भारत में कर लेखा परीक्षा: केवल अनुपालन से कहीं अधिक
हर साल हजारों भारतीय व्यवसायों और पेशेवरों को आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत कर लेखा परीक्षण (Tax Audit) कराना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य केवल अनुपालन सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि वित्तीय रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। यदि किसी व्यवसाय का वार्षिक कारोबार ₹1 करोड़ से अधिक है (या डिजिटल लेन-देन 95% से अधिक होने पर ₹10 करोड़ तक) या किसी पेशेवर की आय ₹50 लाख से अधिक है, तो कर लेखा परीक्षा अनिवार्य है। अनुमानित कर योजना (Presumptive Taxation) अपनाने वाले भी यदि निर्धारित सीमा से कम आय दिखाते हैं, तो इसके दायरे में आते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा की जाने वाली यह परीक्षा यह प्रमाणित करती है कि लेखा पुस्तकों का सही तरीके से रख-रखाव हुआ है और कर संबंधी प्रावधानों का पालन किया गया है। इसकी अंतिम तिथि सामान्यतः 30 सितम्बर होती है। समय पर रिपोर्ट दाखिल न करने पर अधिकतम ₹1.5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है। डिजिटल टैक्सेशन के दौर में कर लेखा परीक्षा बोझ नहीं, बल्कि अवसर है। यह अनुशासन लाती है, विवादों का जोखिम घटाती है और बैंकों, निवेशकों व नियामक संस्थाओं के बीच भरोसा बढ़ाती है। विकास की राह पर अग्रसर व्यवसायों के लिए, विश्वसनीयता की शुरुआत अनुपालन से ही होती है।
एडवोकेट एंड टैक्स कंसलटेंट
वकील अहमद कुरैशी
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