योगी के भाषण काफी चर्चित हो रहे हैं !
क्या प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में है योगी आदित्यनाथ
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर मुकदमे दायर करने के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर पहुंच गया है। मुसलमानो, मुस्लिम उलेमाओं, मौलानाओं और मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम जुलूसों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के भाषण चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में बरेली के मौलाना तौकीर रजा को लेकर योगी का भाषण पूरे देश में चर्चित हो रहा है। योगी आदित्यनाथ के भाषणों में मुस्लिम समुदाय के प्रति सख्ती भरा लहज़ा तो पहले भी दिखाई देता था, लेकिन अब उनके भाषणों में जिहादियों, मौलानाओं एवं अन्य को सबक सिखाने का लहज़ा रहता है। जब मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी बोलते हैं तो कानून और मर्यादाओं का भी ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसा लगता है कि योगी जो बोल रहे हैं वही कानून और वही नियम है। योगी आदित्यनाथ के भाषणों ने उनकी छवि एक मुस्लिम विरोधी नेता की बना दी है। योगी के शासनकाल में सैकड़ो मुसलमानों के मकानो, मदरसों, मस्जिदों को अतिक्रमण के नाम पर बुलडोजर से ढहा दिया गया। कोर्ट से कई बार योगी सरकार और अधिकारियों को फटकार मिली लेकिन मामला थमता नजर नहीं आता है।
क्या प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं योगी ?
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी अच्छी तरह समझते हैं कि देश में यदि राजनीति की ऊंचाइयों पर पहुंचना है, तो हिंदूत्व और सांप्रदायिक राजनीति सबसे ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में गोधरा कांड का बड़ा योगदान रहा है। मोदी को भाजपा के वफादार समर्थक हिंदूत्व का चेहरा मानते है। भाजपा में यदि समर्थन चाहते हैं तो किसी नेता के लिए जरूरी हो जाता है कि वह मुस्लिम विरोध और हिंदूत्व की छवि बनाएं। योगी आदित्यनाथ की छवि उनके भाषण और सख्त राजनीति तरीका उनको मोदी से भी ज्यादा भाजपाइयों में लोकप्रिय बना रहा है। भाजपाइयों में
ऐसे बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सदस्य हैं जो मोदी के बाद योगी को देश का प्रधानमंत्री बनता देखना चाहते हैं। यह बात मुख्यमंत्री योगी भी अच्छी तरह जानते हैं कि वह जब ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं तब उनकी छवि देश में और भाजपा कार्यकर्ताओं में हार्डकोर हिंदू नेता की बनेगी। इसलिए कहा जा सकता है कि यह योगी का देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का प्रयास हो सकता है। क्योंकि विकास के मुद्दों पर देश में सफल राजनीति नहीं की जा सकती है?
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