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दावा-वोटर लिस्ट में बदलाव: आधार वेरिफिकेशन अब अनिवार्य

नई दिल्ली

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ई-साइन फीचर से नाम जोड़ना/हटाना होगा

नई दिल्ली।  चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने दावा-वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी नागरिक के वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम चुनावों में धोखाधड़ी को रोकने और मतदाता सूची की सटीकता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने अपने ई-रोल पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से एक नया ‘ई-साइन’ फीचर लॉन्च किया है। इस फीचर के जरिए अब नागरिक अपने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए सीधे आधार के माध्यम से अपना वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि किसी भी गलत या फर्जी दावा को तुरंत पकड़ना भी आसान होगा। रिपोर्ट के अनुसार, 23 सितंबर 2025 से पहले दावा-वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार वेरिफिकेशन जरूरी नहीं था। पहले इस प्रक्रिया के दौरान केवल नागरिक के व्यक्तिगत दस्तावेजों, जैसे पहचान पत्र, राशन कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर नाम जोड़ा या हटाया जाता था। हालांकि इस पुराने तरीके में फर्जीवाड़े की संभावना अधिक रहती थी। नए नियम के तहत, जो भी व्यक्ति वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना चाहता है, उसे सबसे पहले अपना आधार नंबर देना होगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध ई-साइन प्रक्रिया के माध्यम से आधार के जरिए प्रमाणीकरण किया जाएगा। यही प्रक्रिया नाम हटाने के लिए भी लागू होगी। ई-साइन प्रक्रिया काफी सरल है। इसके लिए मतदाता को पहले निर्वाचन आयोग के पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद अपने आधार नंबर और OTP (वन टाइम पासवर्ड) के माध्यम से वेरिफिकेशन करना होगा। वेरिफिकेशन सफल होने के बाद ही दावा सफल माना जाएगा और नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा या हटाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए सिस्टम से मतदाता सूची में सुधार होगा और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे पहले अक्सर मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम, मृतक व्यक्तियों के नाम या फर्जी प्रविष्टियों की शिकायतें आती थीं। अब आधार वेरिफिकेशन से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा। इस बदलाव पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जब किसी फर्जीवाड़े या चोरी को पकड़ा गया तो ताला लगा दिया गया। अब यह कदम चुनावों में पारदर्शिता लाने और मतदाता सूची को सटीक बनाने की दिशा में सही प्रयास है। हालांकि, इसे लागू करते समय आम नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखना जरूरी है।” राहुल गांधी की इस टिप्पणी का मुख्य आशय यह है कि चुनाव आयोग ने समय रहते कदम उठाकर मतदाता सूची में धोखाधड़ी की संभावना को कम किया है, लेकिन इसके साथ ही आम नागरिकों को कोई असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है। आधार आधारित वेरिफिकेशन की यह प्रक्रिया भारत में डिजिटल पहचान के बढ़ते महत्व को भी दर्शाती है। डिजिटल इंडिया के तहत अब सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में आधार का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए आधार का उपयोग भी इसी दिशा का एक हिस्सा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची में पारदर्शिता लाने और मतदाता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ई-साइन प्रक्रिया सुरक्षित और सरल है। किसी भी प्रकार का डेटा चोरी या दुरुपयोग नहीं होगा, क्योंकि आधार वेरिफिकेशन UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के सुरक्षित प्लेटफॉर्म के माध्यम से होगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य में यह कदम चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा। जब प्रत्येक मतदाता का नाम आधार के माध्यम से वेरिफाई होगा, तो फर्जी वोटिंग और चुनावी गड़बड़ियों की संभावना बहुत कम हो जाएगी। इसके अलावा, मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन रहेगी, जिससे चुनाव आयोग को भी लाभ होगा। हालांकि, कुछ नागरिकों ने चिंता जताई है कि यदि किसी व्यक्ति का आधार अपडेट नहीं है या उसके पास आधार नहीं है, तो उसे वोटर सूची में नाम जोड़ने या हटाने में समस्या हो सकती है। निर्वाचन आयोग ने इस समस्या को देखते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिन लोगों का आधार नहीं है या जिनके आधार में अपडेट की आवश्यकता है, उनके लिए एक अलग मार्ग भी उपलब्ध रहेगा। दावा-वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल मतदाता सूची की सटीकता बढ़ाएगा, बल्कि चुनावों में पारदर्शिता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। डिजिटल इंडिया के इस युग में आधार आधारित वेरिफिकेशन एक उपयोगी और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है। चुनाव आयोग का यह प्रयास दर्शाता है कि वे लोकतंत्र में विश्वास बढ़ाने और मतदाता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। भविष्य में इस प्रक्रिया का व्यापक उपयोग चुनावी प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा।

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