पार्टी में नहीं है। आजम खान समाजवादी पार्टी के ऐसे मुस्लिम नेता है जिन्होंने मुसलमानों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय बनाने में योगदान दिया।  जौहर यूनिवर्सिटी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है । समाजवादी पार्टी में इस मुस्लिम नेता के साथ 2017 में कुछ नया होने लगा। देखते देखते 72 मुकदमे सरकार एवं निजी लोगों ने दायर कर दिए जिनमें मुर्गी चोरी, बकरी चोरी, भैंस चोरी, किताब चोरी, जमीन पर कब्जे एवं अन्य मुकदमे दर्ज किये। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आजम खान को विभिन्न आरोपों में जेल भेज दिया गया। आजम खान को जेल में भेजने के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक दुश्मनी को माना गया। लेकिन जेल भेजने के लिए आजम खान को कानूनी रूप से कारवाइयां अंजाम दी गई। आजम खान को माननीय न्यायालय से जमानत लेने में तीन-चार वर्ष लग गए। आजम खान का राजनीतिक कैरियर समाप्त करने की कोशिश की गई। इसके बाद आजम खान के विधायक बेटे अब्दुल्लाह आजम और उनकी पत्नी पर भी मुकदमे लगाकर जेल भेजा गया। आजम खान को उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी से कोई विशेष सहायता नहीं मिली फिर भी आजम खान उनके परिवार और उनके चाहने वालों ने हार नही मनी। न्यायालयों मैं अपनी बातें रखी और आखिरकार जमानत मिल गई। क्योंकि आजम खान उत्तर प्रदेश के एक बड़े नेता है और जनाधार वाले नेता है। सभी राजनीतिक दल उनका समर्थन चाहते हैं। आजम खान वैसे तो समाजवादी पार्टी के नेता है और अभी भी समाजवादी पार्टी में ही है लेकिन जेल से छूटने के कारणों पर कुछ पत्रकार, राजनीतिक एवं भविष्यवक्ता अलग-अलग डील के कयास लग रहे हैं। कोई कह रहा है कि आजम खान बसपा में जा सकते हैं या फिर समाजवादी पार्टी छोड़कर कोई तीसरी फ्रंट बना सकते हैं। आजम खान की जमानत के पीछे कोई डील मानी जा रही है। क्योंकि बसपा को उत्तर प्रदेश में भाजपा के हिती के लिए काम करने वाली पार्टी माना जाता है। यदि वास्तव में आजम खान की भाजपा से कोई छिपी हुई डील हुई तो वह बसपा में जा सकते हैं ? क्योंकि आजम खान भाजपा में जा नहीं सकते लेकिन बसपा में जा सकते हैं। भाजपा के लिए बसपा में रहकर काम कर सकते हैं। यदि आजम खान को जमानत पूरी तरह कानूनी पैरवी और तथ्यों के आधार पर हुई है तो आजम खान को समाजवादी पार्टी के अलावा दूसरी किसी पार्टी में जाने की जरूरत नहीं पड़ेंगी। आजम खान के परिवार पर काफी दबाव हो सकते हैं? जिसके करण आजम खान भी चौकाने वाला निर्णय ले सकते हैं।

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