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SI भर्ती घोटाले पर कांग्रेस-भाजपा की मिलीभगत उजागर

जयपुर

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हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी मंजू शर्मा पर FIR क्यों नहीं- आप राजस्थान

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। सब इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक मामले ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) में व्याप्त भ्रष्टाचार और कांग्रेस-भाजपा के नाजायज सम्बन्धों को पूरी तरह उजागर कर दिया है। राज्य की भाजपा सरकार रसूखदार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उन्हें बचाने में जुटी हुई है। आम आदमी पार्टी के राजस्थान प्रभारी धीरज टोकस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय हुए इस बड़े घोटाले में भाजपा सरकार की भूमिका भी संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार कठोर कार्रवाई करने की बजाय आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। टोकस ने कहा कि “पेपर लीक कोई एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। यह संगठित टीमवर्क है, जिसमें आरपीएससी के चेयरमैन और सदस्यों की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए, जो अब तक नहीं हुई।” उन्होंने मांग की कि भजनलाल सरकार तत्कालीन कांग्रेस शासन में नियुक्त की गई मंजू शर्मा सहित सभी आरपीएससी सदस्यों पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर मंजू शर्मा को बचा रही है क्योंकि वह कवि कुमार विश्वास की पत्नी हैं और उनके मामले में ढिलाई बरतकर घोटाले की सच्चाई दबाई जा रही है। गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी, लेकिन दो दिन पहले डबल बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी है। सहप्रभारी घनेंद्र भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच मिलीभगत कई बार उजागर हो चुकी है। वरना कोई कारण नहीं था कि घोटाला उजागर होने के बाद भी मंजू शर्मा भाजपा सरकार में पद पर बनी रहीं। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के दबाव के बाद ही मंजू शर्मा का इस्तीफा हुआ, जबकि भाजपा सरकार ने उन्हें पहले नहीं हटाया। जबकि मंजू शर्मा की नियुक्ति कांग्रेस शासन काल में अक्टूबर 2020 में हुई थी, जबकि भजनलाल शर्मा सरकार को बने 19 महीने बीत चुके हैं उसके बावजूद भी राज्य सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया बल्कि उनको बचाने के लिए सत्ता का दुरुप्रयोग करते रहे, आम आदमी पार्टी की मांग है कि भले ही मंजू शर्मा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे संपर्क है किंतु मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

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