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युवावर्ग अवसाद (डिप्रेशन) भगाए, उमंग से जिए

जयपुर

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  1. सुबह उठते ही सर्वप्रथम अपने इष्ट का धन्यवाद अदा करें कि आप जीवित हैं,
    क्योंकि दुनिया में कितने इंसान ऐसे हैं जो रात को सोते तो हैं लेकिन सुबह उठ नहीं पाते हैं।
  2. शुक्रिया कीजिए कि आप सही-सलामत हैं और आपका शरीर भी ठीक-ठाक है,
    क्योंकि दुनिया में कितने ही लोग ऐसे हैं जिनके हाथ-पैर या कोई और अंग सही नहीं हैं।
  3. शुक्रिया कीजिए कि आपके पास भरा-पूरा परिवार है माँ-पिता, दादा-दादी, चाचा-ताऊ, बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी, मौसा-मौसी और अन्य रिश्तेदार,
    क्योंकि इन सबके बीच आप सुरक्षित हैं। दुनिया में कई लोगों के माता-पिता बचपन में ही गुजर जाते हैं, और कई के पास तो रिश्तेदार होते ही नहीं हैं।
  4. शुक्रिया कीजिए कि आप बारहवीं तक पढ़े-लिखे हैं,
    क्योंकि दुनिया में लाखों बच्चों को शिक्षा नसीब नहीं होती। किसी न किसी कारण से वे पढ़ नहीं पाते।
  5. शुक्रिया कीजिए कि आपको दोनों समय का खाना मिल रहा है,
    क्योंकि दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें दिन में एक वक्त का भोजन भी नसीब नहीं होता। वे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।
  6. आपके शरीर पर कपड़े हैं और सिर पर छत है,
    क्योंकि लाखों लोगों के पास न तो पहनने के लिए पूरे कपड़े हैं, न सिर पर छत। आप खुशनसीब हैं कि ये नेमतें आपको मिली हैं।
  7. क्या सफलता का एकमात्र रास्ता नीट, जेईई, नेट या इसी प्रकार की परीक्षाओं से ही जाता है?
    बिल्कुल नहीं! आपने पूरी कोशिश की, यह आप जानते हैं। यदि आपको लगता है कि इस बार मेहनत में कहीं कोई कमी रह गई थी और आप आगे उसे सुधार सकते हैं तो फिर से कोशिश कीजिए।
    नहीं तो अपनी रुचि के अन्य कोर्स में अवसर तलाशिए। आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, नर्सिंग आदि में भी अवसर उपलब्ध हैं।
    यदि मैथ्स अच्छा है तो इंजीनियरिंग साइड में प्रयास करें। इनके अलावा भी अनेकानेक अवसर हैं। बस मेहनत, लगन और धैर्य की आवश्यकता है।
  8. आगे क्या होगा?
    मानव के लिए रास्ते कभी बंद नहीं होते। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते जाएंगे, रास्ते खुलते जाएंगे। यदि कभी लगे कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, तब भी ठंडे दिमाग से सोचिए – कोई न कोई रास्ता ज़रूर मिलेगा।
    इंसान हर क्षेत्र में कामयाब हो सकते हैं लेकिन धैर्य से प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
    कितने ही पिछली बेंच पर बैठने वाले छात्र आज आईएएस या उच्च अधिकारी हैं।
    अतः संभावनाओं का कोई अंत नहीं है।
    अपने आप पर विश्वास रखिए, मेहनत कीजिए, खुद के प्रति ईमानदार रहिए और पूरी लगन से काम कीजिए सफलता अवश्य मिलेगी।
    आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों, परसों नहीं तो अगले सप्ताह, अगले महीने, या अगले साल – सफलता ज़रूर मिलेगी।
    हिम्मत मत हारिए।

कहानी 1:

यह कहानी बताती है कि जब हम पूरी तरह हताश हो जाते हैं, उस समय यदि थोड़ी-सी मेहनत और कर लें तो ज़िंदगी बदल सकती है।

दक्षिणी अफ्रीका में सोने की खान का ठेका एक कंपनी ने लिया था। कई दिन हो गए खुदाई करते हुए, लेकिन सोना नहीं निकला। आख़िरकार कंपनी ने निर्णय लिया कि यदि अब भी सोना नहीं निकला तो खुदाई का काम बंद कर देंगे। अगले दिन भी खुदाई की, लेकिन कुछ नहीं मिला। फलतः कंपनी ने वह खदान किसी दूसरी कंपनी को बेच दी और चली गई।
दूसरी कंपनी ने खुदाई शुरू की और पहले ही दिन मात्र डेढ़ फीट खुदाई करने पर सोना निकल आया! यदि पहली कंपनी डेढ़ फीट और खुदाई कर लेती, तो किस्मत बदल सकती थी।

कहानी 2:

एक व्यक्ति को खुदा से बहुत शिकायत थी। उसका मानना था कि उससे कम योग्य लोगों के पास बहुत कुछ है जबकि उसके पास तो जूते भी फटे हुए हैं।उसने एक दिन निश्चय किया कि वह नमाज़ के बाद खुदा से शिकायत करेगा। लेकिन जब वह मस्जिद पहुँचा तो उसने देखा – एक व्यक्ति जिसके दोनों पैर कटे हुए थे, वह मस्ती में गुनगुनाते हुए सीढ़ियाँ चढ़ रहा था। अचानक उसके दिमाग को झटका लगा –
मेरे तो सिर्फ जूते फटे हुए हैं, इसके तो पैर ही नहीं हैं!
या खुदा, तूने मुझे जो भी दिया बहुत है। अब मुझे कोई शिकायत नहीं है।”

इस कहानी का मतलब यह नहीं कि हमें मेहनत नहीं करनी चाहिए या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए। हमें मेहनत खूब करनी चाहिए, और ईमानदारी से करनी चाहिए।
लेकिन अंधी दौड़ और बेवजह की तुलना में नहीं पड़ना चाहिए।

 

डॉ. श्यामसुंदर बैरवा
सहायक प्रोफेसर

 

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