ब्रिटेन में ट्रम्प के राजकीय दौरे का विरोध: हजारों लोग सड़कों पर उतरे
नारेबाजी और रैली से गूंजी लंदन की सड़कों
लंदन (एजेंसी)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जहां भी विदेश यात्रा पर जाते हैं, वहां उनका स्वागत और विरोध दोनों देखने को मिलता है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी उनके राजकीय दौरे के दौरान ठीक यही नज़ारा सामने आया। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और खुले तौर पर ट्रम्प की नीतियों तथा उनके बयानों के खिलाफ नारे लगाए। यह विरोध केवल राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय नीतियों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।
विरोध की शुरुआत और आयोजन
लंदन की सड़कों पर हुए इस विरोध प्रदर्शन को ‘स्टॉप ट्रम्प कोएलिशन’ नामक संगठन ने आयोजित किया। इस संगठन ने पहले से ही सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर इस विरोध की तैयारी कर ली थी। इसमें 50 से अधिक यूनियन, सामाजिक और मानवाधिकार से जुड़े संगठन भी शामिल हुए। यह विरोध मार्च लंदन के पोर्टलैंड प्लेस से शुरू हुआ और सीधे संसद भवन चौराहे (पार्लियामेंट स्क्वायर) तक पहुंचा। लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, करीब 5000 लोग इस रैली का हिस्सा बने। इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा इंतज़ाम पुख्ता करने पड़े। इसके लिए 1600 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
प्रदर्शनकारियों के नारे और तख्तियां
विरोध में शामिल लोगों ने अपने हाथों में तख्तियां थाम रखी थीं, जिन पर विभिन्न संदेश लिखे गए थे। इनमें प्रमुख थे – “ट्रम्प नॉट वेलकम” (ट्रम्प का स्वागत नहीं है) “नो टू रेसिज्म” (नस्लभेद नहीं चलेगा) “स्टॉप आर्मिंग इजराइल” (इजराइल को हथियार देना बंद करो) इन नारों और संदेशों से साफ था कि यह विरोध केवल ट्रम्प की शख्सियत के खिलाफ नहीं था, बल्कि उनकी नीतियों पर भी गहरा असंतोष मौजूद था। विशेष रूप से, अमेरिका द्वारा इजराइल को दिए जाने वाले सैन्य समर्थन के खिलाफ लोगों ने गुस्सा जताया।
‘ट्रम्प बेबी ब्लिम्प’ की मौजूदगी
इस विरोध का सबसे अनोखा और प्रतीकात्मक हिस्सा था – ‘ट्रम्प बेबी ब्लिम्प’। यह गुब्बारा-नुमा कॉस्ट्यूम ट्रम्प को एक छोटे, गुस्सैल बच्चे के रूप में दर्शाता है, जो डायपर पहने होता है। यह पहली बार 2019 में मशहूर हुआ था और तब से ट्रम्प के हर बड़े विरोध प्रदर्शन में दिखने लगा। इस बार भी प्रदर्शनकारी इसे अपने साथ लेकर पहुंचे, जिससे माहौल और भी प्रतीकात्मक हो गया। यह कॉस्ट्यूम ट्रम्प की राजनीति और उनके विवादित बयानों का मज़ाक उड़ाने का माध्यम बना।
विरोध के कारण
लंदन में हुए इस बड़े विरोध के पीछे कई वजहें थीं –
नस्लभेदी बयानों का विरोध: ट्रम्प पर अक्सर नस्लभेदी और मुस्लिम विरोधी बयान देने के आरोप लगे। उनकी आव्रजन नीतियां और अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का फैसला ब्रिटेन समेत पूरी दुनिया में आलोचना का विषय रहा।
महिला विरोधी टिप्पणियां: ट्रम्प के कई बयानों को महिला विरोधी माना गया। ब्रिटेन की नारीवादी संस्थाओं ने भी इसी कारण इस विरोध को समर्थन दिया।
पर्यावरण नीतियों का विरोध: ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिका ने पेरिस जलवायु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। इसे लेकर पर्यावरण संगठनों में भारी नाराज़गी थी, और इस विरोध में उन्होंने भी भाग लिया।
इजराइल को सैन्य मदद: अमेरिका की विदेश नीति, खासकर इजराइल को लगातार सैन्य मदद और फिलिस्तीन के मुद्दे पर ट्रम्प का झुकाव, प्रदर्शनकारियों की नाराज़गी का एक अहम कारण बना।
ब्रिटेन सरकार का रुख
ब्रिटिश सरकार ने डोनाल्ड ट्रम्प को राजकीय दौरे पर आमंत्रित कर उनका स्वागत किया था। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि अमेरिका ब्रिटेन का सबसे बड़ा सहयोगी है और ट्रम्प का यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने के लिहाज से अहम है। हालांकि, जनता का एक बड़ा हिस्सा इससे सहमत नहीं दिखा और उन्होंने खुलेआम इस दौरे को चुनौती दी।
पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर उतर आने से राजधानी लंदन में सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई थी। लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने संसद भवन के आस-पास और प्रमुख चौराहों पर कड़ी निगरानी रखी। किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों और राहगीरों के बीच अलग-अलग रूट भी तय किए गए।
वैश्विक संदेश
लंदन में हुआ यह विरोध केवल ब्रिटेन की जनता का गुस्सा नहीं था, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक संदेश भी था। इससे स्पष्ट हो गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी नीतियों का विरोध कितना व्यापक है। यह भी दिखा कि लोकतांत्रिक समाजों में लोग अपनी असहमति को आवाज़ देने के लिए किस तरह एकजुट होते हैं।
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